Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    इलाहाबाद High Court ने UP Police को लगाई फटकार, अवैध हिरासत पर 20 हजार का जुर्माना

    1 hour from now

    1

    0

    प्रयागराज, आठ नवंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में नागरिक स्वतंत्रता की स्थिति को शर्मनाक करार देते हुए कहा कि पुलिस को नागरिकों के अधिकारों की बहुत कम परवाह है। अदालत ने लोगों को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने और ऐसे मामलों में सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने की बार-बार सामने आ रही घटनाओं पर राज्य पुलिस की कड़ी आलोचना की। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि बिजनौर निवासी औसाद अहमद को तत्काल रिहा किया जाए, बशर्ते कि वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो।अदालत ने राज्य सरकार को उसे सात दिनों के भीतर 20,000 रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस को नागरिकों के मौलिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता की बहुत कम परवाह है। उसने टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए इन अधिकारों का उल्लंघन आम बात हो गई है।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित गैरकानूनी हिरासत के मामलों में पुलिस सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने का बहाना नहीं बना सकती। औसाद अहमद ने याचिका में दावा किया था कि बिजनौर पुलिस ने उसे पांच सितंबर, 2026 को हिरासत में लिया था, जबकि उसकी औपचारिक गिरफ्तारी सात सितंबर को दिखाई गई। इन आरोपों की जांच के लिए अदालत ने पहले राज्य सरकार को संबंधित थाने की पांच से सात सितंबर तक की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग पेश करने का निर्देश दिया था।हालांकि, तीन नवंबर को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उक्त अवधि की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पांच सितंबर को आए आंधी-तूफान के कारण सीसीटीवी की केबल क्षतिग्रस्त हो गई थी और कैमरों में खराबी आ गई थी। इस पर अदालत ने कहा, ‘‘एक के बाद एक मामले में जब भी सीसीटीवी फुटेज मांगा जाता है तो ज्यादातर मामलों में किसी न किसी कारण से उसके उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है।’’ तीन नवंबर के अपने फैसले में अदालत ने नांगल थाने की थाना प्रभारी (एसएचओ) अनू कुमारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि एसएचओ ने जानबूझकर सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराया।एसएचओ के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि इस संबंध में की गई टिप्पणी उनके सेवा रिकॉर्ड में दर्ज की जाए। साथ ही, राज्य सरकार को उनकी मौजूदा तैनाती जारी रखने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Delhi Police ने दिवाली पर बढ़ाई सुरक्षा, 15 जिलों में High Alert
    Next Article
    Lal Krishna Advani ने Rath Yatra से Bharat Ratna तक तय किया BJP का ऐतिहासिक सफर

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment