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    जिसे फर्जी IAS बताया, उसकी परिवार ने खोली सच्चाई:बोले- 2008 बैच के IAS है राहुल, बर्खास्तगी के खिलाफ CAT में लड़ रहे लड़ाई

    3 hours ago

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    जिस राहुल कौशिक को पुलिस ने फर्जी IAS अफसर बताकर मीडिया के सामने पेश किया, वह इंडियन पोस्टल सर्विस का निलंबित अफसर निकला। परिवार की मानें तो राहुल ने वर्ष-2008 में UPSC क्रैक किया था, जिसमें उन्होंने 728वीं रैंक हासिल की थी। राहुल अपनी बहाली का केस लड़ रहे हैं जो दिल्ली CAT में विचाराधीन है। तीन तस्वीरें देखें… सबसे पहले एक नजर पुलिस के खुलासे पर एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह और सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने गुरुवार को पुलिस लाइन में संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता कर खुलासा किया कि फूलबाग कालोनी निवासी राहुल कौशिक पुत्र स्व. रोहताश कुमार शर्मा खुद को IAS बताकर ना केवल आस पड़ौस के लोगों बल्कि पुलिस व प्रशासनिक अफसरों पर भी रौब गालिब करता था। पुलिस का दावा- जांच में नहीं मिले साक्ष्य एसपी सिटी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने राहुल कौशिक को हिरासत में लेकर छानबीन शुरु की लेकिन कहीं से भी कोई ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जो उनके IAS होने की पुष्टि करता हो। CO सिविल लाइन की रिपोर्ट के बाद राहुल कौशिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अफसरों की मानें तो राहुल के घर से IAS व डिप्टी सेक्रेटरी लिखी एक नेम प्लेट भी मिली थी। शांति भंग की कार्रवाई के बाद छोड़ा अभी पुलिस राहुल कौशिक को जेल भेजने की तैयारी कर ही रही थी कि कुछ लोग पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचे। उन्होंने राहुल कौशिक की शिक्षा से जुड़े कुछ साक्ष्य पेश किए, जिसके बाद पुलिस ने राहुल का शांतिभंग में चालान कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने राहुल को जमानत पर छोड़ दिया। परिजनों ने किया- बेटे के IAS होने का दावा राहुल कौशिक के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध जताया है। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान परिवार ने राहुल से जुड़े कुछ साक्ष्य पेश किए। इन साक्ष्यों की मानें तो राहुल वर्ष 2008 बैच के IAS अफसर हैं जो निलंबित चल रहे हैं। 728 रैंक के अनुसार राहुल का इंडियन पोस्टल सर्विस के लिए चयन हुआ था। ट्रेनिंग के बाद दिल्ली मिली पहली पोस्टिंग भाई सौरभ शर्मा बताते हैं कि UPSC में चयन के बाद उनके भाई की गाजियाबाद स्थित रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी (RAKNPA) में ट्रेनिंग चली। दो वर्ष की ट्रेनिंग के बाद वर्ष 2010 में पहली पोस्टिंग दिल्ली मिली। हालांकि इसके बाद उनकी गुवाहाटी, चेन्नई, हैदराबाद, तमिलनाडु जैसे स्थानों पर भी पोस्टिंग रही। वर्ष 2017-18 में लगे आरोप, निलंबित सौरभ बताते हैं कि उनके भाई राहुल कौशिक पर वर्ष 2017-18 में नौकरी लगवाने का झांसा देकर डेढ़ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगा था। इस मामले की जांच हुई, जिसके बाद राहुल को पहले निलंबित और फिर वर्ष 2019 में बर्खास्त कर दिया गया। अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ राहुल कोर्ट गए। वर्तमान में उनका मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। नशे की हालत में अफसर से नोकझोंक पुलिस की इस कार्रवाई के पीछे की हकीकत भी परिजनों ने बयां की। बताया कि राहुल नौकरी खोने के बाद डिप्रेशन में हैं। कुछ पारिवारिक समस्याओं ने हालत और बिगाड़ दी, जिसके चलते उनकी मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो गई। बुधवार देर रात राहुल ने पुलिस के किसी बड़े अफसर को फोन मिलाया। नोकझोंक के बाद रात में ही राहुल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सुबूत देने के बाद छोड़ा गया परिजनों को यह जरा भी अंदेशा नहीं था कि पुलिस मामले को प्रेस कान्फ्रेंस तक ले जाएगी। इसका पता चला तो उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सभी साक्ष्य पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराए लेकिन तब तक प्रेस कान्फ्रेंस हो चुकी थी। पुलिस ने यू-टर्न लिया और कुछ घंटे बाद ही शांतिभंग की कार्रवाई के बाद राहुल कौशिक को परिजनों की सुपुर्दगी में घर भेज दिया। पुलिसिया जांच सवालों के घेरे में इस पूरे मामले के बाद पुलिसिया जांच पर सवालिया निशान लग गए हैं। परिजनों का कहना है कि अफसर को खुश करने की जल्दबाजी में मामले की जांच की ही नहीं गई। अगर पुलिस उनसे संपर्क करती तो वह एक एक साक्ष्य पुलिस के समक्ष रखते लेकिन पुलिस ने सारी मर्यादा ही ताक पर रख दीं। SP बोले- राहुल वर्तमान में कुछ नहीं SP CITY आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि नौचंदी पुलिस को शिकायत मिली थी, जिसकी जांच CO सिविल लाइन से कराई गई। आरोप सही पाए गए। यह शख्स खुद को IAS बताकर रौब गालिब करता था। कुछ सामान भी इसके यहां से जब्त किया गया है। वर्तमान में यह किसी भी पद पर नहीं है। सभी बिंदुओं को विवेचना में शामिल किया जाएगा।
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