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    किसान बोले-हमें कॉलेज बनने का भरोसा मिला था:BJP विधायक नंद किशोर गुर्जर के बयान पर धरना दिया, उनके ही इशारे पर हम पीटे गए

    1 hour ago

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    हम तो गांव में कूड़ा प्लांट का विरोध कर रहे हैं। पिछले दो महीने से बैठे हैं। हमें विधायक नंद किशोर गुर्जर ने भरोसा दिया था। उनके ही बयान पर हम धरने पर बैठे। अब उन्होंने ही हमें पिटवा दिया। वह हमारा फोन भी रिसीव नहीं कर रहे हैं। अब चाहे जो हो, इस डंपिंंग ग्राउंड काे गांव से हटवाकर ही मानेंगे। इसकी जगह पर यहां अस्पताल या कुछ और बने।' ये कहना है गाजियाबाद के मीरपुर गांव के उन किसानों का, जिन्हें 15 फरवरी को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। घंटों चले बवाल के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। देर रात छोड़ दिया गया। अब उन ग्रामीणों ने गांव में फिर से धरना शुरू कर दिया है। गांव के लोग पुलिस के रवैये से नाराज हैं। बवाल के दूसरे दिन सोमवार को उसी प्लांट से करीब 700 मीटर की दूरी पर मंदिर परिसर में किसान धरने पर बैठे। दैनिक भास्कर ने मीरपुर गांव पहुंचकर किसानों से मुलाकात की। उनसे कूड़ा निस्तारण केंद्र और उससे जुड़े विवाद पर बात की। पूरी रिपोर्ट पढ़िए… अब पढ़िए किसानों से बातचीत… भास्कर टीम मीरपुर गांव में बन रहे डंपिंग पहुंची, तो वहां गेट बंद मिला। अंदर पीएसी के 2 ट्रक खड़े दिखाई दिए। यहां करीब 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। अंदर करीब 50 कर्मचारी कार्य में लगे हैं। यह प्लांट 120 बीघा जमीन पर पर बनाया जा रहा है। यहां बड़ी-बड़ी मशीनें लग चुकी हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया- इस प्लांट की क्षमता एक दिन में 2000 टन कूड़ा निस्तारण करने की है। जिसमें प्लास्टिक, पन्नी और कचरा को अलग-अलग कर दिया जाएगा। इससे गंदगी नहीं आएगी। बल्कि कूड़े को मशीनों से साफ करेगा। डिग्री कॉलेज का वादा था डंपिंज प्लॉट से निकलकर टीम यहां से 700 मीटर दूर धरनास्थल पर पहुंची। यहां सबसे पहले किसान पवन कुमार से बात की। उन्होंने कहा- हम 2012 से इसका विरोध कर रहे हैं। मीरपुर हमारा गांव है, इससे उस समय सांसद जनरल वीके सिंह ने गोद लिया था। गांव के लोगों से कहा था कि डिग्री कॉलेज और सालिड वेस्ट प्लांट बनेगा। गांवों के लोगों ने सोचा कि कोई अच्छी चीज बनेगी। गांव के लोगों को बहकाया गया। 2 महीने से धरना चल रहा है। हमारी नगर आयुक्त के साथ मीटिंग हुई थी। हमारी मांग थी कि जब तक बातचीत का नतीजा नहीं निकल जाता, तब तक काम बंद रहेगा। लेकिन पिछले गेट से यहां काम चलता रहा। हमारे साथ वादा खिलाफी की गई है। हम भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर के पास गए थे। वह किसानों के पास नहीं आए। वह हमारे प्रतिनिधि हैं, उन्होंने किसानों से कहा- आप इसका विरोध करो, हम अधिकारियों से बात करते हैं, कोशिश करेंगे कि इसे हटवा दें। धरने पर मजबूती से बैठो। लेकिन आज तक विधायक यहां नहीं आए। मुझे लाठियों से पीटा, रात 12 बजे छोड़ा ग्रामीण किसान नीरज ने बताया- यहां एक प्लांट बनाया जा रहा है। इसे डंपिंग ग्राउंड का नाम दिया जा रहा है। ट्रोनिका सिटी यहां एक औद्योगिक शहर है। यहां गांवों की आबादी है। हमारे यहां कूड़े कचरा का सेंटर न बनाया जाए। हम लोग यहां बैठे थे। हम 400 से अधिक किसान थे, मुझे लाठियों से पीटा। आसपास के गांवों के लोग पहुंचे, तो पुलिस वाले प्रेशर में आ गए। मुझे जेल के डालने के लिए ले गए। डासना जेल के बाहर पहुंचकर रात के 12 बजे कहा कि आपके कागज पूरे हो गए, आपको छोड़ा जा रहा है। कूड़ा घर ले जाओ, हॉस्पिटल बनवा दो किसान अरुण त्यागी ने कहा- हमारी एक मांग है कि इस कूड़े घर को उठाकर ले जाओ। यहां मेडिकल कॉलेज बनवा दो, यहां कोई हॉस्पिटल या अन्य चीज बना दो। सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश नहीं है। किसानों ने कोई पथराव नहीं किया है। पुलिस ने वीडियो ग्राफी कराई होगी। वहां पत्थर थे ही नहीं। पुलिस ने ही किसानों पर लाठीचार्ज किया है, लेकिन हम यहां कूड़ाघर बर्दाश्त नहीं करेंगे। पूरे शहर और पूरे जिले का कूड़ा यहां लाया जाएगा, सड़कों पर नरक हो जाएगा। ऐसे तो जीना मुहाल हो जाएगा। विधायक ने ही धरना कराया किसान राकेश ने बताया- पुलिस ने ही ईंट मारीं, हमारी तरफ कोई नहीं आया। किसान यूनियन या हमारा क्षेत्र के अलावा कोई नहीं आया। विधायक ने यह कह दी कि यह बनेगा। विधायक ही बनवा रहा है। विधायक ने ही धरना