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    काम के हिसाब से एआई मॉडल चुनेगा सिस्टम,:गति बढ़ाने, खर्च घटाने के लिए ऑटोमैटिक काम बांटने की नई टेक्नोलॉजी; खर्च दो तिहाई कम

    18 hours ago

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    एआई एप्लीकेशंस की लागत दो-तिहाई घटाने के लिए कंपनियां मॉडल राउटिंग सिस्टम बना रही हैं। ये एप्लीकेशंस सीधे चैटबॉट के बजाय इंसानी टीम की तरह काम कर रहे हैं। कंपनियां पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक ही एआई मॉडल के बजाय ऐसा राउटिंग सिस्टम बना रही हैं, जो हर काम सही मॉडल के पास भेजता है। जब एआई एजेंट्स जटिल काम संभालते हैं, तब यह सिस्टम तय करता है कि कौन सा मॉडल क्या करेगा। कोडिंग में फाइलें पढ़ने, नियम समझने, नया कोड लिखने और जांच जैसे काम अलग-अलग एजेंट्स में बांट दिए जाते हैं। कठिन काम एडवांस मॉडल, जबकि सामान्य काम छोटे मॉडल करते हैं। एनवीडिया ने ‘रस्ट लैंग्वेज’ पर आधारित ‘नीमो स्विचयार्ड’ नाम का ओपन-सोर्स टूल जारी किया है। यह एआई ट्रैफिक को मॉडल्स के बीच ट्रांसफर करता है और ओपनएआई व एंथ्रोपिक के बीच भाषा का अनुवाद करता है। इससे इंजीनियरों को नया मॉडल जोड़ते समय बार-बार पूरा कोड बदलने से मुक्ति मिलती है। एनवीडिया इसे ‘सिस्टम ऑफ मॉडल्स’ कहती है, जो एडवांस मॉडल योजना बनाता है और छोटा मॉडल कोड जांचता है। ‘नीमो स्विचयार्ड’ में मॉडल का चुनाव सिर्फ शुरुआत में नहीं होता। यह सिस्टम काम के दौरान नतीजों और गलतियों को देखकर तुरंत फैसला बदल देता है। कोडिंग की शुरुआत में बड़े मॉडल की मदद ली जाती है। रास्ता साफ होते ही छोटा मॉडल काम संभालता है। जांच सही रहने पर बड़े मॉडल की जरूरत नहीं पड़ती। बड़ी तकनीकी खराबी पर ही उसे दोबारा जिम्मेदारी दी जाती है। साधारण चैटबॉट एक सवाल पर एकाध बार ही एआई से संपर्क करता है, जबकि एजेंट काम पूरा करने में दर्जनों बार एआई को कॉल करता है। हर छोटी कॉल के लिए सबसे महंगा मॉडल इस्तेमाल करने पर खर्च और समय बढ़ते हैं, पर सबसे सस्ता मॉडल लगाने पर गलतियां बढ़ती हैं। ‘नीमो स्विचयार्ड’ ने सटीकता बनाए रखते हुए खर्च को क्लॉड ओपस 4.8 के मुकाबले घटाकर एक-तिहाई कर दिया है। ऑपरेशन सिस्टम तय करता है कि पूरी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी, वहीं राउटिंग टूल सिर्फ यह तय करता है कि कौन सा मॉडल किस कॉल को संभालेगा। एनवीडिया डेवलपर्स को गुणवत्ता, गति या लागत को प्राथमिकता पर सेट करने की आजादी देती है। लैंगचेन, लाइट-एलएलएम और कांग जैसी कंपनियां भी मॉडल्स के बीच की कड़ी मजबूत कर रही हैं। इससे नए मॉडल अपनाना और डेटा सुरक्षित रखना आसान हो गया है। टेक्नोलॉजी: एंथ्रोपिक और गूगल की काम करने की शैली एक-दूसरे से अलग एंथ्रोपिक ‘सलाहकार’ मॉडल पर काम कर रही है। इसमें बड़ा मॉडल केवल योजना बनाता है और छोटे मॉडल्स जमीन पर सारा काम निपटाते हैं। दूसरी तरफ गूगल क्लाउड ने अपने मुख्य गेटवे में ही राउटिंग दे दी है। यह जेमिनी के अलावा दूसरे मॉडल्स पर भी रिक्वेस्ट भेज सकता है। गूगल का एजेंट डेवलपमेंट किट भी कई अलग-अलग तरीकों से काम करने की सुविधा देता है। जैसे रोबोटैक्सी बाजार में जूक्स और टेस्ला का मॉडल अलग है, वैसे ही एआई कंपनियां भी काम के तरीके अलग-अलग अपना रही हैं।
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