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    कानपुर अटारी का 18वां स्थापना दिवस:अब खेती में बढ़ेगा AI का इस्तेमाल, पराली न जलाने के लिए 23 जिलों के KVK बनाएंगे रणनीति

    1 hour ago

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    भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन संचालित कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कानपुर ने अपना 18वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। इस खास मौके पर संस्थान के वैज्ञानिकों और ने भविष्य की खेती और किसानों की आय बढ़ाने पर गंभीर मंथन किया। कार्यक्रम के दौरान 'फसल अवशेष प्रबंधन' पर एक कार्यशाला भी हुई, जिसमें पराली जलाने की समस्या के स्थायी समाधान खोजने पर जोर दिया गया। खेती में तकनीक और एआई की बढ़ती भूमिका विशेषज्ञों ने कहा- बढ़ती जनसंख्या के दबाव के बीच अब खेती के पारंपरिक तरीकों में बदलाव की जरूरत है। कानपुर के मंडलायुक्त और सीएसए यूनिवर्सिटी के कुलपति श्री के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने आधुनिक दौर में खेती के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग पर चर्चा की और बताया कि कैसे तकनीक के जरिए किसान अपनी फसल को बेहतर बना सकते हैं। भंडारण क्षमता बढ़ाने और युवाओं को जोड़ने पर जोर कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं को खेती को एक व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। पूर्व उप महानिदेशक डॉ. यू.एस. गौतम ने सुझाव दिया कि वर्तमान समय में हमें फल और दुग्ध उत्पादों के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए इनकी संख्या में और विस्तार करने की वकालत भी की। पराली जलाने से रोकने के लिए 23 जिलों का अभियान स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के उन 23 जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों ने हिस्सा लिया, जहाँ फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना चलाई जा रही है। संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि, इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य किसानों को जागरूक कर पराली जलाने से रोकना है। उन्होंने संस्थान की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि 19 मार्च 2009 को यह इकाई क्षेत्रीय परियोजना निदेशालय के रूप में स्थापित हुई थी और आज यह उत्तर प्रदेश के 89 कृषि विज्ञान केंद्रों की उपलब्धियों का नेतृत्व कर रही है। वैज्ञानिकों और एफपीओ का हुआ सम्मान समारोह के दौरान संस्थान के नए प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जो किसानों के लिए मददगार साबित होंगे। बेहतर कार्य करने वाले चार कृषि विज्ञान केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और संस्थान के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों व कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। वर्चुअल माध्यम से दिल्ली के कृषि विशेषज्ञों ने भी आगामी परियोजनाओं की जानकारी साझा की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीति यादव ने किया और अंत में डॉ. अजय कुमार सिंह ने सभी का आभार जताया।
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