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    काशी में घरों के दरवाजों पर जलाए जा रहे शव:84 घाट डूबे, 5 हजार दुकानें बंद; 15 दिन में 3.75 करोड़ का नुकसान

    1 day ago

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    काशी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से 84 घाट डूब गए हैं। महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट भी डूबे हैं। घाट किनारे 100 से ज्यादा मंदिर आधे से ज्यादा डूब चुके हैं। दैनिक भास्कर ने हालात की पड़ताल की, तो 2 बड़ी परेशानी सामने आईं। पहली- घाट से करीब 15 फीट ऊपर छत पर शवों को जलाया जा रहा। हरिश्चंद्र घाट के सामने गलियों में लोगों के दरवाजों पर अंतिम संस्कार हो रहा है। इससे लोगों के घर काले पड़ गए हैं। कई लोगों ने तो मजबूरन अपने दरवाजे पक्की ईंट लगाकर बंद कर दिए हैं। घर का मेन गेट दूसरी तरफ कर लिया है। दूसरी- घाट किनारे की करीब 5 हजार दुकानें हटानी पड़ीं। छोटी-बड़ी करीब 3 हजार नावों का संचालन रोक दिया गया है। अगर 5 हजार दुकानों में बाढ़ के कारण औसतन सिर्फ 500 रुपए रोज की बिक्री मानें और ये स्थिति 15 दिन रहती है, तो 3.75 करोड़ का कारोबार प्रभावित होगा। हमने ऐसे कई दुकानदार से बात की, उन्होंने कहा- अगस्त से अक्टूबर तक हर साल उन्हें इसी संकट से गुजरना पड़ता है। बाढ़ के हालातों की रिपोर्ट… पहले जहां 50 शव जलते थे, अब 10 ही जल रहे जहां सामान्य दिनों में एक साथ 50 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार होता था, वहीं अब केवल 8 से 10 चिताएं ही एक साथ जल पा रही हैं। डोम समाज के मुताबिक, शवदाह के लिए 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। दूर-दराज से शव लेकर पहुंचे परिजन घाट पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। डोम परिवार के ऋषिकेश चौधरी बताते हैं- बाढ़ का पानी बढ़ने से सिर्फ अंतिम संस्कार की जगह ही कम नहीं हुई है, लकड़ियां रखने की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। निचले हिस्से में रखी लकड़ियां गीली हो रही हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए ऊपरी हिस्सों में ले जाना पड़ रहा है। इससे घाट की संकरी गलियों और छतों पर भी जगह कम पड़ रही है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शवदाह से बढ़ीं लोगों की मुश्किलें हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह कराने वाले नन्हे चौधरी ने बताया कि मजबूरी में गलियों में शवों का अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। शव लेकर आने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और बाढ़ के बीच गंदगी से स्थिति और खराब हो गई है। नगर निगम की ओर से नियमित सफाई नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। गलियों में बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। शौचालय की सुविधा भी नहीं होने से लोगों को सड़क की ओर जाना पड़ रहा है। बारिश होने पर लोग खुले में भीगने को मजबूर होते हैं। घाट किनारे दुकान लगाने वालों ने क्या कहा, आगे पढ़िए अस्सी घाट के दुकानदार बोले- बच्चों की फीस कैसे भरेंगे? घाट से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, काशी के 84 घाटों पर छोटी-बड़ी करीब 5 हजार दुकानें और घूमकर सामान बेचने वाले लोग रोज कमाते हैं। इनमें चाय-पानी, पूजा सामग्री, फूल-माला, खानपान, खिलौने और पर्यटकों को जरूरत का सामान बेचने वाले लोग शामिल हैं। अस्सी घाट पर फूल माला की दुकान लगाने वाले अरविंद ने कहा- अब काम बंद है, तो पहली चिंता बच्चों की पढ़ाई की है। हम रोज कमाने वाले लोग हैं, लेकिन अब घर का खर्च कैसे चलेगा? बच्चों के स्कूल में फीस देनी है। स्कूल वालों से हम लोगों ने समय मांगा है। 