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    हूती विद्रोहियों का सबसे बड़ा हमला..सऊदी के जहाज को उड़ाया!

    2 hours ago

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    मुस्लिमों के लिए सबसे अहम धार्मिक जगह मक्का के नाम पर तीन देशों ने इस्लामिक नेटो बनाया और तीन देशों का इस्लामिक नेटो तीन दिन भी चल नहीं पाया। ना पाकिस्तानी होती के हमलों का जवाब दे रहे हैं ना सऊदी उनसे लड़ पा रहा है और अब ईरान के आदेश पर यमन के होती विद्रोहियों ने बाब अल मंदब स्टेट में सऊदी से जुड़े जहाज पर मिसाइल हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें चार क्रू मेंबर मारे गए और तीन पाकिस्तानी इसमें मारे गए। इसके बावजूद पाकिस्तान चुप है। रिपोर्ट के मुताबिक तंजानिया के झंडे वाले इस जहाज का नाम तियामा था और यह ओमान के सलालाहा पोर्ट से जिबूती जा रहा था। जिबूती जाने के दौरान हमला किया गया। होती विद्रोही ने 20 जुलाई को सऊदी जहाजों की नाकेबंदी शुरू की थी। इसके बाद से रडरसी में सऊदी से जुड़े आठ जहाजों पर होती हमला कर चुके हैं। इनमें एनेसलिया, लयला, गज़ल और वफा जैसे जहाज शामिल है। ये हमला ऐसे समय हुआ जब हॉर्मोस ट्रेड बंद होने से समुद्री कारोबार पहले से ही सऊदी का बहुत प्रभावित है और सऊदी के लिए हॉर्मोनस बंद होने के बाद तेल कारोबार के लिए ये आखिरी ऑप्शन की तरह रास्ता था। इसे भी पढ़ें: US Dollar के मुकाबले 3 पैसे मजबूत होकर 95.33 पर बंद हुआ रुपया, वैश्विक बाजारों से मिला सहारासऊदी ने पाकिस्तान तुर्की के साथ डिफेंस डील भी की थी कि शायद अल्लाह के नाम पर ये दोनों देश उसकी मदद कर दें। होती और ईरान से बचा लें। लेकिन हूतियों के हमले में सऊदी के जहाज पर पाकिस्तानियों के मारे जाने के बाद भी पाकिस्तान इसका जवाब नहीं दे पा रहा है। जबकि शर्त यही थी कि तीनों देशों में किसी एक देश पर भी अगर हमला हुआ तो तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और तीनों देश मिलकर जवाब देंगे। पर इसके बावजूद सिर्फ सन्नाटा है। इसके एक दिन पहले ही ईरान के इशारे पर इन्हीं होती विद्रोहियों ने सऊदी की सबसे अहम आराम को रिफाइनरी पर अटैक करके बड़े धमाके किए थे। और अब बाब अल मंडेब में भी जहाजों पर हमले बढ़ रहे हैं। इसमें शिपिंग कंपनियों की परेशानी बढ़ गई है। सऊदी की परेशानी बढ़ गई है। होती विद्रोही रेड सी से गुजरने वाले जहाजों को लगातार टारगेट कर रहे हैं। सऊदी के जहाजों को लेकर बड़ा नुकसान है। इसे भी पढ़ें: US Army का Apache helicopter Texas में हुआ दुर्घटनाग्रस्त, 2 की मौतसऊदी जहाजों पर होती के हमलों में यह पहली बार है जब किसी की मौत हुई है। हालांकि नुकसान लगातार हुआ है। होती के हमलों का असर सऊदी अरब के तेल एक्सपोर्ट पर भी पड़ा है। समुद्र में जहाजों की आवाजाही कम हो गई है। सुरक्षा के डर से कई जहाज रेड सी और स्विस कैनाल के रास्ते से बच भी रहे हैं। ईरान और सऊदी अरब यमन में युद्ध लड़ रहे हैं। दोनों देश दूसरे के खिलाफ यहां गुटों का समर्थन करते हैं। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली सरकार का सपोर्ट करता है। जबकि ईरान होतियों के साथ है। संगठन यमन के बड़े हिस्से पर कंट्रोल रखते हैं। होतियों ने 2023 और 2024 में भी रेड सी में कई जहाजों पर हमले किए थे। इससे समुद्री यातायात पर असर पड़ा था और सऊदी को नुकसान हुआ था। इस समय हुती के हमलों का असर इसलिए ज्यादा महसूस हो रहा है क्योंकि दुनिया पहले से ही हॉर्मोस स्ट्रेट के बंद होने से जूझ रही है। जैसे ईरान हॉर्मोस में टोल वसूलना चाहता है ठीक वैसे ही यमन के होती विद्रोही रेड सी यानी कि लाल सागर के दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इसे कब से लागू किया जाएगा इसकी कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।
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