Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    जौनपुर में श्रीमद्भागवत कथा से पहले शोभायात्रा:सैकड़ों वाहनों के साथ श्रद्धालुओं ने किया नगर भ्रमण

    1 hour ago

    2

    0

    जौनपुर में मंगलवार को सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा प्रवचन कार्यक्रम से पहले एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। नैमिषारण्य सीतापुर के सनातन उत्थान फाउंडेशन के संस्थापक शिवानंद भाई श्री महाराज के नेतृत्व में सैकड़ों वाहनों के साथ श्रद्धालुओं ने नगर का भ्रमण किया। शोभायात्रा बीआरपी मैदान से प्रारंभ होकर लाइन बाजार, बाजिदपुर तिराहे, पॉलिटेक्निक चौराहे, ओलंदगंज, चहारसू चौराहे और कोतवाली मार्ग से होते हुए पुनः बीआरपी मैदान पर समाप्त हुई। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा प्रवचन कार्यक्रम का शुभारंभ बुधवार से होगा। यह कथा प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक चलेगी। कथा से पूर्व, प्रतिदिन सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक श्री कृष्णा नाम महामंत्र यज्ञ का भी आयोजन किया गया है। इस अवसर पर शिवानंद भाई श्री महाराज ने सत्संग को मानव के चरित्र निर्माण की पाठशाला बताया। उन्होंने कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से कर्म के फल की अवधारणा को स्पष्ट किया। महाराज ने कहा कि मनुष्य निरंतर कर्म करता रहता है, और उसे जाने-अनजाने में किए गए कर्मों का फल अवश्य भुगतना पड़ता है। उन्होंने 'अवश्यमेव भोक्तव्यम' शास्त्रोक्ति का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है। हालांकि, धर्माचरण करने वाले व्यक्ति प्रारब्ध के कारण पूर्व जन्मों के बुरे कर्मों के फलों का भोग भी कर लेते हैं, जिसका उन्हें आभास नहीं होता। महाराज ने यह भी कहा कि धर्म के बिना जीवन में आनंद की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने सुख और आनंद के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि भौतिक संसाधनों से क्षणिक सुख तो मिल सकता है, लेकिन वास्तविक आनंद केवल भगवत कृपा से ही प्राप्त होता है। उन्होंने आगे कहा कि धर्मशील व्यक्तियों के जीवन में आनंद स्वतः ही आ जाता है, ठीक वैसे ही जैसे नदियों का जल बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के अपने उद्गम स्थल समुद्र तक पहुँच जाता है। उन्होंने बताया कि आत्मा परमात्मा का ही अंश है और परमात्मा ही आत्मा का उद्गम स्थल है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    आपके अकाउंट में आतंकवादी ने पैसे भेजे हैं:फर्जी ATS अधिकारी ने डिजिटल अरेस्ट किया, गोरखपुर के बुजुर्ग से 5.50 लाख RTGS कराए
    Next Article
    कानपुर में सिपाही ने कारोबारी को दी धमकी:1600 करोड़ के लेनदेन ‘सेटल’ करने की बात, ऑडियो आया सामने

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment