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    कानपुर मेट्रो का 'मिशन कॉरिडोर-2':टनल की खुदाई के बाद अब बिछने लगी पटरियां, CSA से बर्रा के बीच काम ने पकड़ी रफ्तार

    2 hours ago

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    शहर में मेट्रो के दूसरे कॉरिडोर (CSA से बर्रा-8) का काम अब पटरी पर आ गया है। टनल की खुदाई पूरी होने के तुरंत बाद अब जमीन के नीचे रेल पटरियां बिछाने और उन्हें जोड़ने (वेल्डिंग) का काम शुरू कर दिया गया है। शनिवार को डिपो से काकादेव स्टेशन के बीच पहली रेल पटरी उतारी गई। खास बात यह है कि अभी कुछ दिन पहले ही इस रूट पर टनल का काम पूरा हुआ था और मेट्रो ने बिना वक्त गंवाए ट्रैक का काम भी शुरू कर दिया है। भारी क्रेन से जमीन के नीचे उतारी गई वेल्डिंग मशीन मेट्रो के इंजीनियरों ने कॉरिडोर-2 के डिपो के पास बड़ी क्रेन की मदद से एक खास मशीन (FBW प्लांट) को जमीन के नीचे उतारा है। यह मशीन पटरियों को आपस में जोड़ने का काम करती है। पटरियों को वेल्ड करने के बाद ट्रैक्टरों और क्रेन के जरिए उन्हें टनल के अंदर ले जाया जा रहा है। जैसे ही पटरियां बिछ जाएंगी, उनके नीचे कंक्रीट की ढलाई (ट्रैक स्लैब) शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद बिजली सप्लाई के लिए तीसरी पटरी (थर्ड रेल) लगाने का काम होगा। ऐसी पटरियां जिन पर शोर कम होगा और उम्र लंबी रहेगी इस ट्रैक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें रेल की पटरियों के नीचे पत्थर (गिट्टी) नहीं डाले जाएंगे। इसे 'बैलास्ट-लेस' ट्रैक कहते हैं। पटरियां भी खास 'हेड हार्डेंड' तकनीक से बनी हैं, जो जल्दी घिसती नहीं हैं और तेज रफ्तार झेल सकती हैं। घनी आबादी वाले इलाकों के नीचे से मेट्रो गुजरेगी, इसलिए टनल में 'मास स्प्रिंग सिस्टम' लगाया जा रहा है। इससे ट्रेन चलने पर जमीन के ऊपर रहने वाले लोगों को शोर या कंपन महसूस नहीं होगा। कॉरिडोर-1 पर टेस्टिंग और कॉरिडोर-2 पर निर्माण तेज कानपुर मेट्रो के एमडी सुशील कुमार ने बताया कि, कॉरिडोर-2 का काम पूरी रफ्तार में है। जहां एक तरफ आईआईटी से कानपुर सेंट्रल के बीच मेट्रो पहले से चल रही है, वहीं सेंट्रल से नौबस्ता के बीच भी ट्रायल की तैयारी है। अब कॉरिडोर-2 के 8.60 किलोमीटर लंबे रूट पर भी सिविल काम आखिरी दौर में है। अंडरग्राउंड टनल का काम लगभग पूरा हो चुका है, जिससे अब ट्रैक बिछाने और स्टेशन फिनिशिंग के काम में और तेजी आएगी।
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