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    कानपुर से कोलकाता तक जलमार्ग की तैयारी:सांसद रमेश अवस्थी ने भेजा था प्रस्ताव, PMO से मिली हरी झंडी, DPR होगा तैयार

    14 hours ago

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    गंगा रिवरफ्रंट परियोजना के बाद अब कानपुर से कोलकाता के बीच राष्ट्रीय जलमार्ग यातायात परियोजना की तैयारी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए हरी झंडी मिल गई है। अब इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार प्रदेश में जलमार्ग परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। इस परियोजना के लिए सर्वे और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया जाएगा। कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने 2 फरवरी को प्रधानमंत्री कार्यालय को यह प्रस्ताव भेजा था। कानपुर-वाराणसी जलमार्ग की दूरी 200 किमी प्रस्ताव के मुताबिक कानपुर से वाराणसी तक जलमार्ग की दूरी करीब 200 किलोमीटर होगी, जबकि सड़क मार्ग से यह दूरी लगभग 335 किलोमीटर है। जलमार्ग शुरू होने से माल ढुलाई आसान हो जाएगी और परिवहन लागत में भी भारी कमी आएगी। बताया जा रहा है कि जलमार्ग के जरिए कार्गो परिवहन रेल और सड़क मार्ग की तुलना में करीब 50 प्रतिशत तक सस्ता हो सकता है। इससे उत्पादों की कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है और आम लोगों को महंगाई से राहत मिल सकती है। कारोबार और पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा इस परियोजना के लागू होने से उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार कारोबार के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देने के लिए जलमार्ग से जुड़ी अन्य परियोजनाएं शुरू करने की योजना बना रही है। कानपुर में खुलेगा राष्ट्रीय अंतर्देशीय नेविगेशन संस्थान का केंद्र परियोजना के तहत कानपुर में राष्ट्रीय अंतर्देशीय नेविगेशन संस्थान (NIINI) की एक शाखा भी स्थापित की जाएगी। इस केंद्र में हर साल करीब दो हजार लोगों को जलमार्ग से जुड़े विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में इंजन ड्राइवर, जहाज निर्माण कारीगर और कार्गो हैंडलिंग विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे। यह संस्थान उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत के युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करेगा और जल परिवहन क्षेत्र में नए अवसर पैदा करेगा।
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