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    कानपुर मेट्रो स्टेशन बना सांस्कृतिक मंच:नन्हे कलाकारों ने बिखेरा हुनर, यात्रियों ने सफर छोड़ तालियों से बढ़ाया हौसला

    3 hours ago

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    शहर की लाइफलाइन बन चुकी कानपुर मेट्रो अब सिर्फ सफर का जरिया नहीं, बल्कि कला और संस्कृति का केंद्र भी बनती जा रही है। रविवार को बड़ा चौराहा मेट्रो स्टेशन का नजारा कुछ अलग था। यहां मेट्रो प्रशासन की ‘शो योर टैलेंट’ पहल के तहत कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का ऐसा जलवा बिखेरा कि आने-जाने वाले यात्री भी अपनी मंजिल भूलकर कुछ देर रुकने पर मजबूर हो गए। सुबह 11 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र नन्हे बाल कलाकार रहे। ‘सिंगर्स की दुनिया’ संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने गजब का आत्मविश्वास दिखाया। इद्या मिश्रा ने जब शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी, तो स्टेशन परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद अवंतिका, प्रियांशी, आदर्श और रेयांशा जैसे छोटे कलाकारों ने फिल्मी गानों पर बेहतरीन डांस कर समां बांध दिया। बच्चों की चंचलता और उनके नृत्य के स्टेप्स देखकर मेट्रो से सफर कर रहे यात्री भी झूम उठे। सदाबहार गानों से गूंजा स्टेशन नृत्य के बाद जब संगीत का दौर शुरू हुआ, तो माहौल और भी खुशनुमा हो गया। संगीत प्रेमियों और कलाकारों ने अपनी सुरीली आवाज में ऐसे सदाबहार गाने पेश किए, जिन्हें हर उम्र के लोगों ने पसंद किया। दिव्या, अंकित, भानुदय और अनाया जैसे गायकों ने जब ‘आगे भी जाने न तू’ और ‘आशाएं खिले दिल की’ जैसे गीत प्रस्तुत किए, तो पूरा स्टेशन परिसर एक लाइव कॉन्सर्ट में बदल गया। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों के लिए यह एक सुखद अनुभव रहा, जिन्होंने भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच संगीत के इन पलों का भरपूर आनंद लिया। कला को मिल रहा नया आसमान कानपुर मेट्रो की यह पहल अब शहर के उभरते कलाकारों के लिए एक बड़े मंच के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम में शामिल कलाकारों का कहना है कि शहर में अक्सर ऐसे मंचों की कमी महसूस होती है, जहां बिना किसी दबाव के अपनी कला को लोगों के सामने रखा जा सके। मेट्रो की इस पहल ने उन्हें वह मंच दिया है, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें और लोगों तक पहुंचा सकें। मेट्रो प्रशासन का मानना है कि यात्रियों के सफर को सुहावना बनाने के साथ-साथ शहर की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना भी उनका एक प्रमुख उद्देश्य है। बड़ा चौराहा मेट्रो स्टेशन पर हुआ यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मंच मिले, तो शहर की नई पीढ़ी कला के क्षेत्र में किसी से कम नहीं है। अब यात्रियों को मेट्रो में सिर्फ सफर ही नहीं, बल्कि मनोरंजन और संस्कृति का भी अनुभव मिल रहा है, जो निश्चित रूप से कानपुर मेट्रो की लोकप्रियता को और बढ़ाएगा।
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