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    जिसे देने वाले थे ब्रह्मोस वो पाकिस्तान से जा मिला, क्या है बद्र डील जिसने बढ़ाई भारत के लिए क्यों टेंशन?

    41 minutes ago

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    ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार चर्चा में रही है। पाकिस्तान के कई एयरबेस को खाक में मिलाने वाली इस मिसाइल को मुस्लिम देशों ने भी खरीदा है। इसी बीच चार मुस्लिम देशों पाकिस्तान, तुर्की, क़तर और इंडोनेशिया ने दोहा में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए भद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किए। इस भद्र नाम से जुड़े समझौते की खबरों ने यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इसका असर भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की संभावित विदेशी बिक्री पर पड़ सकता है? इस समझौते का मकसद सैन्य उत्पादन, रक्षा क्षमताओं और तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में चारों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। भारत इंडोनेशिया की मिसाइल डील पर क्यों उठे सवाल? भारत ने जुलाई में इंडोनेशिया के साथ करीब 63 करोड़ डॉलर के दो प्रमुख रक्षा समझौते किए थे। इसके तहत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और अस्त्र एयर टू एयर मिसाइल बेचने का करार हुआ था। इन चार देशों के नए रक्षा समझौते के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इंडोनेशिया की पाकिस्तान और तुर्की के साथ बढ़ती रक्षा साझेदारी का असर भारत के साथ हुए इन करारों पर पड़ सकता है? इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor के बाद बढ़ी BrahMos की मांग, 600 Million Dollar पार होगा निर्यातडीआरडीओ के चेयरमैन अमेरिटस और ब्रह्मोस एयररोस्पेस के पूर्व महानिदेशक सीईओ एवं एमडी सुधीर कुमार मिश्रा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि इंडोनेशिया के साथ भारत के रक्षा समझौतों में पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान है। उनके मुताबिक इंडोनेशिया को केवल इस्तेमाल से जुड़ी मैनुअल दी जाएगी। तकनीकी ट्रांसफर से संबंधित मैनुअल नहीं। उन्होंने कहा कि समझौते में डाटा सुरक्षा, बौद्धिक संपदा और रक्षा संप्रभुता से जुड़े सख्त प्रावधान भी शामिल हैं। जिनका पालन इंडोनेशिया को करना होगा। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि ब्रह्मोस और अस्त्र की तकनीक भारत के प्रतिद्वंदियों के हाथों में पहुंचने की कोई आशंका नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक सेंटर फॉर एरोस्पेस पावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज के सीनियर फेलो ग्रुप कैप्टन अजय अहरावत जो कि रिटायर्ड हो चुके हैं उन्होंने भी भारत इंडोनेशिया रक्षा समझौतों के प्रभावित होने की आशंकाओं को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि किसी समझौता ज्ञापन को सैन्य गठबंधन के बराबर नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक ऐसे एमओयू के लिए पहले से तय और पक्के रक्षा निर्यात करार को छोड़ना समझदारी नहीं होगी जिसका वास्तविक असर अभी स्पष्ट नहीं है। इसे भी पढ़ें: ईरान जैसा 'अंडरग्राउंड चक्रव्यूह', जिसके आगे बंकर-बस्टर भी फेल, भारत के इस फैसले ने मचाया चीन पाकिस्तान में तांडव,देखती रह गई दुनियाअहलावत ने भद्र एमओयू को काम के बंटवारे से जुड़ी व्यवस्था बताया। उनके अनुसार यह समान इस्लामी पहचान वाले देशों के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास में तालमेल बढ़ाने की पहल है। उन्होंने कहा कि भारत को इस समझौते पर नजर रखनी चाहिए। लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया ने 21 अक्टूबर को कतर की राजधानी दोहा में बद्र नाम की बहुपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य चारों देशों के बीच रक्षा उद्योग, सैन्य उत्पादन, तकनीकी प्रशिक्षण और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। इसकी पुष्टि कतर की सरकारी समाचार एजेंसी और तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी ने भी की है। 
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