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    GSVM में ‘एनिमल एक्सपेरिमेंट’ का नया दौर:पहली CAL लैब शुरू, अब चूहों की चीरफाड़ नहीं; कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से सीखेंगे MBBS छात्र

    8 hours ago

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    गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (GSVM) में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए अब ‘एनिमल एक्सपेरिमेंट’ का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। कॉलेज के फिजियोलॉजी विभाग में प्रदेश की पहली कंप्यूटर असिस्टेड लर्निंग (CAL) लैब तैयार हो गई है। अब एमबीबीएस के छात्र चूहों या अन्य जीवों की चीरफाड़ करने के बजाय कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के जरिए उनके शरीर की संरचना और अंगों की कार्यप्रणाली को समझ सकेंगे। सालों पुरानी परंपरा का अंत, तकनीक से होगी पढ़ाई एक समय ऐसा था जब मेडिकल छात्रों को रिसर्च और प्रयोगों के लिए जीवित जीवों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का मुद्दा भी उठता रहा है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि यह उत्तर प्रदेश का पहला मेडिकल कॉलेज है जहां इस तरह की हाईटेक लैब शुरू की गई है। इस पहल से छात्र बिना किसी जीव को नुकसान पहुंचाए अपनी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी कर सकेंगे। 25 स्मार्ट कंप्यूटर और आधुनिक सॉफ्टवेयर फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. डॉली रस्तोगी ने बताया कि इस लैब में फिलहाल 25 अत्याधुनिक कंप्यूटर लगाए गए हैं। इन कंप्यूटरों में खास ‘एनिमल एक्सपेरिमेंट’ सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए गए हैं, जो छात्रों को वही अनुभव देते हैं जो पहले वास्तविक प्रयोगों के दौरान मिलता था। डिजिटल असेसमेंट की सुविधा लैब के सॉफ्टवेयर में छात्रों के मूल्यांकन के लिए असेसमेंट शीट्स भी दी गई हैं। छात्र प्रैक्टिकल पूरा करने के बाद वहीं डिजिटल तरीके से अपना असेसमेंट भर सकते हैं। भविष्य में और सॉफ्टवेयर जुड़ेंगे कॉलेज प्रशासन के अनुसार आने वाले समय में इस लैब में रिसर्च से जुड़े और भी सॉफ्टवेयर जोड़े जाएंगे, जिससे छात्रों को शोध कार्यों में और सुविधा मिलेगी। AI और पोर्टेबल मशीनों से होगा मरीजों का सटीक इलाज लैब के उद्घाटन के साथ ही कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला भी शुरू हुई। इसमें विशेषज्ञों ने चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। डॉक्टरों का कहना है कि AI की मदद से मरीजों की बीमारियों का जल्द पता लगाया जा सकेगा और इलाज की प्रक्रिया भी तेज होगी। विशेषज्ञों ने बताया कि अब बाजार में ऐसी स्मार्ट और पोर्टेबल बीपी मशीनें आ गई हैं, जिन्हें मोबाइल की तरह कहीं भी ले जाया जा सकता है। इन मशीनों से 24 घंटे ब्लड प्रेशर की निगरानी संभव है, जिससे हार्ट और बीपी के मरीजों के इलाज में काफी मदद मिल सकेगी।
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