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    इधर ट्रंप अड़े उधर ईरान, फिर होगा घमासान! Trump की धमकी के जवाब में Iran की घु़ड़की, फिर मँडराया युद्ध का खतरा

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    अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, इजराइल की सैन्य गतिविधियां और होरमुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर बढ़ती खींचतान ने हालात को और जटिल बना दिया है। ताजा घटनाक्रम संकेत देता है कि कूटनीतिक प्रयास फिलहाल ठहराव की स्थिति में हैं और संघर्ष का खतरा लगातार बढ़ रहा है। हम आपको बता दें कि ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच हुआ संघर्षविराम खत्म होने को है और शांति वार्ता को लेकर संशय के बादल छंट नहीं रहे हैं।ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य मोहम्मद रजा मोहसेनी सानी ने कहा कि अमेरिका की अत्यधिक मांगें और उसके आंतरिक राजनीतिक उद्देश्यों के कारण बातचीत का कोई आधार नहीं बचा है। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया घटनाओं और पिछले अनुभवों को देखते हुए निकट भविष्य में वार्ता का कोई दौर नहीं होगा। हालांकि कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत मिला है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में संभावित युद्धविराम वार्ता हो सकती है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार अभी तक कोई प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के लिए रवाना नहीं हुआ है, जिससे स्पष्ट होता है कि अंदरूनी स्तर पर भी सहमति नहीं बन पाई है। वहीं अमेरिका से इस प्रकार की भी खबरें थीं कि अगर शांति वार्ता आगे बढ़ती है और समझौते की स्थिति बनती है तो खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस पर अंतिम मुहर लगाने के लिए इस्लामाबाद जा सकते हैं या शांति वार्ता में ऑनलाइन जुड़ सकते हैं। लेकिन ट्रंप जिस तरह कभी ईरान पर बम बरसाने और कभी शांति वार्ता की बात कर रहे हैं उससे पूरी स्थिति को लेकर संशय बना हुआ है।इसे भी पढ़ें: Pakistan की मेहनत पर फिरा पानी, Trump के एक Tweet ने US-Iran समझौते पर लगाया ब्रेक!इसी बीच, ईरान की सैन्य चेतावनी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। खतम अल अंबिया मुख्यालय के कमांडर अली अब्दुल्लाही ने कहा है कि यदि किसी भी प्रकार की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई दोबारा होती है तो ईरान तुरंत और निर्णायक जवाब देगा। उन्होंने दावा किया कि सैन्य दृष्टि से ईरान की स्थिति मजबूत है और होरमुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण उसे रणनीतिक बढ़त देता है। देखा जाये तो होरमुज जलडमरूमध्य इस पूरे संकट का केंद्र बन गया है। ईरान ने इसे एक रणनीतिक हथियार के रूप में देखना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हाल के दिनों में ईरान ने इसे कुछ समय के लिए खोला, लेकिन फिर शत्रुतापूर्ण देशों के लिए बंद कर दिया। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।उधर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि जलडमरूमध्य में प्रतिबंधों और सैन्य गतिविधियों से न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है बल्कि खाद और ऊर्जा जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हो रही है।दूसरी ओर, इस संकट का मानवीय पहलू भी बेहद चिंताजनक है। अब तक ईरान, लेबनान, इजराइल और खाड़ी देशों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है। गाजा और दक्षिणी लेबनान में लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई से आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेबनान की रिपोर्टों के अनुसार इजराइली सेना ने कई गांवों में तोपखाना चलाया और घरों को ध्वस्त किया, जिससे व्यापक तबाही हुई है। इसके साथ ही इजराइल ने अपने सैन्य अभियान को जारी रखने का संकेत दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है और देश अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठाएगा। इसके साथ ही इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में एक नई अग्रिम रक्षा रेखा स्थापित की है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।उधर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संकट के प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। यूरोप में ईंधन संकट की आशंका जताई जा रही है और वहां के परिवहन मंत्री इस मुद्दे पर आपात बैठक कर रहे हैं। खाद की आपूर्ति बाधित होने से कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है। वहीं चीन ने इस स्थिति को संक्रमण के महत्वपूर्ण चरण के रूप में बताया है और मध्यस्थता की कोशिशें तेज कर दी हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को निकालने की योजना बना रहा है, लेकिन इसके लिए तनाव कम होना जरूरी है।हम आपको यह भी बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध में एक और नया मोड़ तब आया जब एक ईरानी तेल टैंकर ने कथित अमेरिकी धमकियों के बावजूद अपने क्षेत्रीय जल में प्रवेश किया। ईरान ने इसे अपनी नौसेना की सफलता बताया है, जबकि अमेरिका की ओर से इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले चुका है। ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार, और कूटनीतिक संतुलन सभी इस तनाव से प्रभावित हो रहे हैं।विश्लेषकों का मानना है कि भले ही सीमित स्तर पर युद्धविराम हो जाए, लेकिन मूल समस्याओं का समाधान अभी दूर है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
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