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    जवाहर बाग कांड को 10 साल पूरे:शहीद एसपी सिटी की पत्नी ने व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा- प्रशासन भूल गया बलिदान

    4 hours ago

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    मथुरा में जवाहर बाग कांड की 10वीं बरसी पर शहीद तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उनकी पत्नी अर्चना द्विवेदी और पुत्र मथुरा पहुंचे तथा शहीद स्मृति स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान अर्चना द्विवेदी ने कहा कि शहीदों के बलिदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय के साथ शहादत को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। गौरतलब है कि 2 जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा में तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और फरह थाना प्रभारी संतोष कुमार यादव शहीद हो गए थे। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। 27 कब्जाधारी की हुई थी मौत रामवृक्ष यादव और उनके गुर्गों ने हथियारों के बल पर जवाहर बाग में तांडव मचाते हुए आग लगा दी थी। इस हमले में पुलिस के दो अधिकारी सहित 27 कब्जाधारी मारे गए थे और 300 से ज्यादा आरोपियों को पुलिस ने उस वक्त गिरफ्तार किया था। जवाहर बाग की बदली सूरत इस शहादत को एक दशक बीत गया सरकारें बदल गईं, जवाहरबाग का विकास भी हो गया, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वो है शहीदों के परिवारों का दर्द। शहादत दिवस पर जब शहीद मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी और उनका बेटा जवाहरबाग पहुंचे, तो सरकारी सिस्टम की बेरुखी देखकर उनका दिल टूट गया। परिजनों ने जिला प्रशासन और पुलिस पर शहादत को भुला देने का गंभीर आरोप लगाया है। शहादत की बदौलत हुआ विकास 10वीं बरसी पर पूरा मथुरा उन वीर सपूतों को नमन कर रहा है, जिन्होंने कर्तव्य पथ पर सर्वस्व न्योछावर कर दिया। लेकिन जब शहीद एसपी सिटी की पत्नी अर्चना द्विवेदी अपने बेटे के साथ मंगलवार को जवाहरबाग स्थित शहादत स्थल पर पुष्प अर्पित करने पहुंचीं, तो वहां पसरा सन्नाटा सिस्टम की संवेदनहीनता की कहानी खुद बयां कर रहा था। अर्चना द्विवेदी ने जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों के रवैये पर गहरी नाराजगी और आक्रोश व्यक्त किया। उनका दर्द छलका कि उनके पति के खून और संघर्ष की बदौलत आज जवाहरबाग का यह विकास तो सबको दिख रहा है, लेकिन जिन वीरों की शहादत से यह मुमकिन हुआ, उन्हें आज याद करने के लिए सरकारी महकमे का एक भी नुमाइंदा मौजूद नहीं था। बेहद दुखी और आहत मन से शहीद की पत्नी ने बड़ा एलान किया है कि अगले वर्ष से वे स्वयं अपने बेटे के साथ आकर अपने पति को याद करेंगी और शहादत दिवस के इस भावुक कार्यक्रम में पुलिस और प्रशासन के किसी भी अधिकारी को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। आरोपियों को मिले कठोर सजा परिजनों का आरोप है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी मुख्य दोषियों को वो कठोर सजा नहीं मिल सकी जिसके वे हकदार थे। साथ ही जवाहरबाग में शहीदों की स्मृति में आज तक स्मारक नहीं बना है। अब एक बार फिर इन पीड़ित परिवारों की नजरें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार पर टिकी हैं। परिवारों को उम्मीद है।
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