70 साल के गोपाल ने घाट से हटकर गली में लगाई दुकान 70 साल के गोपाल डमरू, मोतियों की माला, पूजा के सामान वगैरह बेचते हैं। कई साल से घाट पर दुकान लगाते आ रहे हैं। गंगा का पानी बढ़ा, तो घाट से दुकान हटानी पड़ी। अब गली में छोटी-सी दुकान शुरू की है। वह कहते हैं- हम लोग कई साल से दुकान लगा रहे हैं। 3 महीने हम लोगों के लिए काफी संकट के होते हैं, क्योंकि दुकान नहीं लगा पाते। गली में ग्राहक कम आते हैं। उतनी खरीदारी नहीं हो रही। चाय-मैगी की दुकान करने वाले टिंकू ने कहा- कमाई बंद होने के बावजूद खर्च नहीं रुकता। घर का राशन, बिजली, बच्चों की फीस और रोज की जरुरतें पहले की तरह बनी हैं। एक-दो दिन दुकान बंद हो तो किसी तरह गुजारा हो सकता है। लेकिन, जब यही स्थिति कई हफ्तों तक चले, तो बचत खत्म होने लगती है। फूल-माला की दुकान लगाकर चलाते हैं 10 लोगों का खर्च घाट पर फूल-माला की दुकान लगाने वाली फूलवासी बाढ़ के कारण अब सड़क किनारे अपनी छोटी-सी दुकान लगाकर परिवार का गुजारा कर रही हैं। उनका कहना है कि अभी जलस्तर सड़क तक नहीं पहुंचा है। लेकिन, अगर पानी सड़क तक आ गया तो यह दुकान भी बंद करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि जब घाट पर दुकान लगती थी, तब रोज की 500 रुपए से ज्यादा की बचत हो जाती थी, लेकिन अब आमदनी काफी कम हो गई है। फूलवासी के परिवार में कुल 10 लोग हैं। परिवार के कुछ सदस्य दूसरे काम करते हैं। जबकि, ज्यादातर लोग घाट पर दुकान चलाने में सहयोग करते हैं। बाढ़ की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ता है। नाविकों की 3 हजार नावें खड़ीं, कमाई बंद प्रशासन ने नाव संचालन पर 10 अगस्त से रोक लगा दी है। नाविक अज्जू कहते हैं कि 3 महीने तक हम लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं। पूरे 84 घाट पर लगभग 40 हजार नाविकों का परिवार है। करीब 3 हजार नावें गंगा में चलती हैं, लेकिन अब बाढ़ आ जाने के कारण बड़ी दिक्कत हो रही है। हमारी नावों पर काम करने वाले कर्मचारी हैं, उन्हें भी हम सैलरी नहीं दे पा रहे हैं। नाविकों को डर है कि पानी का बहाव तेज होने पर नाव की रस्सी खुली तो नाव बह सकती है। रात में भी नाव की रखवाली करनी पड़ रही है। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 2.04 मीटर नीचे केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, राजघाट गेज पर मंगलवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 68.22 मीटर रहा। जलस्तर फिलहाल 2 सेंटीमीटर हर घंटे की रफ्तार से घट रहा है। यहां गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। मौजूदा जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 2.04 मीटर नीचे है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए- काशी में 15 घंटे बारिश, अस्पताल-घरों में घुसा पानी: BHU में मरीज को कंधे पर लादकर पहुंचे लोग पूर्वी यूपी में लगातार हो रही मानसूनी बारिश से हालात बिगड़ने लगे हैं। मंगलवार सुबह से लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, झांसी, जौनपुर और प्रतापगढ़ समेत 25 शहरों में रुक-रुक कर तेज बारिश हो रही है। आसमान में घने काले बादल छाए हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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