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    ईरान के लिए पुतिन पूरे यूरोप को एक साथ ठोकने उतर गए, अब होगा बड़ा खेल

    3 hours from now

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    ईरान, इजराइल, अमेरिका का जो जंग है वह मिडिल ईस्ट तक पहुंचा हुआ है और इसकी वजह से तेल, एनर्जी, गैस इन सब पर संकट मंडरा रहा है। तेल महंगा हो गया। एनर्जी महंगा हो रहा है और इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि वो कुछ सेंशंस में जो है कटौती कर रहे हैं ताकि इनके क्रूड ऑयल्स को जो है उसके दाम को कंट्रोल में लाया जा सके क्योंकि क्रूड प्राइसेस में आग लगे हुए हैं। अब एक तरफ क्रूड के प्राइस में आग लगा हुआ है। एनर्जी सिक्योरिटी जो है वह खतरे में है क्योंकि ईरान लगातार इन लाखों को टारगेट कर रहा है और कह रहा है कि अब और इंटेंसिफाई कर देंगे स्टेट ऑफ हार्मोस को 100% कंट्रोल कर लेंगे जीरो कर देंगे। वहां से सप्लाई चेन और तेल की कीमतों में आग लगा देंगे। एनर्जी की कीमतों में आग लगा देंगे। पुतिन ने अपने देश के लोगों को अपने अधिकारियों को ऑर्डर दिया है कि यह जो यूरोप को गैस जा रहा है हां रोक दो कोई बेहतर सप्लायर इससे मिले हमारे जो फ्रेंडली नेशन है उनको जो भी जरूरत हो उसके इधर और कोई अच्छा हमारा सहयोगी ग्राहक मिले तो उसको दे दो यह और यूरोप को मत दो। पुतिन का कहना है कि वह साल 2027 में जीरो कर देगा सप्लाई और ऐसे में वो हमारे मुंह पर दरवाजा मारे उससे पहले ही हम उनको किक आउट कर देते हैं।इसे भी पढ़ें: यूक्रेन तो अमेरिका-इजरायल से भी बड़ा खिलाड़ी निकला, ईरान की मार से कतर, यूएई और सऊदी अरब को बचाने भेजे अपने मिलिट्री एक्सपर्ट्सपुतिन की ये प्लानिंग वो भी जंग के वक्त में यूरोप की हालत खराब कर सकती है। साल 2024-25 का साल 2026 का डेटा बताता है कि किस तरह से यूरोपीय यूनियंस की जो है अभी भी निर्भरता रूस पर है। सेंशंस लगा रहा है। चरणबद्ध कटौती कर रहा है। साल 2027 में एनर्जी सप्लाई को जीरो कर देगा। लेकिन उसके बावजूद भी अभी अगर यह कुछ करते हैं पुतिन तो हाहाकार मच जाएगा। और उसके पीछे का जो कारण है, वो गणित है।  यूरोपीय देश हैं साल 2025 में यूरोपीय संघ ने कुल गैस आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 13% रही साल 2021 में ये 45% था यानी कि मतलब सबसे बड़ा स्टेक होल्डर था रशिया एक टाइम पे उसके बाद अब ये 13% पर आ गया है। इसे भी पढ़ें: ईरान के ड्रोन की वजह से टूटी पाकिस्तानियों की टांगे, हिल जाएगा भारत !अनुमानित रूप से यूरोप ने रूस से लगभग 40.9 अरब क्यूबिक मीटर जो गैस प्राप्त की एलएनजी पाइपलाइन बनाम एलएनजी का जो मामला है पाइपलाइन गैस की हिस्सेदारी गिरकर सिर्फ 6% रह गई है। जबकि एलएनजी तरल गैस का आयात बढ़ गया है। फ्रांस हगरी, नीदरलैंड, स्लोवाकिया इसके मुख्य खरीदार रहे हैं। अकेले जून 2025 में ईयू ने रूसी गैस पर 1.2 अरब यूरो खर्च किए। यूरोपीय संघ ने 2027 तक रूसी गैस पर जो है अपनी निर्भरता को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा हुआ है। लेकिन आंकड़े देखिए 2026 की बात करते हैं। 25 का तो आंकड़ा बताया हमने। जनवरी में रूसी पाइपलाइन गैस की आपूर्ति में 10% की वृद्धि हो गई। जिसका मुख्य कारण जो बताया जा रहा है वह तुर्क स्ट्रीम है। पाइप लाइन से बढ़ता प्रवाह है। वहीं जनवरी 2026 में यूरोप ने रूस से 2.27 अरब क्यूबिक मीटर एलएजी खरीदा जो बीते साल के इसी महीने से अधिक बताया जाता है। इसे भी पढ़ें: Trump शुरू करने वाले थे 'ऑपरेशन प्योंगयांग', किम ने निकाल दिया 5000 टन का युद्धपोत, अमेरिका के छूटे पसीनेफरवरी में भी रूस के यामल प्रोजेक्ट से निकलने वाली 100% एलएनजी शिपमेंट यूरोप पहुंची। यूरोपीय संघ जो है वह 18 मार्च 2026 से एलएजी और पाइपलाइन गैस पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाने पर कानून अपना रहा है। ऐसे में जो यूरोप है वो यह प्लानिंग कर रहा है कि अब वो शिफ्ट करें अपने फोकस को और दूसरी तरफ रूस कह रहा है कि यह हमको एग्जिट कराए। इससे बेहतर है कि हम ही इनको नमस्ते कर देते हैं, टाटा कर देते हैं।  
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