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    झांसी में कोतवाल ने निभाई होलिका दहन की परंपरा:झोकनबाग में भक्त प्रह्लाद से बोली होलिका-मुझे आग जला नहीं सकती,चंद मिनट में राख बन गई

    15 hours ago

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    झांसी में रंगों के पर्व होली की शुरुआत होलिका दहन के साथ हो गई। शुक्रवार रात 8 बजे से शुरू हुए शुभ मुहूर्त में शहर के अलग-अलग इलाकों में विधि-विधान से होलिका दहन किया गया। देर रात तक लोग पूजा-अर्चना के बाद गुलाल उड़ाकर एक-दूसरे को होली की बधाई देते नजर आए। दो तस्वीरों में देखें होलिका दहन… इस बार शहर में कुल 172 स्थानों पर होलिका दहन किया गया। रात 8 बजे मुहूर्त लगते ही मोहल्लों में सजाई गई होलिका की पूजा हुई और परंपरा के अनुसार अग्नि प्रज्वलित की गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह देखने को मिला। 161 साल पुरानी परंपरा निभाई झांसी में 161 साल से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा को इस बार भी आगे बढ़ाया गया। पूर्व शासक गंगाधर राव के समय से चली आ रही होलिका दहन की रस्म को शहर कोतवाल ने निभाया। घास मंडी में रात 1:30 बजे निर्धारित मुहूर्त पर कोतवाल पहुंचे और विधि-विधान से पूजा कर होलिका में अग्नि दागी। दहन से पहले होलिका की आरती उतारी गई समिति की ओर से यहां विशेष रूप से सजा हुआ होलिका का पुतला रखा गया था। पुतले की गोद में भक्त प्रह्लाद का स्वरूप बैठाया गया था। जैसे ही आग लगी, कुछ ही पलों में होलिका धू-धूकर जलने लगी। इसी दौरान परंपरा के अनुसार प्रह्लाद के पुतले को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि होलिका अग्नि की लपटों में समा गई। चंद मिनट में मिट गया होलिका का अहंकार इस बार शहर में होलिका के कुल 11 पुतले जलाए गए। सबसे बड़ा पांच फीट ऊंचा पुतला झोकनबाग में स्थापित किया गया था। यहां आयोजन को आकर्षक बनाने के लिए पुतले में ऑडियो सिस्टम लगाया गया था। होलिका और भक्त प्रह्लाद के बीच संवाद सुनाई दे रहा था। होलिका दहन के साथ होली की मस्ती शुरू होलिका ठहाके लगाते हुए प्रह्लाद को चुनौती देती नजर आई कि वह अपने भगवान को बुलाए, जो उसे अग्नि से नहीं बचा पाएंगे। लेकिन जैसे ही दहन हुआ, भक्ति की शक्ति के प्रतीक प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और होलिका का अहंकार चंद मिनट में राख बन गया। होलिका दहन के बाद लोगों ने जमकर गुलाल उड़ाया और एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। पूरे शहर में उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिला।
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