Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    कानून लागू करने में ज्ञान और समझ दोनों जरूरी, Gwalior में बोले Justice Prashant Kumar Mishra

    14 hours ago

    1

    0

    उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने शनिवार को कहा कि न्यायिक शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है और कानून के व्यापक दायरे को देखते हुए इसमें निरंतर विकास की जरूरत है। न्यायमूर्ति मिश्रा ने ‘न्यायिक शिक्षा के क्षितिज का विस्तार’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय पश्चिम क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कानून को लागू करने के लिए ज्ञान और समझ दोनों आवश्यक हैं। यह सम्मेलन राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय और मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से आयोजित किया गया।उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने कहा कि न्यायिक अकादमियां लगातार ज्ञान प्रदान कर न्यायपालिका को समृद्ध करती हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक शिक्षा के तीन प्रमुख आयाम-ज्ञान, संवेदनशीलता और शिक्षार्थी, एक साथ विस्तार पा रहे हैं। न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने न्यायाधीशों की न्यायिक सोच को लगातार बेहतर बनाने और उनके दृष्टिकोण का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने कहा कि आधुनिक न्यायिक शिक्षा केवल पुराने फैसलों की जानकारी तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें कानून की त्वरित व्याख्या करने की क्षमता भी शामिल है। उन्होंने न्यायिक प्रशिक्षण को यांत्रिक प्रक्रिया से आगे बढ़ाकर बहुविषयक शिक्षा की दिशा में ले जाने की जरूरत बताई। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक और उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने कहा कि अकादमी ने पिछले 24 वर्षों में करीब 52,000 न्यायाधीशों के साथ संवाद किया है।उन्होंने डीएनए रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जैसे नए क्षेत्रों में न्यायाधीशों के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक यशवंत कोगजे ने कहा कि कानूनी दक्षताएं स्वत: विकसित नहीं होतीं, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण के माध्यम से निखारना पड़ता है। उन्होंने कहा कि न्यायिक अकादमियां उच्च स्तर की न्यायिक शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।न्यायमूर्ति आलोक यशवंत कोगजे ने नेल्सन मंडेला के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा दुनिया को बदलने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है। आयोजकों ने बताया कि पहली बार ग्वालियर में आयोजित यह सम्मेलन न्यायाधीशों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया। सम्मेलन में न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी चर्चा हुई।
    Click here to Read more
    Prev Article
    MP में इस वर्ष 1 लाख सरकारी पदों पर भर्ती होगी, CM Mohan Yadav का इंदौर में ऐलान
    Next Article
    सटीक Cancer Care को सस्ता बनाने के लिए 5 साल की नीति जरूरी: डॉ. सिरोही

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment