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    कानपुर में महिला ई-रिक्शा चालक को 16 करोड़ का नोटिस:पीड़िता बोली- लोन दिलाने के नाम पर मुझे फंसाया, चौकी इंजार्ज सस्पेंड

    1 hour ago

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    कानपुर में ई-रिक्शा चलाने वाली महिला को इनकम टैक्स ने 16 करोड़ रुपए का टैक्स नोटिस दे दिया। नोटिस देखकर महिला के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्हें समझ नहीं आया कि क्या करें। पीड़िता का आरोप है कि उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से बैंक खाता खोला गया। इसी खाते में लगभग 13 करोड़ रुपए की खरीद-फरोख्त और करीब 3 करोड़ रुपए का अन्य लेनदेन दिखाया गया है। महिला का कहना है कि उसे इस खाते की कोई जानकारी भी नहीं हुई। महिला का कहना है कि वह पहले ई-रिक्शा चलाकर बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी, लेकिन बाद में बीमारी और आर्थिक तंगी के चलते हालात बिगड़ गए। लोन दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति ने खाता खुलवाकर उसका दुरुपयोग किया। पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस चौकी में की। वहां से किसी तरह कार्रवाई न होने पर महिला 22 मई को पुलिस कमिश्नर के पास पहुंची। इसके बाद चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं, पुलिस कमिश्नर के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पूरा मामला पनकी थाना क्षेत्र का है। अब जानिए पूरा मामला… 2017 में पति से ले लिया था तलाक रतनपुर चौकी के रामगंगा इन्क्लेव में रहने वाली अर्चना मिश्रा ई-रिक्शा चालक हैं। अर्चना (45) ने बताया कि शादी के बाद से ही मेरा पति मुझ पर शक करता था। पिता–भाई तक से फोन पर बात नहीं करने देता था। छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगड़ा और मारपीट करने लगता था। 2017 में मैंने पति से तलाक ले लिया और अपने दो बेटे उज्जवल और उत्कर्ष के साथ रहने लगी। पति से अलग होने के एक साल बाद ही मुझे पता चला कि मेरी बच्चेदानी में कैंसर है, जिसके बाद से मैं तनाव में रहने लगी। अर्चना ने बताया कैंसर की जानकारी होने के बाद जीने की इच्छा खत्म हो गई थी, लेकिन बच्चों को एक मुकाम पर पहुंचाना था। उन्हें काबिल बनाने के लिए मैंने ई-रिक्शा चलाना शुरू किया। डीएम ने किया था सम्मानित अर्चना ने बताया कि मैं पहली महिला हूं, जिसने शहर में ई–रिक्शा चलाया था। इसके लिए तत्कालीन डीएम ब्रह्मदेव तिवारी ने मुझे पुरुस्कार देकर सम्मानित भी किया था। बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर के खर्चों के लिए पैसों की बहुत जरूरत थी। इसी दौरान मेरी मुलाकात अजय गुप्ता नाम के एक व्यक्ति से हुई। मैंने अजय गुप्ता से रुपए का इंतजाम कराने के लिए कहा तो उसने कहा कि मेरे मामा का जुगाड़ है, वो लोन करा देते हैं। अपने दस्तावेज मुझे दे दो, मैं उनसे कहकर करा दूंगा। अर्चना ने बताया- मैंने अजय के कहने पर अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य डॉक्यूमेंट दे दिए। इसके बाद अजय मुझे अपने मामा संजीव गुप्ता से मिलवाने के लिए बिरहाना रोड ले गया, जहां एक्सिस बैंक में मेरा खाता खुलवाया गया। खाता नहीं खुलवाया, कागज मांगने पर भगाया अजय मुझसे बोला कि- इसी बैंक अकाउंट में आपका पैसा आएगा। एक महीने बीत गए, लेकिन कुछ नही हुआ। मैंने अजय को फोन किया तो उसने बोला कि जल्द ही आपका काम हो जाएगा। तकरीबन 2 महीने बाद मैंने अजय से दोबारा संपर्क किया तो उसने कहा कि बैंक ने आपको लोन देने से मना कर दिया है। कुछ समय बाद दस्तावेज वापस मांगे तो आरोपियों ने मुझे घर से भगा दिया। कहा कि आपके कागजात बैंक से वापस नहीं होंगे। अर्चना ने बताया कि लोन भी नहीं मिला और बीमारी भी बढ़ती जा रही थी। किसी तरह पैसों का इंतजाम कर मई 2025 में ऑपेशन कराया। ऑपरेशन के बाद मैंने ई–रिक्शा चलाना बंद कर दिया और नौकरी की तलाश की करने लगी। 6 माह पहले सूरत में रहने वाले मेरे रिश्तेदार ने मुझे एक टेक्सटाइल कंपनी में नौकरी बात कही। जिस पर मैं बच्चों के साथ सूरत नौकरी करने पहुंच गई। 11 मार्च को आई थी पहली नोटिस 11 मार्च 2026 को पहली बार मुझे जीएसटी विभाग से नोटिस मिला। अधिकारियों ने फोन पर संपर्क कर नोटिस की जानकारी दी और बाद में व्हाट्सएप पर नोटिस भेजा गया। मैं अधिक पढ़ी-लिखी नहीं हूं, इसलिए नोटिस को पूरी तरह समझ नहीं सकीं। इसके बाद मैंने सूरत से अजय गुप्ता को फोन किया। अजय ने मुझे धमकाते हुए कहा कि कानपुर आ जाओ, वहीं सब बताएंगे। 10 मई को मैं अपने बेटे के साथ सूरत से कानपुर आई। अगले ही दिन, 11 मई को मुझे एक और नोटिस मिला। नोटिस पढ़ने पर पता चला कि मेरे खाते से करीब 13 करोड़ रुपए की खरीद-फरोख्त और लगभग 3 करोड़ रुपए का लेनदेन दिखाया गया है। अर्चना का आरोप है कि एक्सिस बैंक में खाता अजय गुप्ता और संजीव गुप्ता ने उनके नाम पर खुलवाया था। साथ ही आधार कार्ड और पैन कार्ड लेकर ‘AM उद्योग’ नाम की फर्म बनाई गई और उसी के जरिए पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। पुलिस चौकी में शिकायत के बाद कार्रवाई नहीं हुई अर्चना ने कहा- मैंने मामले की शिकायत करने रतनपुर चौकी पहुंची, जहां चौकी प्रभारी आशुतोष दीक्षित मुझे मिले। मुझसे कहा कि आप मुझे ये लिखकर दे दीजिए कि मैं कोई कार्रवाई नहीं चाहती हूं। हम पूरी कार्रवाई कोर्ट से करवाएंगे। मैंने उनसे पूछा कि आप ये मुझसे क्यों लिखवा रहे हैं, तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं इसलिए ये सब लिखवा रहा हूं, ताकि मैं आरोपियों को पकड़कर ला सकूं। चौकी प्रभारी के कहने पर मैंने लिखकर दे दिया। मैंने यह सब बातें घर जाकर बताई तो लोगों ने मुझे समझाया। मैं दोबारा चौकी पहुंची तो उन्होंने मुझसे कहा कि आप लोग जाइए मैं आरोपियों को पकड़ कर लाऊंगा, लेकिन चौकी प्रभारी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद मैं अपनी शिकायत लेकर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंची। सहायक पुलिस अधीक्षक अमरनाथ ने बताया महिला की शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर के आदेश पर चौकी प्रभारी आशुतोष दीक्षित को लाइन हाजिर किया गया। पनकी इंस्पेक्टर ने थाने बुलाकर महिला का मुदमा दर्ज किया है। मामले की जांच की जा रही है। ------------------ ये खबर भी पढ़िए- SSC ऑनलाइन एग्जाम में नकल कराने वाले 7 अरेस्ट:ग्रेटर नोएडा में सेंटर बनाया था; 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