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    जो लोग 'चुप्पी' पर सवाल उठा रहे थे, उन्हें भारत ने अपने अंदाज में सख्त जवाब दे दिया है

    3 hours from now

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    ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार यह सवाल उठ रहे थे कि भारत की प्रतिक्रिया क्यों सामने नहीं आयी है? कई दिनों तक चली इस चर्चा के बीच भारत ने अपने अंदाज में इस सवाल का जवाब दे दिया है। हम आपको बता दें कि भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी आज नयी दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास पहुंचे और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर कर खामेनेई की मौत पर भारत सरकार की ओर से संवेदना व्यक्त की। इस कदम को भारत की औपचारिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। हम आपको बता दें कि खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान सरकार ने अपने सर्वोच्च नेता की कथित शहादत के सम्मान में चालीस दिन के सार्वजनिक शोक और सात दिन के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। देश भर में धार्मिक सभाएं और स्मरण कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में नयी दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखा गया था जिसमें विदेश सचिव विक्रम मिसरी पहुँचे थे।इसे भी पढ़ें: Iran के प्रभावशाली धार्मिक नेता Ayatollah Abdollah Javadi Amoli ने Trump के खिलाफ उगली आग, बढ़ते संघर्ष के बीच Modi ने दिया बड़ा बयानउधर पश्चिम एशिया के कई शहरों में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती दिखाई दे रही है। गुरुवार को दोहा और मनामा में कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गयीं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि विस्फोट शहरों के केंद्रीय क्षेत्रों के करीब होते हुए महसूस किये गये। कुछ लोगों ने आकाश में गतिविधियां देखे जाने की भी सूचना दी, खासकर उन इलाकों के आसपास जहां पहले अमेरिका के दूतावास को खाली कराया गया था।संयुक्त अरब अमीरात ने भी हमलों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। देश के रक्षा मंत्रालय के अनुसार वायु रक्षा प्रणाली ने तीन बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। इसके अलावा कुल 129 ड्रोन का पता लगाया गया जिनमें से 121 को हवा में ही नष्ट कर दिया गया जबकि आठ देश की सीमा के भीतर गिर गये। मंत्रालय ने बताया कि ईरान की आक्रामक गतिविधियों की शुरुआत से अब तक संयुक्त अरब अमीरात की ओर कुल 189 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गयीं, जिनमें से 175 को नष्ट कर दिया गया, 13 समुद्र में गिरीं और एक मिसाइल देश की सीमा के भीतर आ गिरी।रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब तक कुल 941 ड्रोन का पता लगाया गया जिनमें से 876 को रोक दिया गया जबकि 65 देश के भीतर गिरे। इसके अतिरिक्त 8 क्रूज मिसाइलों का भी पता लगाकर उन्हें नष्ट कर दिया गया। इन हमलों के कारण कुछ स्थानों पर सीमित नुकसान हुआ और तीन लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। मृतकों में पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 78 लोगों के घायल होने की सूचना है जिनमें अमीरात, मिस्र, सूडान, इथियोपिया, फिलिपीन, पाकिस्तान, ईरान, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, अजरबैजान, यमन, युगांडा, इरिट्रिया, लेबनान और अफगानिस्तान के नागरिक शामिल हैं।अबू धाबी में एक और घटना सामने आयी जब वायु रक्षा प्रणाली द्वारा रोके गये ड्रोन के मलबे गिरने से छह लोग घायल हो गये। यह मलबा अबू धाबी औद्योगिक नगर क्षेत्र के दो स्थानों पर गिरा। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन को सफलतापूर्वक रोक दिया गया था, लेकिन उसके टुकड़े गिरने से आसपास के क्षेत्रों में चोट लगने की घटनाएं हुईं।क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए कतर ने भी सावधानी के कदम उठाये हैं। कतर के गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि अमेरिका के दूतावास के आसपास रहने वाले लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि यह केवल एहतियाती कदम है और प्रभावित लोगों के लिए उपयुक्त आवास की व्यवस्था की जा रही है।उधर, इस संकट का असर हवाई यातायात पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अबू धाबी की विमान सेवा इतिहाद ने घोषणा की है कि सुरक्षा कारणों से अबू धाबी से आने जाने वाली सभी निर्धारित वाणिज्यिक उड़ानें छह मार्च की सुबह तक स्थगित रहेंगी। इससे हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं।वहीं, कूटनीतिक स्तर पर भी आपात स्थिति जैसी परिस्थितियां बन गयी हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 13 देशों में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को तुरंत वहां से निकलने का निर्देश दिया है। इन देशों में संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और बहरीन भी शामिल हैं।उधर, संकट के कारण बड़ी संख्या में यात्री विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। एक मार्च से अब तक 17 हजार से अधिक यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। संयुक्त अरब अमीरात सरकार फंसे हुए लोगों के रहने और भोजन का खर्च भी वहन कर रही है।इस बीच, व्यापारिक गतिविधियों पर भी इस संघर्ष का असर पड़ने लगा है। भारत के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पर पांच हजार से अधिक निर्यात कंटेनर अटके हुए हैं जिनमें लगभग एक हजार रेफ्रिजरेटेड कंटेनर खराब होने वाली वस्तुओं से भरे हैं। आपूर्ति शृंखला पर पड़ रहे इस प्रभाव से वैश्विक व्यापार में भी चिंता बढ़ गयी है।इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात ने अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए विशेष कदम उठाये हैं। इतिहाद रेल ने अबू धाबी में यात्री रेल सेवाएं शुरू कर दी हैं ताकि सऊदी अरब में फंसे अमीराती नागरिकों को वापस लाया जा सके। यह सेवा सामान्य रूप से वर्ष के अंत में शुरू होने वाली थी, लेकिन वर्तमान संकट को देखते हुए इसे पहले ही शुरू कर दिया गया। विशेष यात्री रेल सेवाएं अल धफरा क्षेत्र के घुवैफात स्टेशन से अबू धाबी नगर के अल फया स्टेशन तक चलाई जा रही हैं। अब तक तीन विशेष रेल सेवाएं संचालित की जा चुकी हैं जिनके माध्यम से कई नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया गया है। उधर, दुबई से भारत लौटे लोगों ने बताया है कि हालात बेहतर मगर चिंताजनक हैं।बहरहाल, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक कूटनीति, व्यापार और परिवहन व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं।
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