Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    'हमारा सब ले जाओ, बस मेरा बेटा लौटा दो':मां बोली- अब हम कैसे जिएंगे, लखनऊ-अग्निकांड में जान गंवाने वाले आदित्य का हुआ अंतिम संस्कार

    9 hours ago

    2

    0

    "हमारा सब कुछ ले जाओ, लेकिन हमारा बेटा वापस दे जाओ। मेरा भैया अभी 25 साल का भी नहीं हुआ था। आप लोग बताइए हम कैसे रहेंगे…" यह कहना है उस बेबस मां का है, जिसने लखनऊ के भीषण अग्निकांड में अपने 21 साल के जवान बेटे को खो दिया। लखनऊ अग्निकांड में सीतापुर के बिसवां निवासी आदित्य श्रीवास्तव (21) की जिंदगी छीन ली। जब देर रात उसका शव पैतृक आवास पहुंचा, तो पूरे इलाके में मातम पसर गया। आदित्य की मां-बहन और भाइयों का रोरोकर बुरा हाल था। आदित्य के पिता बेटे की मौत की खबर सुनकर सदमे में चले गए। वह कुछ भी बोल नहीं पा रहे हैं। आदित्य का शव जैसे ही घर पहुंचा, माहौल चीख-पुकार में बदल गया। छोटी बहन निष्ठा (21) अपने भाई के शव से इस कदर लिपटकर बिलख पड़ी कि वहां मौजूद हर शख्स फफक कर रो पड़ा। निष्ठा बार-बार शव पर सिर रखकर रोती रही। परिजनों के संभालने के बाद भी वह संभल नहीं पा रही थी। जिस भाई के साथ उसने बचपन बिताया, उसके बिछड़ने का दर्द आंसुओं के सैलाब में बह रहा था। निष्ठा ने बताया- "हमें जानकारी मिली थी कि नीचे जो पेट शॉप थी, उसके AC में शॉर्ट सर्किट से आग लगी। वहां मौजूद लोगों ने सबसे पहले अपने जानवरों (Pets) को बचाया, लेकिन ऊपर किसी को आग लगने की जानकारी नहीं दी। इसी वजह से आग फैल गई।" निष्ठा ने आगे बताया, "उस बिल्डिंग में ऊपर बुआ का बेटा भवन श्रीवास्तव भी था। आग का पता चलते ही वह खिड़की से कूद गया। उसने आदित्य से भी कूदने को कहा, लेकिन मेरे भाई की हिम्मत नहीं हुई। वह कूद नहीं पाया। आदित्य और वहां मौजूद 14-15 बच्चों ने जान बचाने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। दोपहर करीब 2:30 बजे आदित्य ने मुझे कॉल किया था, लेकिन मैं उठा नहीं पाई। शाम 5 बजे मेरे भाई का शव बाहर निकाला गया।" बहन का सीधा आरोप है कि मदद बहुत देर से पहुंची। अगर फायर ब्रिगेड समय पर आती तो आदित्य बच सकता था। सूचना के करीब डेढ़ घंटे बाद दमकल की गाड़ियां वहां पहुंचीं, तब तक सब खत्म हो चुका था। आदित्य वहां एक '3D कैरेक्टर आर्टिस्ट' के तौर पर काम करता था। सुबह वह बहुत अच्छे मूड में घर से निकला था। अपाहिज हो जाता तो भी पाल लेती… आदित्य की मां कल्पना श्रीवास्तव के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन्होंने रोते हुए मीडिया और सिस्टम के सामने अपना दर्द और गुस्सा जाहिर किया: "मेरे भैया में सब अच्छाइयां ही थीं। वह दिल का बिल्कुल बुरा नहीं था, हमेशा सच बोलता था। 6 मई को वह घर से गया था, फिर बीच में 23-24 मई के आसपास घर आया था। कल का मंजर बहुत भयानक था। चारों तरफ सिर्फ काला धुआं था। लोग कह रहे थे बच्चे बच जाएंगे, लेकिन मैं जानती थी कि इस काले धुएं में बच्चे कैसे बचेंगे? वही हुआ जिसका डर था।" मां ने कहा, "पूरी तरह लापरवाही हुई है। मेरी मीडिया से अपील है कि आधी-अधूरी बातें मत दिखाइए, जो सच बोला जाता है उसे काट दिया जाता है। अगर वहां दमकल की गाड़ियां और फोर्स समय पर होती, तो आज मेरा बच्चा जिंदा होता। अगर उसे चोट या जलन भी आई होती, तो हम उसे पाल लेते। वह बिस्तर पर रहता तो भी मैं उसकी देखभाल करती, उसे बाथरूम तक ले जाती। लेकिन व्यवस्था सही नहीं