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    होम्योपैथिक डॉक्टर डॉ राणा लंदन जाएंगे:दिल में छेद वाले बच्चों का बिना ऑपरेशन इलाज करते है डॉ राणा, हाउसेज ऑफ पार्लियामेंट लंदन ने आमंत्रित किया

    5 hours ago

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    जन्मजात हृदय रोग (दिल में छेद) से पीड़ित बच्चों के बिना ऑपरेशन, उपचार के होलिस्टिक ट्रीटमेंट मॉडल पर कार्य कर रहे कुशीनगर चिकित्सक डॉ. राना प्रताप यादव पिछले डेढ़ दशक में देश के विभिन्न हिस्सों से आए अनेक बाल-हृदयरोगियों को इलाज देकर नया जीवन दे चुके हैं। उनकी इस उपलब्धि पर ब्रिटेन की संसद (हाउसेस ऑफ पार्लियामेंट), लंदन में आमंत्रित किया गया है। बता दें कि वर्तमान में भी डॉ. राना प्रताप यादव के पास उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों से आए लगभग तीन दर्जन जन्मजात हृदयरोगी बच्चे उपचाररत हैं। डॉ. यादव का उपचार विशेष रूप से उन मामलों में ध्यान आकर्षित कर रहा है, जिनमें बड़े शहरों के हृदय विशेषज्ञों ने आपरेशन को ही एकमात्र विकल्प बताया था। लेकिन डॉ. राना प्रताप यादव ने दीर्घकालिक समग्र चिकित्सा और चरणबद्ध उपचार के माध्यम से बच्चों की स्थिति में सुधार और सामान्य जीवन की ओर वापसी तय किये हैं। इन केसेज में मिल चुकी है सफलता सफलता मिलने वाले मामलों में कुशीनगर के कसया क्षेत्र के ग्राम पिपरा तिवारी की बेबी पाउनी पाण्डेय पुत्री छोटे पाण्डेय शामिल हैं, जिनके दिल में वर्ष 2015 में ढाई माह की अवस्था में छेद का निदान शुरू हुआ था और शल्य-क्रिया की सलाह दी गई थी। लेकिन डॉ. राना के उपचार से (2015 से 2018) तीन वर्षों में उनकी स्थिति सामान्य हुई और वर्तमान में वे स्वस्थ जीवन जी रही हैं। इसी प्रकार सहारनपुर जनपद के आमिर पुत्र आसिफ मलिक का वर्ष 2020 में तीन वर्ष की आयु में गंभीर हृदय दोष बताया गया था, 2020 से 2024 तक चार वर्ष के उपचार के बाद अब सामान्य अवस्था में हैं। डॉ. राना को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के पाण्डेय बसडीला गांव से आने वाले डॉ. राना के उपचार अनुभवों ने अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा समुदाय का भी ध्यान आकर्षित किया है। इसी क्रम में उन्हें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटिश संसद के संयुक्त तत्वावधान में 10 अप्रैल 2026 को लंदन स्थित हाउसेस ऑफ पार्लियामेंट परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय होलिस्टिक मेडिसिन कॉन्फ्रेंस-2026 में भारत के प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित किया गया है, जहाँ वे जन्मजात हृदय रोग के समग्र उपचार से जुड़े अपने अनुभव और परिणाम प्रस्तुत करेंगे। डॉ यादव का कहना है कि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के उपचार में हमारा प्रयास केवल रोग के शारीरिक पहलू तक सीमित नहीं होता, बल्कि दीर्घकालिक समग्र चिकित्सा, नियमित निगरानी और परिवार के सहयोग से बच्चे को सामान्य जीवन की ओर वापस लाना होता है। जिन बच्चों के लिए शल्य-क्रिया ही एकमात्र विकल्प बताया गया था, उनमें सुधार देखना हमारे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने अनुभव साझा करना भारत की समग्र चिकित्सा दृष्टि की वैश्विक प्रासंगिकता को प्रस्तुत करने का अवसर है।
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