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    हाईकोर्ट में सरकार ने मस्जिद प्रकरण में दाखिल किया जवाब:मस्जिद पक्ष को 3 सप्ताह का समय, 5 सितंबर को तड़के 6 बुलडोजरों से तोड़ी थी मस्जिद

    1 hour ago

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    सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित विवादित मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी के अनुसार, सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार और सहारनपुर जिला प्रशासन की ओर से अपना जवाबी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल किया गया। सरकार और प्रशासन का पक्ष रिकॉर्ड पर आने के बाद हाईकोर्ट ने मस्जिद पक्ष को जवाब का अध्ययन कर अपना प्रत्युत्तर (री-काउंटर) दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। यह मामला सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बने ढांचे से जुड़ा है। जमीन पर कब्जे, बेदखली और क्षतिपूर्ति को लेकर जिला स्तर पर लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। इसके बाद प्रशासन ने 5 सितंबर 2026 को तड़के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर ढांचे को ध्वस्त कर दिया था। कार्रवाई से पहले जमीन खाली कराने के आदेश और उनके खिलाफ चली न्यायिक प्रक्रिया इस विवाद के प्रमुख हिस्से रहे हैं। विकास त्यागी ने हाईकोर्ट में सरकार और प्रशासन की ओर से जवाब दाखिल किए जाने को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के पक्ष में उनका कानूनी पक्ष मजबूत हुआ है। हालांकि, यह शिकायतकर्ता का दावा है। हाईकोर्ट में मामले की अंतिम स्थिति और दोनों पक्षों के तर्कों पर निर्णय होना अभी बाकी है। जुलाई में बेदखली का आदेश और सितंबर में ध्वस्तीकरण कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद केवल ध्वस्तीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन के स्वामित्व, उसके वक्फ संपत्ति होने के दावे, सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक कार्रवाई के अधिकार को लेकर भी अदालतों में सवाल उठे। इस प्रकरण में 16 जुलाई 2026 को नगर मजिस्ट्रेट ने बेदखली और क्षतिपूर्ति का आदेश दिया था। इसके खिलाफ अपील जिला जज की अदालत में दाखिल की गई, जिसे 2 सितंबर को खारिज कर दिया गया। इसके तीन दिन बाद 5 सितंबर को प्रशासन ने ढांचा ध्वस्त कर दिया। 22 अक्टूबर 2026 को सरकार और प्रशासन ने जवाब दाखिल किया, अब मस्जिद पक्ष को प्रत्युत्तर देना है। मुख्य शिकायतकर्ता विकास त्यागी के अनुसार, आज की सुनवाई में राज्य सरकार और सहारनपुर जिला प्रशासन की ओर से काउंटर हलफनामा दाखिल किया गया। इसके बाद मस्जिद पक्ष को जवाब का अध्ययन कर तीन सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने का समय दिया गया। इस समयसीमा के बाद मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्क महत्वपूर्ण होंगे। जमीन के स्वामित्व पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सरकारी पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि विवादित जमीन सरकारी अभिलेखों में कलेक्ट्रेट या कचहरी के नाम दर्ज है। सरकारी वकील ने यह भी सवाल उठाया कि मस्जिद पक्ष जमीन को मूल रूप से निजी व्यक्तियों की संपत्ति बताने के साथ वक्फ संपत्ति होने का दावा कर रहा है, लेकिन वक्फ के लिए जमीन समर्पित किए जाने का दस्तावेज पेश नहीं किया गया। दूसरी ओर, मस्जिद पक्ष की याचिका में दावा किया गया कि जमीन मूल रूप से याकूब खान और वाहिद खान की थी और उसका इस्तेमाल वक्फ के रूप में किया जा रहा था। याचिका में यह भी कहा गया कि मस्जिद लंबे समय से वहां मौजूद थी तथा बेदखली और ध्वस्तीकरण से जुड़े आदेश कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर थे। ये दोनों पक्षों के अदालत में रखे गए तर्क हैं; इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष को अलग से देखना होगा। पढ़िए...पूरा मामला
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