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    काशी में 259 साल से नहीं मां दुर्गा का विसर्जन:विसर्जन के लिए उठाई तो नहीं हिली प्रतिमा, 1767 में हुई थी स्थापना

    6 hours ago

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    काशी के पांडेय महल स्थित पुरानी दुर्गाबाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमा 259 साल से स्थापित है। यहां मां की प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जाता। माता की सेवा कर रही 7वीं पीढ़ी बताती है कि वर्ष 1767 में दुर्गा पूजा के बाद विजयादशमी पर जब प्रतिमा को विसर्जन के लिए उठाने की कोशिश की गई, तो वह अपनी जगह से नहीं हिली। इसके बाद मुखर्जी परिवार के मुखिया को रात में सपने में मां ने इसी स्थान पर रहने का संदेश दिया। तभी से मां दुर्गा यहां विराजमान हैं। मुखर्जी परिवार का कहना है कि सातवीं पीढ़ी भी मां की सेवा में जुटी है। यहां मां को गुड़ और चने का भोग लगाया जाता है। विसर्जन के लिए उठाई तो नहीं हिली प्रतिमा मुखर्जी परिवार की सोनाली मुखर्जी ने बताया कि उनके पूर्वज काली प्रसन्न मुखर्जी ने मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की थी। पूजा के बाद विजयादशमी पर प्रतिमा को विसर्जन के लिए उठाने की कोशिश की गई, लेकिन वह नहीं हिली। परिवार ने काफी प्रयास किया, फिर भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं उठी। परिवार के मुताबिक, उसी रात मुखर्जी परिवार के मुखिया को सपना आया। मां ने संदेश दिया कि वह काशी में ही रहना चाहती हैं। परिवार ने शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया। अगले दिन एकादशी पर दोबारा प्रतिमा उठाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह फिर नहीं हिली। परिवार इसे मां की यहीं विराजमान रहने की इच्छा से जोड़ता है। मां ने कहा- मुझे सिर्फ गुड़ और चना चाहिए सोनाली मुखर्जी के अनुसार, सपने में परिवार के मुखिया ने मां से कहा कि वह इतने सामर्थ्यवान नहीं हैं कि उनकी विशेष सेवा कर सकें। इस पर मां ने गुड़ और चने का भोग लगाने की बात कही। परिवार के मुताबिक, तभी से यहां मां को गुड़ और चना अर्पित किया जाता है। मिट्टी, घास और फूस से बनी है प्रतिमा पुरानी दुर्गाबाड़ी में लगे सूचना बोर्ड के अनुसार, मां दुर्गा की प्रतिमा पारंपरिक सामग्री से बनाई गई है। इसमें मिट्टी, घास, बांस और सूतली का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जाता। परिवार इसकी देखभाल और रंगाई-पुताई करता है, जबकि पूजा की विधि पुरोहितों के माध्यम से पूरी की जाती है। सातवीं पीढ़ी कर रही मां की सेवा मुखर्जी परिवार का कहना है कि उनकी सातवीं पीढ़ी मां दुर्गा की सेवा कर रही है। परिवार के सदस्य प्रतिमा की देखभाल करते हैं, लेकिन उसे स्पर्श नहीं करते। पूजा और धार्मिक विधि-विधान के लिए पुरोहित आते हैं, जिनका परिवार से पीढ़ियों पुराना जुड़ाव है। नवरात्र में यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। सालभर भी लोग मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। भगवान विष्णु की प्रतिमा भी 1000 साल पुरानी मां दुर्गा की प्रतिमा के दाहिनी ओर काले पत्थर से बनी भगवान विष्णु यानी श्रीनारायण की प्रतिमा भी स्थापित है। इसे 11वीं सदी का बताया गया है। मुखर्जी परिवार के मुताबिक, उनके पुराने घर के नीचे से कई शिवलिंग भी मिले थे, जिन्हें परिसर में स्थापित किया गया है। पुरानी दुर्गाबाड़ी में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा और उससे जुड़ी मान्यताएं इस स्थान को काशी की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में शामिल करती हैं। परिवार पीढ़ियों से चली आ रही पूजा-पद्धति को आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभा रहा है।
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