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    Hazeena Syed ने KC Venugopal और Alka Lamba पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर कांग्रेस पार्टी में भूचाल ला दिया है

    3 hours from now

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    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल अक्सर किसी न किसी विवाद को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं, और अब एक ताजा मामला तमिलनाडु से सामने आया है जिसने पार्टी के भीतर चल रहे टकराव को खुलकर उजागर कर दिया है। इस बार विवाद के केंद्र में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा और तमिलनाडु महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष हजीना सैयद आमने सामने हैं, जिनके बीच आरोप प्रत्यारोप ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।पूरा विवाद दस अप्रैल को उस समय शुरू हुआ जब अलका लांबा की ओर से हजीना सैयद को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित करने का आदेश जारी किया गया। पत्र में हजीना सैयद पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया और इसे संगठन की अनुशासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बताया गया। लेकिन इस कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद घटनाक्रम ने नाटकीय मोड़ ले लिया। हजीना सैयद ने सामने आकर दावा किया कि वह पहले ही उसी दिन दोपहर एक बजे एक प्रेस वार्ता में अपने पद से इस्तीफा दे चुकी थीं। ऐसे में निष्कासन का आदेश न केवल अनावश्यक बल्कि अपमानजनक भी है।इसे भी पढ़ें: Pawan Khera के समर्थन में उतरे Rahul Gandhi, कहा- Himanta देश के सबसे भ्रष्ट CM, हम डरेंगे नहींसैयद ने इसके बाद जिस तीखे अंदाज में प्रतिक्रिया दी, उसने विवाद को और गहरा कर दिया। उन्होंने अलका लांबा पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि महिला कांग्रेस के भीतर उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया। उन्होंने दावा किया कि सदस्यता के नाम पर धन की वसूली होती है और पदाधिकारियों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए सैयद ने दस्तावेज भी साझा किए, जिनमें एक ईमेल शामिल है। इस ईमेल में उन्होंने अलका लांबा पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और व्यक्तिगत आचरण से जुड़े आरोप लगाए। उन्होंने सवाल उठाया कि सदस्यता से मिलने वाले धन का उपयोग कैसे हो रहा है और क्या संगठन के खातों का सही तरीके से लेखा परीक्षण होता है?इसी ईमेल में सैयद ने एक और विवादास्पद आरोप लगाते हुए केसी वेणुगोपाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने अलका लांबा पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए दावा किया कि वेणुगोपाल उनके 'मित्र' हैं और इस तरह के संबंधों के आधार पर संगठन में प्रभाव का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह आरोप सामने आते ही विवाद और अधिक संवेदनशील हो गया, क्योंकि इससे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की छवि पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।इसके साथ ही सैयद ने चेतावनी दी कि उनके पास कानूनी प्रमाण मौजूद हैं और वह अवैध वित्तीय लेनदेन तथा सदस्यता से जुड़े कथित घोटाले को लेकर प्राथमिकी दर्ज करा सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके इस्तीफे की मुख्य वजह लगातार होने वाला उत्पीड़न और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचना है। अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने लिखा कि जब स्वयं उन्हें ही न्याय नहीं मिल पा रहा है तो वह अपने पद पर रहते हुए अन्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा कैसे कर सकती हैं? उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।सैयद ने तमिलनाडु कांग्रेस के भीतर कथित भ्रष्ट व्यवस्था की भी आलोचना की और कहा कि इस कारण पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता निराश हो रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके विधानसभा चुनाव का टिकट पक्षपातपूर्ण तरीके से काट दिया गया, जो आंतरिक राजनीति का परिणाम था। वहीं अलका लांबा ने सैयद के आरोपों पर कहा है कि हर किसी को टिकट नहीं दिया जा सकता और टिकट नहीं मिलने पर इस तरह के आरोप लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सैयद आरोप लगाने के लिए इतने निचले स्तर तक चली गईं।देखा जाये तो इस पूरे विवाद ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, पारदर्शिता और आंतरिक संवाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अलका लांबा और हजीना सैयद के बीच यह टकराव अब केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह संगठनात्मक संकट का संकेत भी देता है।हम आपको यह भी बता दें कि केसी वेणुगोपाल पर हाल ही में यह आरोप लगा था कि उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान टिकट वितरण में अनियमितताएं बरती थीं। इस मामले में उन्होंने केरल की अलप्पुझा की अदालत में मानहानि का मामला दायर किया है। वेणुगोपाल का कहना है कि हरियाणा के एक व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं, जिनका उद्देश्य आगामी केरल विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है।देखा जाये तो कांग्रेस पार्टी इस समय दोहरे दबाव में दिखाई दे रही है। एक ओर तमिलनाडु में अलका लांबा और हजीना सैयद के बीच खुला टकराव संगठन की आंतरिक चुनौतियों को उजागर कर रहा है, वहीं दूसरी ओर केसी वेणुगोपाल से जुड़ा विवाद पार्टी की सार्वजनिक छवि पर असर डाल सकता है। आने वाले चुनावों के मद्देनजर ये घटनाएं कांग्रेस के लिए गंभीर संकेत देती हैं, जिनसे निपटना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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