Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    इमाम हुसैन का चेहलुम आज, गूंजेगी सदाएं या हुसैन:अलम-ताजिये की जियारत को उमड़ेंगे जायरीन, कर्बला में शहीद हुए थे 72 लोग

    19 hours ago

    1

    0

    यूपी में आज हजरत पैगंबर साहब के नवासे इमाम हुसैन का चेहलुम मनाया जा रहा है। लखनऊ, जौनपुर, वाराणसी, कानपुर, सुल्तानपुर, मेरठ, अमरोहा, सिरसी, मुरादाबाद, अयोध्या, गोरखपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में शिया संप्रदाय के लोग इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला में खुदा की राह में पेश की गई कुर्बानी को याद कर रहे हैं। जगह-जगह अलम, ताबूत, ताजिया और दुलदुल का जुलूस निकाला जाएगा। जिसकी जियारत को जायरीन उमड़ेंगे। वाराणसी के अर्दली बाजार से अमारी का जुलूस निकाला जाएगा। बता दें की सन 61 हिजरी में इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों को ईराक के कर्बला में तीन दिन का भूखा और प्यासा 10 मुहर्रम को शहीद कर दिया गया था। शहादत के बाद कैद कर लिए गए थे घर वाले मौलाना कैसर हुसैन नजफी ने इमाम हुसैन के चेहलुम पर प्रकाश डालते हुए बताया - सन 61 हिजरी में ईराक के उस वक्त के दुर्दांत और दुनिया के पहले आतंकी यजीद ने इमाम हुसैन और उनके घर वालों को जिनमे छोटे-छोटे बच्चे थे। उन्हें एक लाख की फ़ौज द्वारा घेरकर कर्बला के मैदान में 2 मोहर्रम को रोक लिया। इसके बाद 7 मुहर्रम से उनपर पानी बंद कर दिया और उनके खेमे (टेंट) नहर ए फरात से हटवा दिए। इस पर बच्चे प्यास से तड़प उठे पर उन्होंने 10 मोहर्रम को जंग की और इसमें इमाम हुसैन के साथ उनके 71 साथी तीन दिन के भूखे और प्यासे शहीद कर दिए गए। जिसमें एक 6 महीने का बच्चा अली असगर भी था। इसके बाद उनके घर की औरतों और बच्चों को फौज ने कैद कर लिया। शाम (सीरिया) में किया कैद मौलाना ने बताया - इसके बाद सभी औरतों, बच्चों और इमाम हुसैन के बीमार बेटे इमाम सज्जाद को को 11 मुहर्रम की सुबह यजीदी लश्कर ने कैदी बनाया और पहले नजफ़ शहर के पास कूफ़ा ले गए। जो वहां से 90 किलोमीटर दूर है। इसके बाद वहां से शाम (सीरिया) ले गए। इस दौरान इमाम हुसैन और उनेक 71 साथियों की लाशें ऐसे ही कर्बला के मैदान में पड़ी रहीं और सबका सिर धड़ से काटकर फौज अपने साथ ले गई थी। कैद में उनके ऊपर जुल्म किए गए। इसी दौरान इमाम हुसैन के चार साल की बच्ची भी कैदखाने में शहीद हो गई। मौलाना कैसर हुसैन नजफी ने बताया - सभी को कैदखाने से 20 सफर 61 हिजरी को रिहाई मिली। जिसके बाद इमाम हुसैन की बहन जैनब और उनके घर की औरतें और पुरुष। वहां से सीधे कर्बला पहुंची और सभी के सिरों के साथ उनके धड़ को दफन किया। तभी से इमाम हुसैन का चेहलुम मनाया जाता है। क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम में 40 दिन का समय लगा। ऐसे में ठीक 40 दिन बाद इमाम हुसैन का चेहलुम मनाया जाता है। वाराणसी में वक्फ इमामबाड़े से निकलेगा जुलूस वाराणसी में आज वक्फ इमामबाड़ा व मस्जिद मीर इमाम अली व मेहंदी बेगम से 100 साल पुराना ताजिये का जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस दालमंडी से होता हुआ। नई सड़क, कालीमहाल, पितृकुण्डा, लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान में समाप्त होगा। वहीं कालीमहल मस्जिद, शिवाला, गौरीगंज, अर्दली बाजार, दोषीपुरा, चौहट्टा लाल खां, मुकीमगंज से भी जुलूस उठाया जाएगा। इसमें से कुछ जुलूस गंगा घाट, कुछ जुलूस फातमान और कुछ सदर इमामबाड़े लाट सरेया पर समाप्त होंगे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    आगरा में एक्ट्रेस कंगना रनोट मामले में सुनवाई आज:आज कोर्ट सुना सकती है फैसला, किसान आंदोलन के लिए कहा था- वहां रेप-मर्डर हुए
    Next Article
    छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग, नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन:समाजवादी छात्र सभा ने बंद पड़े छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू कराने की उठाई मांग, सदन में मुद्दा उठाने की अपील

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment