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    IIT-NIT के छात्रों को 'गीता' सिखाएगा इस्कॉन:कानपुर में जुटा देश भर के 160 भक्तों का दल; सुसाइड और डिप्रेशन रोकने पर मंथन

    3 hours ago

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    देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT और NIT में बढ़ते सुसाइड और डिप्रेशन के मामलों को रोकने के लिए अब आध्यात्मिक रास्ते का सहारा लिया जाएगा। कानपुर के श्री श्री राधा माधव मंदिर (इस्कॉन) में आयोजित चार दिवसीय 'इस्कॉन इंडिया यूथ काउंसिल' (IIYC) के वार्षिक सम्मेलन में यह बड़ा संकल्प लिया गया। 17 से 20 मार्च तक चले इस मंथन में देश के कोने-कोने से आए 160 प्रचारकों और भक्तों ने हिस्सा लिया। कैंपस में बढ़ते तनाव को कम करेगी आध्यात्म की शक्ति सम्मेलन में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई कि देश के बड़े शैक्षणिक संस्थानों में छात्र मानसिक तनाव और अवसाद का शिकार हो रहे हैं। इस्कॉन का मानना है कि श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाएं युवाओं को जीवन का सही उद्देश्य समझने और कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक रहने की प्रेरणा देती हैं। चर्चा हुई कि कैसे IIT मंडी और IIT रोपड़ की तरह अन्य बड़े संस्थानों में भी 'क्रेडिट कोर्स' के जरिए आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा पहुंचाई जाए। व्यसन मुक्त और अनुशासित युवा पीढ़ी का लक्ष्य इस्कॉन इंडिया यूथ काउंसिल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे (व्यसन) से दूर कर एक मूल्यनिष्ठ जीवन की ओर मोड़ना है। वरिष्ठ भक्तों ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी को केवल डिग्री की नहीं, बल्कि अनुशासन और चरित्र निर्माण की भी जरूरत है। इसके लिए देशभर के शीर्ष विश्वविद्यालयों के साथ MoU (करार) किए जा रहे हैं, ताकि 'इंडियन नॉलेज सिस्टम' (IKS) के तहत पाठ्यक्रमों में बदलाव लाया जा सके। विश्व शांति के लिए निकाला 'पीस मार्च' दुनिया भर में चल रहे युद्ध और संकट के बीच, सम्मेलन के दौरान एक विशेष "वर्ल्ड पीस मार्च" निकाला गया। इसमें सभी 160 प्रतिभागियों ने हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन करते हुए विश्व शांति के लिए प्रार्थना की। भक्तों का मानना है कि जब तक व्यक्ति के भीतर शांति नहीं होगी, तब तक बाहर शांति संभव नहीं है। गीता के सिद्धांत न केवल व्यक्तिगत बल्कि वैश्विक शांति का भी आधार हैं। भक्तों ने दी लीडरशिप ट्रेनिंग इस चार दिवसीय कार्यक्रम में इस्कॉन के वरिष्ठ प्रचारक देवकीनंदन प्रभु, प्रेम हरिनाम प्रभु, सुंदर गोपाल प्रभु और IIYC के अध्यक्ष बलदेव प्रभु सहित कई अनुभवी भक्त मौजूद रहे। सम्मेलन में युवाओं को आध्यात्मिक दृष्टि से सशक्त बनाने के लिए लीडरशिप ट्रेनिंग और कीर्तन सत्र आयोजित किए गए। वक्ताओं ने जोर दिया कि यदि युवा पीढ़ी गीता के सिद्धांतों को अपनाती है, तो वे जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
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