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    कुशीनगर में यूपी बोर्ड परीक्षा के 700 आवेदन निरस्त:फीस लेकर फॉर्म अधूरे छोड़े, जिम्मेदारों पर FIR के आदेश

    14 hours ago

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    कुशीनगर में यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए इंटरमीडिएट के करीब 700 छात्रों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। फीस लेने के बावजूद फॉर्म अधूरे छोड़ने और गंभीर अनियमितताओं के आरोप में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई से सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। इस मुद्दे को लेकर छात्र संगठन एबीवीपी ने पहले विरोध प्रदर्शन भी किया था। समय सीमा और दस्तावेजों में गड़बड़ी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) श्रवण कुमार के अनुसार, पत्राचार पंजीकरण केंद्र संख्या-901, गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज, पडरौना के माध्यम से वर्ष 2026 की इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए 700 छात्रों का पंजीकरण प्रस्तावित था। जांच में पाया गया कि वर्ष 2024 में निर्धारित समय सीमा के भीतर छात्रों का पंजीकरण नहीं कराया गया। 20 सितंबर तक शुल्क जमा नहीं किया गया था और कई आवेदन पत्र आवश्यक प्रमाण-पत्रों के बिना अपूर्ण पाए गए। इसके अलावा, एक वर्षीय और द्विवर्षीय पाठ्यक्रम के अनिवार्य प्रमाण-पत्र भी संलग्न नहीं किए गए थे। जालसाजी के आरोप सबसे गंभीर अनियमितता यह सामने आई कि अनुसरण प्रमाण-पत्रों पर नामित नोडल अधिकारी विकास मणि त्रिपाठी के स्थान पर प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक ने हस्ताक्षर किए थे। साथ ही, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देशों के विपरीत, पत्राचार शिक्षा संस्थान प्रयागराज से अनुमति लिए बिना पुराने क्रमांकों का उपयोग किया गया। इसे प्रथम दृष्टया जालसाजी का मामला माना गया है। अनुक्रमांक फ्रीज, प्रयोगात्मक परीक्षा पर रोक परिषद के निर्देश पर सभी 700 परीक्षार्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। उनके अनुक्रमांक फ्रीज और विलोपित करने का आदेश जारी किया गया है। साथ ही प्रयोगात्मक परीक्षा पर भी रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 की धारा 2(च) और 14 के तहत की जाएगी। आपराधिक मुकदमे और जांच शासन ने नोडल अधिकारी और संबंधित लिपिक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। पत्राचार शिक्षा संस्थान प्रयागराज के अपर शिक्षा निदेशक सी.एल. चौरसिया ने सुसंगत धाराओं में कार्रवाई करने को कहा है। संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है तथा पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय इंटर कॉलेज की भूमिका की भी जांच होगी। मामले में एक और बड़ा सवाल यह है कि प्रति छात्र 5 से 10 हजार रुपये तक फीस वसूले जाने की बात सामने आई है। अनुमानित रूप से यह राशि 35 लाख रुपये से अधिक बैठती है, जबकि जमा रकम आधी से भी कम बताई जा रही है। शेष धनराशि कहां गई, यह जांच का विषय बन गया है। मामला कोर्ट में विचाराधीन जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि छात्रों की परीक्षा से जुड़ा मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेटी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
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