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    कैंट बोर्ड ने बदले ब्रिटिशकालीन बाजारों के नाम:लाल कुर्ती जवाहर नगर, रजबन शिवाजी नगर; नए नाम को मिलेगी पहचान

    15 hours ago

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    छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) की बोर्ड बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। ब्रिगेडियर संजीव कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में अंग्रेजों के जमाने के बाजारों और मोहल्लों के पुराने नामों को हटाकर नए भारतीय नाम प्रभावी रूप से लागू करने का फैसला किया गया। बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि कागजों में कई नाम 1947 में ही बदल दिए गए थे। इनमें रॉयल आर्टिलरी बाजार तोपखाना को सुभाष बाजार, ब्रिटिश इन्फेंट्री लाल कुर्ती को जवाहर नगर और ब्रिटिश केवलरी रजबन को शिवाजी नगर में बदला जा चुका है। हालांकि, ये सभी स्थान आज भी पुराने नामों से ही प्रचलित हैं। अब बोर्ड ने इन क्षेत्रों को नई पहचान देने का निर्णय लिया है। बोर्ड अध्यक्ष के अनुसार, इन क्षेत्रों में आकर्षक होर्डिंग और साइन बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि जनता के बीच नए नामों का प्रचार हो सके और वे प्रचलन में आ सकें। बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। वार्ड संख्या 4, 5, 6, 7, 8 के लिए दो वर्ष का सफाई टेंडर 20 करोड़ 37 लाख रुपये में आगरा की एक फर्म को दिया गया। आर्मी एरिया की सफाई के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने का एक वर्ष का ठेका 13 करोड़ 39 लाख रुपये में स्वीकृत हुआ। कैंट बोर्ड कार्यालय के लिए आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का दो वर्ष का ठेका लखनऊ की क्यू सिक्योरिटीज को 19 करोड़ 10 लाख रुपये में दिया गया। इसके अतिरिक्त, फल तोड़ने का ठेका 24,100 रुपये में, सड़क निर्माण का टेंडर जीत कंस्ट्रक्शन को और कैंट फंड भवनों की मरम्मत हेतु 7 करोड़ रुपये का ठेका देने पर सहमति बनी। वर्षा जल संचयन उपकरणों की मरम्मत के लिए 30 लाख रुपये भी स्वीकृत किए गए। बोर्ड अध्यक्ष ने आबू नाले की सफाई के लिए एक व्यापक चरणबद्ध योजना बनाने का भी निर्देश दिया, ताकि उसकी स्थिति में वास्तविक सुधार हो सके। इसी क्रम में, नमामि गंगे योजना के तहत कंकरखेड़ा डिस्टलरी के पास एक एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए यदि सेना को जमीन देनी पड़ी, तो सेना इसके लिए तैयार है।
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