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    कन्या सुमंगला से हजारों बेटियों को लाभ:रामपुर डीएम ने कहा- पेंशन योजना से महिलाओं को आर्थिक सहारा

    9 hours ago

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    रामपुर में बेटियों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाएं अब जमीनी स्तर पर बड़ा असर दिखा रही हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और निराश्रित महिला पेंशन योजना के माध्यम से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। जिलाधिकारी के अनुसार, अब तक 16,822 बेटियों को कन्या सुमंगला योजना का लाभ मिल चुका है। चालू वित्त वर्ष में प्राप्त 429 आवेदनों में से 427 को त्वरित स्वीकृति प्रदान की गई है, जो प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है। आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में इस योजना के तहत जन्म से लेकर शिक्षा और टीकाकरण तक विभिन्न चरणों में कुल 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जाती है। इससे बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर भी रोक लगाने में मदद मिल रही है। डीएम ने बताया कि पात्रता सुनिश्चित करने के लिए आवेदन का सत्यापन उपजिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी स्तर से कराया जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और सही लाभार्थियों तक योजना पहुंचती है। वहीं, निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत जिले की 56,251 महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है। इस वर्ष 275 नई महिलाओं को भी योजना से जोड़ा गया है। योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील प्रत्येक लाभार्थी को प्रति माह 1,000 रुपए के हिसाब से त्रैमासिक रूप से 3,000 रुपए सीधे बैंक खाते में भेजे जा रहे हैं। इससे महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली है और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। इसके अलावा, कन्या विवाह सहायता योजना के तहत पात्र बेटियों को 11,000 रुपए की सहायता देने का प्रावधान है। डीएम ने बताया कि इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जिलेभर में अभियान चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र परिवार इस लाभ से वंचित न रहे। कॉक्लियर इम्प्लांट योजना से मूक-बधिर बच्चों को नई जिंदगी मूक-बधिर बच्चों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी योजना उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रही है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की इस पहल के तहत छोटे बच्चों को सुनने और बोलने की क्षमता विकसित करने का अवसर मिल रहा है। यह योजना विशेष रूप से 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के उन बच्चों के लिए है, जो जन्म से या किसी कारणवश सुनने और बोलने में असमर्थ हैं। सरकार प्रत्येक पात्र बच्चे के लिए करीब 6 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देती है, जिससे महंगी कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी संभव हो पाती है। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी प्रतिभा पाल के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी है। जिन परिवारों के लिए इलाज कराना मुश्किल था, उनके बच्चों को अब सामान्य जीवन जीने का अवसर मिल रहा है। धीरे-धीरे बोलने की क्षमता विकसित कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद बच्चे ध्वनियों को पहचानना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे बोलने की क्षमता भी विकसित करने लगते हैं। इससे न केवल बच्चों का जीवन बदल रहा है, बल्कि उनके परिवारों में भी खुशी का माहौल बन रहा है। योजना का लाभ लेने के लिए अभिभावकों को विकास भवन स्थित जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होगा। इसके लिए आयु प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के निर्देश पर प्रशासन ने सभी पात्र परिवारों से इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की है, ताकि बच्चों का भविष्य बेहतर और आत्मनिर्भर बन सके।
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