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    हमला करने वाले तेंदुए अब लेपर्ड सफारी में रहेंगे:यूपी में 3 बन रहीं; जंगल के पास रहने वालों को मिलेगा रोजगार

    16 hours ago

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    यूपी में हिंसक होने वाले तेंदुओं को सुरक्षित माहौल में रखा जाएगा। इसके लिए 3 नई लेपर्ड सफारी बनाई जा रही हैं। इसके 2 फायदे होंगे। पहला- रेस्क्यू के बाद तेंदुओं को जंगल में छोड़ने पर वह दोबारा शहर-देहात के इलाकों में हमला नहीं कर सकेंगे। दूसरा- तेंदुआ सफारी से वाइल्डलाइफ टूरिज्म बढ़ेगा। ये 3 नई लेपर्ड सफारी बनाने के लिए वो जगहें चुनी गई हैं, जहां पहले से टाइगर रिजर्व हैं। पहली लेपर्ड सफारी बिजनौर जिले के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के पास बनेगी। दूसरी पीलीभीत टाइगर रिजर्व के एक हिस्से में बनाई जाएगी। तीसरी लेपर्ड सफारी बलरामपुर के सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग में बनेगी। अभी सिर्फ इटावा में ही लायन सफारी है, जबकि प्रदेश में 4 टाइगर रिजर्व हैं। इनमें दुधवा टाइगर रिजर्व, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व तथा रानीपुर टाइगर रिजर्व शामिल हैं। पढ़िए रिपोर्ट… सेंट्रल जू अथॉरिटी से मंजूरी के बाद शुरू होगा काम वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, शुरुआत में केवल पीलीभीत में ही लेपर्ड सफारी बनाने की योजना थी। हालांकि, राज्य में तेंदुओं की बढ़ती आबादी और रिहायशी इलाकों में उनके बढ़ते मूवमेंट को देखते हुए दो अन्य जिलों को भी इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। सरकार की एक हाई लेवल कमेटी की बैठक में इस योजना पर मुहर लगी है। इसके लिए 'डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट चेंज' को जल्द से जल्द विस्तृत प्रस्ताव (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। गांवों को आतंक से राहत मिलेगी, पकड़े तेंदुए भाग नहीं सकेंगे वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स का कहना है कि वर्तमान में आबादी वाले इलाकों में घुसने वाले तेंदुओं को वन विभाग ट्रैंकुलाइज (बेहोश) कर दोबारा जंगल में छोड़ देता है। लेकिन, ये तेंदुए बार-बार भटककर जंगल से सटे गांवों में पहुंच जाते हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत बनी रहती है। अब सरकार ने 'थ्री-वे स्ट्रैटजी' तैयार की है- बिजनौर में तेंदुओं का सबसे ज्यादा आतंक बिजनौर का ‘अमानगढ़ टाइगर रिजर्व’ नई लेपर्ड सफारी के लिए इसलिए चुना गया, क्योंकि वेस्ट यूपी में मानव-तेंदुआ संघर्ष सबसे ज्यादा यहीं है। गन्ने के खेत तेंदुओं के छिपने की सुरक्षित जगह बन चुके हैं, जिससे ग्रामीणों पर हमले बढ़े हैं। अमानगढ़ में सफारी और रेस्क्यू सेंटर बनने से तेंदुओं को सुरक्षित ठिकाना मिलेगा। यहां पहले से घने जंगल, पानी और शिकार मौजूद हैं, इसलिए नेचुरल होम तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दिल्ली-NCR और उत्तराखंड के करीब होने से इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। डीएफओ जय सिंह कुशवाहा ने बताया- जहां भी तेंदुआ दिखने की शिकायत मिलती है, वहां तुरंत रेस्क्यू टीम भेजकर पिंजरे लगाए जाते हैं। पिछले साल जिले में 36 तेंदुओं और एक बाघ पकड़ा गया था। इस साल जनवरी से अब तक 23 तेंदुआ पकड़े जा चुके हैं। पकड़े गए तेंदुओं को सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जा रहा है। पीलीभीत में 30 KM एरिया में बनेगा लेपर्ड सफारी यूपी सरकार पीलीभीत टाइगर रिजर्व के गोपालपुर वन क्षेत्र में लगभग 30 किलोमीटर में लेपर्ड सफारी डेवलप करेगी। इस प्रोजेक्ट पर करीब 49 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सफारी