Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    जिस Gen Z ने बनाया, वही अब Balen Shah के खिलाफ सड़कों पर उतरा, Nepal में बढ़ते प्रदर्शनों से सरकार पर संकट

    22 hours ago

    1

    0

    जिस जेन जी के सरकार विरोधी प्रदर्शनों की लहर ने नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई थी और जिसके दम पर बालेन शाह सत्ता के सबसे प्रभावशाली पद तक पहुँचे, वही जेन जी अब उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आया है। पूरे नेपाल में लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में प्रदर्शन तेज हो रहे हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता की आशंकाएं गहरा गई हैं और सत्ता पर जनदबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।हम आपको बता दें कि नेपाल की राजधानी काठमांडू में युवक गणेश नेपाली की आत्मदाह की घटना ने देश की राजनीति और शासन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद सरकार के खिलाफ जनाक्रोश तेज हो गया है और विभिन्न विरोधी समूह एक मंच पर आते दिखाई दे रहे हैं। राजधानी में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें सरकार पर गरीबों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने, प्रशासनिक लापरवाही बरतने और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Nepal Protests: राइड-शेयर ड्राइवर की मौत के बाद भड़की आग, Balen Shah के इस्तीफे की उठी मांगपच्चीस वर्षीय गणेश नेपाली का सोमवार को बागमती नदी के तट स्थित आर्यघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उन्होंने दो दिन पहले स्वयं को आग लगा ली थी, जिसके बाद उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। अंतिम संस्कार में उनके परिजन सहित अनेक लोग मौजूद रहे और उन्हें भावभीनी विदाई दी गई। परिजनों ने सरकार द्वारा घटना की जांच कराने, मुआवजा देने, उनकी पत्नी को नौकरी उपलब्ध कराने तथा बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करने का आश्वासन मिलने के बाद अंतिम संस्कार के लिए सहमति दी।हम आपको बता दें कि गणेश नेपाली मूल रूप से नेपाल के दुर्गम मुगु जिले के रहने वाले थे। वह विदेश जाकर रोजगार करने की तैयारी में थे और इसी उद्देश्य से पासपोर्ट बनवाने के लिए पासपोर्ट कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान कार्यालय के बाहर खड़ी उनकी मोटरसाइकिल पर काठमांडू महानगर के सुरक्षा कर्मियों ने पहिया बंद करने वाला उपकरण लगा दिया। इसी घटना से आहत होकर उन्होंने स्वयं को आग के हवाले कर दिया। इस दुखद घटना ने राजधानी सहित पूरे देश में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा कर दी है।इस घटना के बाद सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार के कार्यकाल के शुरुआती एक सौ तीन दिनों में कई गंभीर प्रशासनिक चूक हुई हैं। विरोध में शामिल लोगों ने सरकार से गरीब और वंचित वर्ग के प्रति अधिक संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार अपनाने की मांग की। राजधानी के सिंहदरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर आयोजित प्रदर्शन में गणेश नेपाली के समर्थकों के साथ अप्रैल में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान से प्रभावित परिवारों ने भी भाग लिया। बारिश के कारण प्रस्तावित विशाल रैली नहीं हो सकी, फिर भी बड़ी संख्या में लोग विरोध जताने पहुंचे।विरोध प्रदर्शनों का एक प्रमुख कारण अप्रैल में चलाया गया अतिक्रमण हटाने का अभियान भी है। इस अभियान के दौरान लगभग एक हजार परिवार बेघर हो गए थे। प्रभावित लोगों का आरोप है कि सरकार ने वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन उसे पूरा नहीं किया। बाद में इन परिवारों को अस्थायी आश्रय केंद्रों में रखा गया, किंतु हाल ही में उन्हें बिना किसी नए विकल्प के वहां से भी स्थान खाली करने का नोटिस जारी कर दिया गया। इसी निर्णय से प्रभावित लोगों में भारी नाराजगी है और वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं।प्रदर्शन के दौरान कानून के छात्र माजिद अंसारी का मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अंसारी उन युवाओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने चुनाव के दौरान युवा आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका आरोप है कि उन्हें पिछले दो दिनों के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया और उनके साथ मारपीट की। फिलहाल उनका उपचार त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। अंसारी का कहना है कि उन्हें अब तक उनकी गिरफ्तारी का कोई कारण नहीं बताया गया है। उनके अनुसार वह कीर्तिपुर स्थित अस्थायी आश्रय केंद्र गए थे, जहां बेघर परिवारों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के केंद्र खाली करने के लिए कहा जा रहा था। उन्होंने मानवाधिकार संगठनों से सरकार को उनकी गिरफ्तारी और कथित पुलिस ज्यादती के लिए जवाबदेह बनाने की अपील की है।गणेश नेपाली की आत्मदाह की घटना के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। इसके बाद दो अन्य व्यक्तियों ने भी आत्मदाह का प्रयास किया। इनमें काठमांडू के बुद्ध नगर निवासी अश्विन राउत तथा सर्लाही जिले के विवेक मंडल शामिल हैं। इन घटनाओं ने सरकार के सामने कानून व्यवस्था और जन असंतोष की चुनौती को और बढ़ा दिया है।विश्लेषकों का मानना है कि गणेश नेपाली की मृत्यु केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रह गई है, बल्कि यह शासन व्यवस्था, प्रशासनिक संवेदनशीलता और विस्थापित लोगों की समस्याओं का प्रतीक बन गई है। लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों, पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवालों और बेघर परिवारों की समस्याओं ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार जांच, राहत और पुनर्वास के अपने वादों को किस तरह पूरा करती है तथा जनता के बढते असंतोष को शांत करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाती है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Gulf Region में EAM Jaishankar का मिशन कामयाब, Energy Security और West Asia के हालातों पर हुई बड़ी चर्चा
    Next Article
    South China Sea पर भारत का कड़ा रुख, MEA ने कहा- UNCLOS के तहत शांतिपूर्ण ढंग से सुलझें सभी विवाद

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment