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    कानपुर के कॉलेजों में अब एआई से होगी पढ़ाई:CSJMU में 100 शिक्षकों ने सीखी तकनीक, अब क्लासरूम में बदलेगा पढ़ाने का तरीका

    4 hours ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) अब अपने से जुड़े कॉलेजों को हाईटेक बनाने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय की कैंपस एआई प्रमोशन (CAM) पहल के तहत आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का गुरुवार को समापन हो गया। इसमें कानपुर और आसपास के जिलों के 100 से अधिक प्राचार्यों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। अब ये शिक्षक अपने कॉलेजों में जाकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए न सिर्फ बच्चों को पढ़ाएंगे, बल्कि कॉलेज का प्रशासनिक काम भी इसी तकनीक से निपटाएंगे। शिक्षकों ने तैयार किया कॉलेजों का एआई रोडमैप कार्यशाला के दूसरे दिन शिक्षकों को केवल थ्योरी नहीं पढ़ाई गई, बल्कि उन्हें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई। बीसीए और बीबीए कोर्स चलाने वाले कॉलेजों के शिक्षकों ने छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर चर्चा की कि वे अपने संस्थान में एआई को कैसे लागू कर सकते हैं। शिक्षकों ने एआई के सुरक्षित इस्तेमाल और डेटा की प्राइवेसी को लेकर भी जानकारी हासिल की। ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य यह था कि कॉलेज प्रशासन और शिक्षक एआई को अपना दोस्त बनाकर काम के बोझ को कम कर सकें। छात्रों की मदद और एडमिशन प्रक्रिया होगी आसान ट्रेनिंग के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि एआई का उपयोग केवल कंप्यूटर लैब तक सीमित न रहे। इसे छात्र सहायता प्रणाली और प्रशासनिक कार्यों में भी जोड़ा जाएगा। इससे छात्रों की समस्याओं का निपटारा तेजी से हो सकेगा और एडमिशन से लेकर रिजल्ट तक की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी। कार्यशाला में एडुबडी के विशेषज्ञों ने शिक्षकों को एआई के नैतिक उपयोग के बारे में भी बताया, ताकि भविष्य में इस तकनीक का कोई गलत इस्तेमाल न हो। डिजिटल कैंपस की ओर विश्वविद्यालय के कदम समापन सत्र में कुलपति ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में तकनीक के साथ चलना ही एकमात्र विकल्प है। जो संस्थान तकनीक को जितनी जल्दी अपनाएंगे, उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता उतनी ही बेहतर होगी। उन्होंने शिक्षकों को नई चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा। विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि सीएसजेएमयू से संबद्ध हर कॉलेज आने वाले समय में एआई आधारित नवाचार का केंद्र बने। प्रतिभागियों को मिले सर्टिफिकेट दो दिनों तक चली इस वर्कशॉप के अंत में सभी शिक्षकों और प्राचार्यों को प्रमाण पत्र बांटे गए। शिक्षकों ने माना कि इस तरह की ट्रेनिंग से उन्हें क्लासरूम में पढ़ाने के नए तरीके सीखने को मिले हैं। इस आयोजन को विश्वविद्यालय के एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उच्च शिक्षा के ढांचे को डिजिटल और आधुनिक बनाया जा सके।
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