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    काशी में पंचक्रोशी परिक्रमा की हुई शुरूआत:2 लाख शिवभक्त 80KM चलेंगे पैदल, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा गंगा घाट

    5 hours ago

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    महाशिवरात्रि पर 24 घंटे में पूरी की जाने वाली पंचक्रोशी यात्रा शनिवार की शाम आरंभ हो गई। मणिकर्णिका घाट स्थित चक्रपुष्कर्णी कुंड और गंगा में स्नान कर हजारों नर नारियों ने यात्रा का संकल्प लिया। ये भक्त अगले 24 घंटे में काशी की शास्त्रीय सीमा की परिक्रमा पूरी करेंगे।परंपरानुसार यात्रा पूर्ण होने पर मणिकर्णिका घाट पर ही संकल्प छोड़ कर यात्रा पूर्ण करेंगे। ‘हर-हर महादेव, ‘बोल बम और ‘जय शंकर का घोष करते हजारों नर-नारी सूर्यास्त के बाद से ही यात्रा पथ पर रवाना हुए। यदुवंशी परिवारों का पंचक्रोशी परिक्रमा के प्रति विशेष समर्पण इस बार भी दिखा। गंगा घाट से होते हुए यह सभी श्रद्धालु जब निकले तो हर कोई उनकी सेवा भाव करते हुए दिखाई दिया पुलिस प्रशासन भी चौराहे पर मुस्तैद है। पंचक्रोशी यात्रा में है पांच पड़ाव पंचक्रोशी यात्री का पहला पड़ाव कर्दमेश्वर है जिसके बाद श्रद्धालु दूसरे पड़ाव भीमचंडी पहुंचेंगे। भीमचंडी के बाद तीसरे पड़ाव भीमचंडी रामेश्वर और फिर वहां से शिवपुर जाने के बाद यात्रा के अंतिम पड़ाव कपिलधारा जाएंगे। कपिलधारा से दोबारा मणिकर्णिका घाट पर जाकर यात्रा समाप्त होगी। संकल्प लेकर शुरू हुई यात्रा श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पास ज्ञानवापी से संकल्प लेने के बाद पंचक्रोशी यात्रा शुरू करने की परंपरा है। श्रद्धालु कूपजल लेकर यात्रा का संकल्प लेते थे लेकिन धाम बनने के बाद यात्रा मणिकर्णिका घाट से ही शुरू होने लगी है। महाशिवरात्रि के एक दिन पूर्व पंचक्रोशी यात्रा का आरंभ जिस मणिकर्णिका कुंड से हुआ, कहा जाता है कि यह गंगा से भी प्राचीन है। यदि मन में कोई इच्छा होती है तो उसको पूरी करने के लिए पंचक्रोशी यात्रा सबसे उत्तम साधन है। यात्रा से पहले श्रद्धालुओं ने श्रीगणेश की अराधना की। पंचक्रोशी यात्रा में पांच पड़ाव हैं जिनसे गुजरने के लिए श्रद्धालु करीब 50 मील (लगभग 80 किमी) की दूरी तय करेंगे। पौराणिक कथा कहा जाता है कि पंचक्रोशी यात्रा की शुरुआत त्रेता युग से हुई थी। धार्मिक ग्रंथों में पंचक्रोशी यात्रा का बहुत महत्व बताया गया है। त्रेता युग में भगवान राम ने अपने तीनों भाइयों भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न और पत्नी के सीता के साथ काशी में पंचक्रोशी यात्रा की थी। भगवान राम ने स्वयं रामेश्वरम मंदिर में शिवलिंग स्थापित किया था। उन्होंने यह यात्रा अपने पिता राजा दशरथ को श्रवण कुमार के माता-पिता के श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए की थी। दूसरी बार पंचक्रोशी परिक्रमा श्रीराम ने तब की थी, जब रावण वध करने से उन पर ब्रह्म हत्या का दोष लगा था। उस दोष से मुक्ति के लिए प्रभु ने पत्नी सीता एवं भाई लक्ष्मण के साथ परिक्रमा की थी। द्वापर युग में पांडवों ने अज्ञावास के दौरान ये यात्रा द्रौपदी के साथ की थी।
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