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    ईरान-अमेरिका शांति वार्ता में पाकिस्तान और कतर की भूमिका पर भड़के अमेरिकी सीनेटर, याद दिलाया बिन लादेन का इतिहास

    11 hours ago

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    अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए चल रही ऐतिहासिक शांति वार्ता कूटनीतिक मोर्चे पर जितनी आगे बढ़ रही है, अमेरिकी घरेलू राजनीति में इस पर उतना ही बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस द्वारा इस बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ किए जाने के बाद, दो शीर्ष रिपब्लिकन सीनेटरों ने बाइडन-ट्रंप कूटनीति के इस कदम पर गंभीर चिंता जताई है। सीनेटरों ने सीधे तौर पर पाकिस्तान और कतर को घेरते हुए उन पर चरमपंथी समूहों को पनाह देने और ईरान के आतंकी एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।"कतर-पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास" - सीनेटर रिक स्कॉटफ्लोरिडा के प्रभावशाली रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद तीखा पोस्ट साझा करते हुए अमेरिकी प्रशासन को चेतावनी दी।सीनेटर स्कॉट ने लिखा: "अब तक सभी को यह बिल्कुल स्पष्ट हो जाना चाहिए कि हमारे असली दोस्त कौन हैं। कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का एक लंबा और काला इतिहास रहा है। वर्तमान में वे किसी सार्थक शांति को हासिल करने के बजाय, ईरान के दशकों पुराने आतंकी अभियान को बढ़ावा देने में कहीं ज़्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं।"ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की सख्त 'रेड लाइन' को दोहराते हुए स्कॉट ने आगे कहा, "अभी भी एक ऐसे व्यावहारिक समझौते की गुंजाइश है जिससे सभी का फायदा हो। हालांकि, सभी को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि ईरान के परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने की संभावना पूरी तरह ज़ीरो (शून्य) है।""पाकिस्तान ने एक दशक तक बिन लादेन को छिपाया" - सीनेटर टिम शीहीमोंटाना के सीनेटर टिम शीही ने फॉक्स न्यूज़ (Fox News) को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान पर और भी अधिक आक्रामक हमले किए। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया।सीनेटर शीही ने दोटूक शब्दों में कहा: "हमें यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान ने एक दशक तक ओसामा बिन लादेन को अपने यहाँ छिपाकर रखा था। उन्होंने अपनी खुफिया एजेंसी ISI के ज़रिए अयातुल्ला (ईरानी शासन) को फंड दिया है। पाकिस्तानियों ने हमारे ही ख़िलाफ़ विद्रोहों को बढ़ावा दिया, इसलिए यह मान लेना कि वे इस शांति वार्ता में एक 'निष्पक्ष मध्यस्थ' की भूमिका निभाएंगे, पूरी तरह गलत और तर्कहीन है।"शीही ने केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि कतर पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कतर दशकों से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग (वित्तीय हेरफेर) का एक सुरक्षित केंद्र बना हुआ है।कतर-पाकिस्तान के बजाय इजराइल, यूएई और सऊदी अरब पर भरोसा करने की मांगअमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस इस समय स्विट्जरलैंड में हैं, जहाँ वे ईरान के साथ संभावित शांति समझौते के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा के लिए पाकिस्तान और कतर के शीर्ष नेताओं के साथ कूटनीतिक बैठकों में शामिल हुए हैं। इसी कूटनीतिक चयन पर अमेरिकी सीनेटरों को घोर आपत्ति है।सीनेटर टिम शीही ने दलील दी कि अमेरिका को पाकिस्तान और कतर जैसे संदिग्ध देशों को वार्ता की मेज पर बिठाने के बजाय मध्य पूर्व में अपने पारंपरिक और अधिक भरोसेमंद सहयोगियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।उन्होंने सुझाव दिया कि इस वार्ता में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इज़राइल और सऊदी अरब को मुख्य साझीदार बनाया जाना चाहिए। शीही के अनुसार, "मध्य पूर्व में UAE, इज़राइल और सऊदी अरब ही अमेरिका के असली और दीर्घकालिक सहयोगी रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि हम बिना किसी शर्त के UAE और इज़राइल के साथ मज़बूती से खड़े रहें।"अमेरिकी सीनेटरों के ये कड़े तेवर दिखाते हैं कि व्हाइट हाउस भले ही ईरान के साथ डील फाइनल करने के लिए पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता का इस्तेमाल कर रहा हो, लेकिन अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) में पाकिस्तान की विश्वसनीयता और उसके पुराने 'आतंकी इतिहास' को लेकर अविश्वास चरम पर है। 60 दिनों के भीतर होने वाले अंतिम समझौते से पहले यह आंतरिक राजनीतिक विरोध ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi 
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