Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    कानपुर में 5 साल में 1297 बच्चे लापता:यूपी में एक दिन में 22 बच्चे हो रहे चोरी; गैंग के निशाने पर सबसे ज्यादा धार्मिक नगरी

    6 hours ago

    1

    0

    यूपी में एक दिन में 22 से अधिक बच्चे चोरी हो रहे हैं। ये हम नहीं यूपी पुलिस के आंकड़े बता रहे हैं। पिछले 5 सालों में 41 हजार से अधिक बच्चे गायब हुए। इनमें से 39 हजार तो बरामद हो गए लेकिन अभी भी 1977 बच्चे गायब हैं। वहीं पुलिस के हलफनामे के अनुसार यूपी के धार्मिक नगरी, अयोध्या, मथुरा और काशी में सबसे ज्यादा बच्चे गायब हुए हैं। कानपुर की बात करें तो अब तक 1297 बच्चे चोरी हुए। जिसमें अभी भी 36 बच्चों का सुराग नहीं लग सका है। चोरी करने वाले गैंग में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। यूपी के धार्मिक शहर काशी, अयोध्या, मथुरा से ज्यादा बच्चे हुए गायब यूपी के अयोध्या, मथुरा और काशी से ज्यादातर बच्चे गायब हो रहे हैं। पिछले 5 सालों के आंकड़े देखे तो पता चलेगा कि 2020 से 2025 तक वाराणसी कमिश्नरेट कुल 2936 बच्चे गायब हुए है। जबकि 79 बच्चों को अभी तक पता नहीं चला है। जबकि मथुरा में 1550 बच्चे गायब हुए। इसमें 1522 बच्चे बरामद हो गए लेकिन 28 बच्चे अभी भी लापता हैं। वहीं अयोध्या में 1006 बच्चे गायब हुए। इसमें 773 बच्चे बरामद हुए जबकि 33 बच्चे अभी भी लापता हैं। कानपुर जोन में 4422 बच्चे गायब हुए कानपुर जोन में पिछले 5 साल में 4422 बच्चे लापता हुए। इसमें 4231 बच्चे बरामद हुए। जबकि 191 अभी भी लापता हैं। कानपुर देहात की बात करें तो यहां से 440 बच्चे गायब हुए। इसमें 426 बच्चे मिल गए लेकिन 14 बच्चे अभी भी लापता हैं। इटावा में 478 बच्चे गायब हुए। इसमें 467 बच्चे मिल गए लेकिन 11 बच्चे अभी भी लापता हैं। अधिकतर बच्चा चोर गैंग के लोग बच्चों को धार्मिक शहर, मंदिर, रेलवे और बस स्टेशन और अस्पतालों से बच्चों को निशाना बनाते हैं। कई बार अस्पतालों के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती रही है। इसके बाद ये लोग ऐसे लोगों को बच्चों को देते है। जिनके बच्चे नहीं होते हैं। कानपुर जोन की देखिए लिस्ट नोट..ये आंकड़े 2020 से 2025 तक के हैं। 21 फरवरी को बोरे में बच्चे को ले जाती महिला पकड़ी गई कानपुर के पनकी में 21 फरवरी 2026 को एक महिला बच्चा चोर पकड़ी गई। वह बोरे में 2 साल के बच्चे को पकड़कर ले जा रही थी। कच्ची बस्ती में लोगों ने बच्ची की रोने की आवाज सुनी। आसपास के लोगों ने महिला को 100 मीटर दौड़ा कर पकड़ के पुलिस के हवाले कर दिया। जिसके बाद मासूम को पनकी पुलिस ने उसके माता- पिता को सौप दिया। 12 घंटे की पूछताछ में नाम-पता न जान पाई पुलिस बच्चा चोरी गैंग में महिलाएं घटना को अंजाम देती है, लेकिन उनके गैंग के पुरुष उन महिलाओं और बच्चों पर नजर रखते और रेकी करते है। 21 फरवरी को आसपास के लोगों ने पनकी पुलिस को एक महिला को चोरी करते हुए शाम के समय महिला को सौपा था। लेकिन पुलिस 12 घंटों के बाद तक उसका नाम पता तक नहीं जान पाई। पनकी थाना प्रभारी मनोज सिंह ने बताया- महिला चोर ने पहले अपने आप को हिंदू फिर मुस्लिम बताया। वह कभी अपने को गोंडा, सीतापुर, बहराइच जिलों का नाम लेती रही। लेकिन उसका सही नाम पता मालूम नहीं चल सका है। उसका चालान करके जेल भेज दिया गया है। अब पढ़िए कानपुर की बच्चा चोरी की 2 घटनाएं अब समझिए क्यों चोरी हो रहे बच्चे भारत में हर 8 मिनट में एक बच्चा चोरी होता है। ऐसे में बच्चों की तस्करी और चोरी रोकना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यूपी चाइल्ड ट्रैफ़िकिंग मामले में टॉप पर है। गरीबी, बेरोजगारी होने की वजह से ये गैंग बच्चों को अपना निशाना बनाते हैं। यूपी में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल से बच्चों की चोरी को लेकर भले ही इतनी गंभीर टिप्पणी की हो, लेकिन अस्पताल आजकल बच्चों की तस्करी के बड़े माध्यम बन चुके हैं। यह किसी से छिपा नहीं है। अस्पतालों में इन अपराधों के लिए छोटे-मोटे गिरोह नहीं, बल्कि कई बार अस्पताल प्रशासन तक की भूमिका रहती है। उससे भी गंभीर बात ये है कि कई बार अभिभावक भी पैसों के लालच में बाल तस्करी में शामिल हो जाते हैं। कानून बनने के बाद ही ऐसी घटनाएं रुकेंगी लखनऊ के लॉ कॉलेज के प्रोफेसर अब्दुल हफीज गांधी बताते हैं कि भारत में बाल तस्करी के लिए अलग से कोई कानून ना होना भी इस समस्या को रोक पाने में बाधक है। अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम जैसे कानून हैं, लेकिन ये केवल वेश्यावृत्ति पर केंद्रित हैं। इसके अलावा किशोर न्याय अधिनियम और बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम उपलब्ध जरूर हैं लेकिन अपर्याप्त हैं। गृह मंत्रालय बाल तस्करी से संबंधित दिशानिर्देश तो जारी करता है लेकिन उस पर अमल करने का काम राज्य सरकार का है। यूपी में इन दिशा-निर्देशों का कैसा पालन हो रहा है ये आंकड़ों और सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी से स्पष्ट है। जब तक एक अलग कानून और जिम्मेदारी नहीं तय की जाएगी। इस श्राप से मुक्ति नहीं मिलेगी। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें कानपुर में कॉन्स्टेबल ने सरेआम ट्रांसजेंडर को किस किया; वीडियो वायरल होने पर गिड़गिड़ाया- नौकरी पर बन आई, रील डिलीट कर दो कानपुर में रील बना रही ट्रांसजेंडर को कॉन्स्टेबल ने सरेआम किस किया। ट्रांसजेंडर ने इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। उसने गाना लगाया- छैला बाबू तू कैसा दिलदार निकला…। पढ़िए पूरी खबर
    Click here to Read more
    Prev Article
    लखनऊ में पिता की हत्याकर टुकड़े नीले ड्रम में छिपाए:वजह- पापा डॉक्टर बनाना चाहते, बेटे को होटल खोलना था
    Next Article
    रायबरेली में माइनर कटी, फसलें डूबीं:सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप, किसानों ने मांगा मुआवजा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment