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    कानपुर नगर निगम की SIT जांच के बीच नए निर्देश:भ्रष्टाचार की शिकायतें अब विजिलेंस और एंटी करप्शन को भेजी जाएंगी

    17 hours ago

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    कानपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर गठित SIT की जांच के बीच पुलिस कमिश्नर ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। SIT के कामकाज के साथ अब तक मिली शिकायतों की भी समीक्षा की जाएगी। भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें नगर आयुक्त को भेजने के साथ जांच की संस्तुति के आधार पर विजिलेंस और एंटी करप्शन विभाग को भी भेजी जाएंगी। SIT को जांच के दौरान सीधे नगर निगम कर्मचारियों को नोटिस जारी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों को नगर आयुक्त के माध्यम से बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जाएगा। वहीं, फर्जी नाम से मिलने वाली शिकायतों पर शपथपत्र लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। दो ठेकेदार हो चुके गिरफ्तार नगर निगम में ठेकेदारों की पूलिंग, कमीशन और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पुलिस पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। रंगदारी के आरोप में ठेकेदार रज्जन बाजपेई और संदीप जैन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। ठेकेदार गोविंद शर्मा ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले रखा है। मामले की जांच SIT कर रही है। ठेकेदारों और नगर निगम कर्मचारियों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। नगर आयुक्त का पत्र सामने आने के बाद समीक्षा शनिवार को नगर आयुक्त की ओर से पुलिस कमिश्नर को भेजा गया पत्र सामने आया। इसमें हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए विभागीय शिकायतों पर सीधे कार्रवाई नहीं करने और कर्मचारियों को बेवजह परेशान नहीं करने की बात कही गई थी। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने पत्र मिलने की पुष्टि की। इसके बाद एडिशनल पुलिस कमिश्नर को अब तक मिली शिकायतों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय शिकायतें नगर आयुक्त को भेजी जाएंगी पुलिस कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं कि विभागीय शिकायतें सीधे नगर आयुक्त को भेजी जाएं। भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों को नगर आयुक्त के साथ-साथ एंटी करप्शन और विजिलेंस विभाग को भी भेजा जाएगा। SIT को भी जांच की प्रक्रिया में संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय रखने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों को बयान के लिए बुलाने की जरूरत होने पर नगर आयुक्त के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आपराधिक मामलों की जांच पुलिस करती रहेगी पुलिस कमिश्नर को भेजे गए पत्र में हाईकोर्ट के जिस आदेश का हवाला दिया गया है, उसमें सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी नाम-पते से की गई शिकायतों पर सीधे कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई है। पुलिस अब ऐसी शिकायतों में शिकायतकर्ता से शपथपत्र लेगी। यदि शिकायत फर्जी नाम या पते से की गई पाई जाती है तो उसे समाप्त किया जाएगा। हालांकि, आपराधिक प्रकृति की शिकायतों की जांच पुलिस पहले की तरह करती रहेगी।
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