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    झांसी मेडिकल कॉलेज में पिता-पुत्र को पीटा:18 घंटे तक महिला का इलाज नहीं किया, विरोध करने पर गार्डों ने बरसाई लाठियां

    2 hours ago

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    झांसी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पिता-पुत्र से मारपीट की गई। वे बहू का इलाज कराने आए थे। आरोप है कि दो विभागों के जूनियर डॉक्टर आपस में लड़ाई करते रहे और लगभग 18 घंटे महिला को इलाज नहीं मिला। विरोध करने पर डॉक्टरों ने गार्डों को बुला लिया। गार्डों ने वार्ड को बंद करके पिता-पुत्र पर लाठी बरसा दी। हंगामे की सूचना पर चौकी से पुलिस पहुंच गई। आरोप है कि एक जूनियर डॉक्टर ने दरोगा को हड़का दिया। फोटो लेने पर उनका मोबाइल भी छीन लिया। मामला बढ़ने पर सीएमएस डॉ. सचिन माहुर समेत 3 विभागों के विभागाध्यक्ष पहुंच गए और समझाइश कर मामला शांत करा दिया। घटना रविवार शाम लगभग 4 बजे की है। 20 दिन पहले हुई थी डिलेवरी बड़ागांव के गांधीनगर निवासी प्रसन्न कुमार अहिरवार ने बताया- मेरी शादी 2024 में उल्दन निवासी अल्का (24) से हुई थी। पत्नी 9 महीने की गर्भवती थी। प्रसव पीड़ा होने पर उसे 6 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया था। यहां अगले दिन ऑपरेशन से बच्चा हो गया। उसे कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन दो दिन बाद पेट फूलने लगा। आराम नहीं मिलने पर 12 अप्रैल को निजी अस्पताल ले गए। कई अस्पतालों में भटकने के बाद पैसा खत्म हो गया। तब 25 अप्रैल की रात को लगभग 9 बजे पत्नी को वापस मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती करा दिया। वो वेंटीलेटर पर थी। आरोप है कि 26 अप्रैल की दोपहर 3 बजे तक डॉक्टरों ने पत्नी का कोई इलाज नहीं किया। फोटो लेने पर भड़क गए पति ने आगे बताया- पत्नी को 3 बोतल लगी थी, लेकिन उसमें फ्लूड नहीं आ रहा था। फोटो लेने पर डाॅक्टर भड़क गए। सिक्योरिटी गार्डों को बुला लिया। उनके इशारे पर सिक्योरिटी गार्डों ने वार्ड के गेट बंद कर मुझे और मेरे पिता को लाठी से पीटा। आरोप है कि पहले पत्नी केे ऑपरेशन में लापरवाही बरती गई। डिलेवरी होने के बाद ठीक से सफाई नहीं की गई। इससे संक्रमण फैल गया। दोबारा आए तो इलाज नहीं किया। महिला को कई तरह की दिक्कतें थीं सीएमएस डाॅ. सचिन माहुर ने बताया कि अल्का को 6 अप्रैल को भर्ती किया गया था। उनको बुखार था, प्लेटलेट्स कम थी, ऐसी कई तरह की दिक्कतें थीं, जो जीवन के लिए बहुत खतरनाक होती है। डिलेवरी के बाद इलाज चल रहा था, लेकिन परिजन अपनी मर्जी से उनको लेकर चले गए। प्राइवेट अस्पतालों में दिखाते रहे, इससे मरीज की स्थिति और बिगड़ गई। 25 अप्रैल को मरीज दोबारा आया तो वेंटीलेटर पर था। अब उसे भर्ती करके इलाज शुरू कर दिया गया। मारपीट और मोबाइल छीनने की कोई शिकायत नहीं मिली है।
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