में मानव-तेंदुआ संघर्ष वाले इलाकों से पकड़े गए तेंदुओं को रखा जाएगा। यहां रेस्क्यू सेंटर, ब्रीडिंग एरिया, वेटरनरी सुविधा, विजिटर जोन और सफारी ट्रैक बनाए जाएंगे। वन विभाग जल्द DPR तैयार कर सेंट्रल जू अथॉरिटी को भेजेगा। बलरामपुर का सोहेलवा- तेंदुए के हमले कम करने में मदद मिलेगी बलरामपुर का सोहेलवा वाइल्डलाइफ सेंचुरी नेपाल बॉर्डर से सटा हुआ है। यहां जंगल के किनारे बड़ी संख्या में आदिवासी और ग्रामीण रहते हैं। जब ये मवेशी चराने या लकड़ी बीनने जंगल जाते हैं, तब तेंदुए इनके मवेशियों पर हमला कर देते हैं। यहां रेस्क्यू सेंटर बनने से तेंदुओं को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा सकेगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर दैनिक भास्कर ने वन मंत्री अरुण कुमार से बात की… सवाल- लेपर्ड सफारी बनाने के लिए अनुमति मिल गई? वन मंत्री- सेंट्रल गवर्नमेंट और वाइल्डलाइफ की अनुमति मिलनी बची है। उसके बाद हम काम शुरू कर देंगे। सवाल- सबसे पहली सफारी कौन-सी बनकर तैयार हो जाएगी? वन मंत्री- सबसे पहली सफारी पीलीभीत में शुरू होगी। उसके बाद बाकी जगह पर काम शुरू होंगे। धीरे-धीरे यूपी में वाइल्डलाइफ टूरिज्म बढ़ाने की तरफ हम कदम बढ़ा रहे हैं। सवाल- वाइल्डलाइफ टूरिज्म के लिए वन विभाग और क्या कर रहा? वन मंत्री- देखिए, जो आदिवासी जंगल के पास रहते हैं, हम उन्हें अपने घरों को होमस्टे में बदलने की अनुमति दे रहे हैं। टूरिस्ट वहां रह सकेंगे, लेकिन उनका वेरिफिकेशन हमारा विभाग करेगा। जिससे वन्य जीवों को दिक्कत न हो। साथ ही दूसरे स्टेट से आए लोगों को हमारा कल्चर भी करीब से देखने का मौका मिलेगा। जानिए, लेपर्ड सफारी कितनी खास होगी इन सफारी को इंटरनेशनल मानकों और सेंट्रल जू अथॉरिटी के नियमों के मुताबिक तैयार किया जा रहा है, जिनमें आधुनिक सुविधाएं होंगी। सफारी ट्रैक और क्लोज्ड व्हीकल- पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से जालीदार और बंद गाड़ियों (जैसे जिप्सी या मिनी बस) की सुविधा होगी। इससे लोग सुरक्षित दूरी से तेंदुओं को प्राकृतिक रूप से घूमते और शिकार करते देख सकेंगे। विजिटर इंफॉर्मेशन सेंटर- यहां ऑडियो-विजुअल रूम होगा। जहां आने वाले पर्यटक तेंदुओं के जीवन, उनकी आदतों और वनों के संरक्षण को देख और समझ सकेंगे। वॉच टॉवर- सफारी और उसके आसपास के बड़े हिस्से पर नजर रखने के लिए ऊंचे वॉच टॉवर बनाए जाएंगे। जहां से पर्यटक दूरबीन के जरिए वन्यजीवों को निहार सकेंगे। वेटरनरी हॉस्पिटल- सफारी परिसर के अंदर ही एक हाईटेक रेस्क्यू सेंटर होगा। वहां आबादी वाले इलाकों से पकड़े गए घायल या हिंसक तेंदुओं का इलाज करने के लिए डॉक्टरों की विशेष टीम रहेगी। ब्रीडिंग एरिया- तेंदुओं के कुनबे को सुरक्षित तरीके से बढ़ाने के लिए एक अलग से संरक्षित ब्रीडिंग जोन बनाया जाएगा। कैफेटेरिया- टूरिस्ट के खाने-पीने के लिए कैफे और स्थानीय आदिवासियों (जैसे बलरामपुर में थारू जनजाति) द्वारा बनाए गए हैंडीक्राफ्ट और प्रोडक्ट खरीदने के लिए दुकानें होंगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें - मुख्तार के बेटे अब्बास के नाम 8 हथियार, यूपी में 10 लाख लाइसेंस, 6 हजार पर क्रिमिनल केस, इनमें राजा भैया और धनंजय सिंह भी तस्वीर 2 अक्टूबर, 2025 की है। मेज पर 200 से ज्यादा देसी-विदेशी हथियार सजे हैं। प्रतापगढ़ जिले के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह विजयदशमी (दशहरा) पर शस्त्र पूजन कर रहे हैं। पूजा के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा- सारे शस्त्र हमारे हैं। जो हमारा है, वो समर्थकों का है। जो समर्थकों का है, वो हमारा है। पढ़िए पूरी खबर…
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