थी।" सहायता राशि के सवाल पर मां फूट पड़ीं और बोलीं- "मेरा भैया अभी 25 साल का भी नहीं हुआ था। आप लोग बताइए हम कैसे रहेंगे? कहा जा रहा है सहायता राशि दी जा रही है। क्या वो रुपया मेरा बेटा वापस ला देगा? हमारा सब ले जाओ, बस मेरा बेटा लौटा दो।" एक खुशहाल परिवार, जो अब बिखर गया बिसवां क्षेत्र के रहने वाले आदित्य के पिता आलोक श्रीवास्तव पेशे से अधिवक्ता (वकील) हैं और मां कल्पना प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र हैं। आदित्य चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। बड़ी बहन मेधा श्रीवास्तव (27), हैं उनकी शादी बलरामपुर में हुई है। छोटी बहन निष्ठा श्रीवास्तव (21), जो बीएससी कर रही है। सबसे छोटा भाई धैर्य श्रीवास्तव (14), जो अभी पढ़ाई कर रहा है। 10 साल से चल रही थी अवैध बिल्डिंग इस हादसे ने पूरे सीतापुर और देश को झकझोर कर रख दिया है। विधायक ज्ञान तिवारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा- "आदित्य और जान गंवाने वाले सभी 15 बच्चे (जिनकी उम्र 19 से 22 साल थी) हमारे देश और सीतापुर का भविष्य थे। घटना की सूचना मिलते ही हम रात में वहां पहुंचे। सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका संज्ञान लिया है। मामले की जांच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है। लेकिन ये सच है कि आदित्य और उन 15 बच्चों को वापस नहीं लाया जा सकता।" विधायक ज्ञान तिवारी से जब पूछा गया कि बिल्डिंग 10 साल पहले अवैध रूप से बनी थी। हर साल फायर NOC कैसे मिलती रही? उन्होंने कहा- “हां, यह साफ तौर पर सिस्टम की भारी नाकामी है। सीएम ने इसका संज्ञान लिया है और बड़ी कार्रवाई करते हुए भवन मालिक, उसके बेटे और एक अन्य संचालक (कुल 4 लोगों) को गिरफ्तार किया गया है। कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है और उन पर भी गाज गिरेगी। आगे से ऐसे संस्थानों को सख्त हिदायत दी जाएगी कि मानकों को पूरा किए बिना संचालन न हो।” हादसे से जुड़ी ये 3 खबरें भी पढ़िए- 22 तस्वीरों में लखनऊ अग्निकांड- पहली मंजिल से कूदा स्टूडेंट, ग्रिल पर गिरा, जलती दुकान से बिल्लियों को बचाया 'पापा आग लग गई, बाथरूम में हूं, बचा लो': मां रोते हुए बोली- मेरे बच्चे को ढूंढ दो, फिर बेहोश हुई लखनऊ अग्निकांड- ऑटोमैटिक गेट ने ली 15 जानें, एक ही सीढ़ी से आने-जाने का रास्ता ------------------------------ ये खबर भी पढ़ेंः- लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतें, जांच के लिए SIT पहुंची:सभी शव परिजन को सौंपे, 23 साल की बेटी का शव देख मां बेहोश लखनऊ की कोचिंग में आग लगने की घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार सुबह 11 बजे हादसे की जांच के लिए SIT और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने बिल्डिंग की जांच की। SIT टीम में IPS प्रवीण कुमार और IAS अमृत अभिजात शामिल हैं। शवों का 7 घंटे तक पोस्टमॉर्टम चला। सभी शव परिजनों को सौंप दिए गए। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    गंगा नदी में नाव पर बैठकर बीयर पार्टी, नॉनवेज खाया:काशी पुलिस ने पांच नाविकों को गिरफ्तार किया, 5 साल तक की हो सकती सजा
    Next Article
    गाजियाबाद में 16 Km की गर्ति से गर्म हवाएं:अगले 2 दिनों में मौसम बदलने का अनुमान, दिन का तापमान 38 डिग्री सेलसियस

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment