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    जंग के बीच ईरान में फंसा उत्तराखंड का परिवार:पिता बोले- 2 दिन से बेटे का फोन बंद, सरकार कैसे भी हमारे बच्चों को वापस लाए

    3 hours ago

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    अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान में जारी युद्ध ने हजारों किलोमीटर दूर उत्तराखंड के विकासनगर में एक घर की धड़कनें रोक दी हैं। मिसाइलों और फाइटर जेट की गूंज के बीच ईरान के कुम शहर में रह रहे अली हैदर (23) और उनकी पत्नी नूरजहां (21) से पिछले दो दिनों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। फोन की घंटी न बजना अब इस परिवार के लिए सबसे बड़ा डर बन चुका है। दैनिक भास्कर एप की टीम जब ग्राम पंचायत अंबाडी, विकासनगर स्थित उनके घर पहुंची तो वहां बेचैनी, इंतजार और दुआओं का माहौल था। तेहरान से 150 KM दूर कुम में रहते हैं अली-नूरजहां अली हैदर 2022 से ईरान के एक इस्लामिक विश्वविद्यालय में फारसी और उर्दू की पढ़ाई कर रहे हैं। सितंबर में उनका निकाह कारगिल की रहने वाली नूरजहां से हुआ था और शादी के बाद पत्नी भी उनके साथ ईरान चली गईं। परिवार के मुताबिक, वे तेहरान से करीब 150 किलोमीटर दूर कुम शहर में रह रहे हैं। आसमान में फाइटर जेट और मिसाइलों की आवाज अली के पिता शेर अली खान (57), जो पेशे से स्कूल बस ड्राइवर हैं, अभी भी ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन चेहरे पर साफ चिंता झलकती है। वे बताते हैं कि 1 मार्च को बड़े बेटे के फोन पर अली से करीब पांच मिनट की अंतरराष्ट्रीय कॉल पर बात हुई थी। उसने कहा कि हालात बहुत खराब हैं। आसमान में फाइटर जेट और मिसाइलों की आवाज साफ सुनाई दे रही है। उसके बाद से कोई कॉल नहीं आया। दो दिन से फोन बंद है। हर बार मोबाइल की स्क्रीन जलती है तो उम्मीद जगती है, लेकिन कॉल नहीं आता। मां रुखसाना की आंखों में डर, दिल में दुआ अली की मां रुखसाना (48) ने कहा कि जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से दिल घबराया हुआ है। दो दिन से बेटे से कोई संपर्क नहीं है। बस यही सोचते हैं कि वहां कैसे होंगे। वे बताती हैं कि बेटे का निकाह सितंबर में हुआ था। जून में भी एक बार एडवाइजरी जारी होने पर वह अचानक भारत आया था, लेकिन इस बार हालात बिगड़ने से पहले वह नहीं आ सका। हमें क्या पता था कि जंग छिड़ जाएगी… सब सामान्य था, मां की आवाज कांप जाती है। एलआईयू ने मांगे दस्तावेज अली 3 भाइयों में सबसे छोटा है और उससे छोटी एक बहन भी है। सबसे बड़े भाई शेखर अली, जो विकासनगर में लॉजिस्टिक का काम करते हैं, बताते हैं कि 1 मार्च को रात 11:30 बजे आखिरी बार भाई से बात हुई थी। बड़े भाई शेखर अली कहते हैं कि उसके बाद से कोई संपर्क नहीं है। 2 मार्च को विकासनगर एलआईयू ने हमसे संपर्क किया और पासपोर्ट नंबर, ईरान में पता जैसी जानकारी मांगी है। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासनिक स्तर पर कोई मदद मिल सकेगी। मोदी सरकार हमारे बच्चों को सुरक्षित लाए-पिता की गुहार बेबस पिता शेर अली खान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाते हैं कि बस किसी तरह हमारे बच्चों को सही-सलामत भारत ले आइए। हम और कुछ नहीं चाहते। उनकी यह अपील सिर्फ उनके घर तक सीमित नहीं है। ईरान के अलग-अलग शहरों में रह रहे भारतीय छात्रों और कामगारों के परिवारों की चिंता भी कुछ ऐसी ही है। हर घर में एक ही सवाल है क्या वे सुरक्षित हैं। हर बीतता मिनट भारी घर के आंगन में खामोशी पसरी है। मोबाइल फोन चार्ज पर लगा है, नेटवर्क बार-बार चेक हो रहा है। भाभी यास्मीन बताती हैं कि अली सितंबर में भारत आया था। हमें अंदेशा भी नहीं था कि हालात इतने बिगड़ जाएंगे। अब बस एक कॉल का इंतजार है। जंग की खबरें लगातार सोशल मीडिया पर चल रही हैं, लेकिन इस घर में सबसे बड़ी खबर वही होगी। जब फोन बजेगा और उधर से अली की आवाज आएगी कि 'अब्बू, हम ठीक हैं।'
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