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    ‘जनसंख्या पर सियासत नहीं, मंथन हो’:मोहन भागवत के 3 बच्चों वाले बयान पर शहाबुद्दीन बोले- महंगाई में बच्चों की परवरिश मुश्किल

    9 hours ago

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    ऑल इंडिया मुस्लिम जमात अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने देश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या को गंभीर समस्या बताया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सभी समाजों को मिलकर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार बढ़ती आबादी का दबाव संसाधनों पर साफ दिखाई दे रहा है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है। मौलाना ने मोहन भागवत के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें हिंदुओं से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील की गई थी। उन्होंने कहा कि घटती जनसंख्या की चिंता जताने के बजाय देश की वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी है। बढ़ती आबादी आज देश की बड़ी चुनौती बन चुकी है। महंगाई में बच्चों की परवरिश का संकट मौलाना ने कहा कि मौजूदा दौर में महंगाई चरम पर है। ऐसे में बच्चों की बेहतर शिक्षा, अच्छी परवरिश और निकाह के भारी-भरकम खर्च उठाना आम परिवार के लिए मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि अधिक बच्चे पैदा करना अब व्यावहारिक नहीं रह गया, क्योंकि उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी करना ही बड़ा संघर्ष बन चुका है। ‘मुसलमानों को निशाना बनाना बंद हो’ उन्होंने जनसंख्या वृद्धि के लिए किसी खास समुदाय को जिम्मेदार ठहराने की मानसिकता की आलोचना की। मौलाना ने कहा कि आबादी के नाम पर अक्सर मुसलमानों को निशाना बनाया जाता है, जो सही नहीं है। उनका कहना था कि चार-चार निकाह और दर्जनों बच्चों की बातें अब पुराने दौर की हैं और आज के समय में ऐसे उदाहरण न के बराबर हैं। अब पढ़िए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने क्या कहा? मौलाना ने कहा- भारत की आबादी तेजी से बढ़ी है और दुनिया में जनसंख्या के लिहाज से दूसरे नंबर पर है। जब किसी देश या परिवार में जनसंख्या ज्यादा होती है तो आर्थिक तंगी आ जाती है। जहां तक RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की बात है, वह अक्सर कहते हैं कि हिंदू तीन बच्चे पैदा करें। वहीं साध्वी प्राची जैसे लोग भी बड़े-बड़े दावे करते हैं। इन बातों का आज के दौर में कोई औचित्य नहीं है। आज महंगाई इतनी है कि खुद मुसलमान भी दो से ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करना चाहता। बच्चे की पढ़ाई-लिखाई, तालीम-तरबियत, निकाह और रोजगार सब कुछ महंगा हो चुका है। एक बच्चे को अच्छे स्कूल में पढ़ाना भी चुनौती बन गया है। सिर्फ मुसलमानों पर 12-12 बच्चे और चार-चार बीवियों का आरोप लगाया जाता है। मैं दावे के साथ कहता हूं कि पूरे भारत में ऐसा उदाहरण दिखाना मुश्किल है। यह केवल मुसलमानों को टारगेट करने की मानसिकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे अल्लाह की रहमत हैं और किसी को भी अपने हालात के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार है, लेकिन देशहित में जनसंख्या पर संतुलित सोच जरूरी है।
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