कराया है। सारा काम इन्होंने कराया है, बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। विधायक नंदकिशोर हमारा फोन तक नहीं उठाते। हमारे साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। कूड़ाघर बनवा रहे हो, कोठी भी बनवा लो अपना 80 साल के घूलेराम ने कहा- हम गेट पर खड़े थे। एक पुलिसवाला आया कि बाबा जी हटो, गिर जाओगे, मर जाओगे। इतने में लाठी मारनी शुरू कर दीं। पता नहीं कितनों को पीटा है। गेहूं के खेत में गिराकर पीटा है। मैंने कहा कि हम मरने को आए ही हैं। मुझे भी मारा-पीटा, मैं गेट पर गिरा था। गांव के लड़कों के फोन में घटना का वीडियो है। पुलिस ने सबको पीटा है। हम तो बर्बाद हो जाएंगे। जब यहां कूड़ा घर बना रहे हैं तो अपनी कोठी भी बना लो। अधिकारी यहां अपनी कोठी बनाकर रहें। या तो कॉलेज बनाएं या खेल मैदान बनवाएं। लेकिन हम कूड़ा घर नहीं बनने देंगे। अब पढ़िए लाठीचार्ज की घटना… विरोध में धरना दे रहे थे ग्रामीण, पुलिस पहुंची तो बवाल हुआ गाजियाबाद में डंपिंग ग्राउंड को लेकर रविवार को बवाल हो गया। ट्रॉनिका सिटी में बन रहे डंपिंग ग्राउंड का किसान 2 महीने से विरोध कर रहे थे। इसी बीच प्रदर्शन कर रहे किसानों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। पुलिस उनको जबरिया हटाने लगी और गाड़ियों में भरना शुरू किया, तो किसान उग्र हो गए। इस पर गुस्साई भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसमें कई महिलाएं और बुजुर्ग घायल हो गए। एक बुजुर्ग महिला तो बेहोश हो गई। गांववालों का दावा है कि करीब 25 लोग घायल हुए हैं। एक महिला के सिर में गंभीर चोट लगी है, वहीं एक ग्रामीण का कूल्हा टूट गया। किसानों का कहना है कि हम सिर्फ अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। यहां डंपिंग ग्राउंड बनने से पूरे इलाके में बदबू फैलती है। लोग बीमार होते हैं। इस जमीन पर स्कूल या अस्पताल बनाया जाना चाहिए, न कि कूड़ाघर। मामला ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र का है। वहीं, ACP लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया- पुलिस की तरफ से लाठीचार्ज नहीं किया गया। केवल हल्का बल प्रयोग किया गया है। घटना वाले दिन की 2 तस्वीर देखिए… किसान डंपिंग ग्राउंड का कर रहे विरोध मीरपुर हिंदू गांव में डंपिंग ग्राउंड बना है। इसके विरोध में किसान और ग्रामीण धरना दे रहे थे। इसी बीच वहां पहुंची पुलिस से उनकी नोकझोंक हो गई। स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। इसमें कई किसान, महिलाएं और बुजुर्ग घायल हो गए। गांववालों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे। अचानक पुलिस ने लोगों को जबरन गाड़ियों में बैठाना शुरू कर दिया। जब महिलाओं ने इसका विरोध किया, तो उन पर भी लाठियां चलाई गईं। वहीं, ACP लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि पुलिस की तरफ से लाठीचार्ज नहीं हुआ है। केवल हल्का बल प्रयोग किया गया है। अब जानिए कूड़ा निस्तारण केंद्र से जुड़ जानकारी… सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिलान्यास किया था गाजियाबाद के मीरपुर में सॉलिड वेस्ट मैंनेजमेंट योजना के तहत डंपिंग ग्राउंड बना है। 1728 लाख रुपये की लागतसे प्लांट का शिलान्यास 12 दिसंबर 2020 को हुआ था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसकी नींव रखी थी। उनके साथ भाजपा के तत्कालीन सांसद जनरल वीके सिंह भी रहे थे। उस समय अजय शंकर पांडे गाजियाबाद के डीएम और अस्मिता लाल मुख्य विकास अधिकारी थे। ग्रामीणों को इस डंपिंग ग्राउंड पर ऐतराज है। वह इसका लगातार विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कूड़ा निस्तारण केंद्र से बदबू फैलती है। लोग बीमार होते हैं। इस जमीन पर स्कूल या अस्पताल बनाया जाना चाहिए, न कि कूड़ाघर। ----------- यह खबर भी पढ़िए… गाजियाबाद में किसानों पर पुलिस ने बरसाईं लाठियां:खेतों में दौड़ाकर पीटा, गुस्साई भीड़ ने भी पत्थर मारे; डंपिंग ग्राउंड का विरोध कर रहे थे गाजियाबाद में डंपिंग ग्राउंड को लेकर रविवार को बवाल हो गया। ट्रॉनिका सिटी में बन रहे डंपिंग ग्राउंड का किसान विरोध कर रहे थे। इसी बीच प्रदर्शन कर रहे किसानों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। पुलिस उनको जबरिया हटाने लगी और गाड़ियों में भरना शुरू किया, तो किसान उग्र हो गए। इस पर गुस्साई भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसमें कई महिलाएं और बुजुर्ग घायल हो गए।पूरी खबर पढ़ें
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