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    Kerala Assembly Elections 2026 | मैं मुख्यमंत्री पद की रेस में नहीं हूँ, Shashi Tharoor ने साफ की स्थिति, UDF की जीत का जताया भरोसा

    3 hours from now

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    केरल विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं। 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में थरूर ने कहा कि चूंकि वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, इसलिए तकनीकी और नैतिक रूप से वह इस दौड़ से बाहर हैं। थरूर ने लोकतांत्रिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि आदर्श रूप से मुख्यमंत्री का चुनाव निर्वाचित विधायकों के बीच से ही किया जाना चाहिए। जब उनसे उनकी दावेदारी पर सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा: "नहीं, मैं दावेदार नहीं हूँ। इसके कई ठोस कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख यह है कि मैं खुद यह चुनाव नहीं लड़ रहा हूँ। मेरी भूमिका इस बार राज्य में एक टीम प्लेयर और प्रचारक की है।"News Source- Press Trust OF India  उन्होंने कहा कि वह चुनाव प्रचार के लिए ‘राज्य के कोने-कोने में’ जाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। थरूर ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की उस हालिया सलाह का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नीत यूडीएफ गठबंधन के नेताओं से प्रतीकात्मक स्वरूप में ‘‘एक लय-ताल के साथ काम करने’’ को कहा था। थरूर ने कहा कि यह एक ‘‘अच्छा संदेश’’ था, और अब ‘‘हर कोई एक लय-ताल के साथ काम कर रहा है’’। थरूर ने यह भी कहा कि वैसे तो उन्हें केरल में कांग्रेस को बहुमत मिलने पर खुशी होगी, लेकिन 140 सदस्यों वाली विधानसभा में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के लिए 85 से 100 सीटों के बीच का आंकड़ा काफी अच्छा रहेगा। क्रिकेट की शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए थरूर ने कहा कि यूडीएफ, खासकर माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के खिलाफ ‘गुगली’ गेंदें फेंक रहा है, क्योंकि ‘‘वे मुश्किल पिच पर हैं, और हम उन्हें कैच कर सकते हैं’’। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे चुनाव राष्ट्रपति-शैली के अधिक होते जा रहे हैं, वह व्यक्तिगत रूप से चुनावों से पहले मुख्यमंत्री के संभावित चेहरे को सामने रखने के पक्ष में हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि केरल में कांग्रेस के पास यह क्षमता है कि वह किसी एक व्यक्ति या नाम के बजाय, एक एजेंडे, एक मिशन और पार्टी के चुनाव चिह्न के आधार पर भी अच्छे चुनावी नतीजे दे सकती है। जब पूछा गया कि क्या चुनाव प्रचार में कोई चेहरा न होने से एलडीएफ के मुकाबले कांग्रेस की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है क्योंकि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के रूप में एक चेहरा है, इस पर थरूर ने कहा, ‘‘निजी तौर पर, मैं आपकी बात से सहमत हूं; मेरा मतलब है कि हम वह रास्ता अपना सकते थे, लेकिन जैसा कि पार्टी नेतृत्व ने मुझे बताया, कांग्रेस ने पहले कभी ऐसा नहीं किया है।’’ थरूर ने कहा, ‘‘उन्होंने यह तरीका अपनाया है कि चुनाव पार्टी के लिए होता है, और एक बार जब पार्टी जीत जाती है, तो वह अपना नेता चुनती है। इसका असल मतलब यह है कि आलाकमान, चुने हुए विधायकों से सलाह-मशविरा करने के बाद, नेता का चुनाव करेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस की राज्य में बहुत गहरी पैठ है। पूरे केरल में उसकी बात को बहुत गंभीरता से सुना जाता है। हर मोहल्ले, हर गांव और हर वार्ड में उसकी मौजूदगी है। इसी वजह से कांग्रेस के पास यह क्षमता है कि वह किसी एक व्यक्ति के चेहरे या नाम के बजाय, एक एजेंडे, एक मिशन और पार्टी के चुनाव-चिह्न के आधार पर भी अच्छे नतीजे दे सकती है।’’ थरूर ने कहा कि जरूरी नहीं कि हर जगह यही सिद्धांत अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि अब जैसे असम में साफ तौर पर गौरव गोगोई पार्टी का चेहरा हैं, वहीं दूसरे राज्यों में भी इस तरह के नेता हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन केरल में हम इसी तरह (बिना चेहरा घोषित किए) लड़ने जा रहे हैं और केरल में हमारी मजबूती की वजह से मुझे लगता है कि यह एक ऐसा राज्य है जहां हम संभवत: इसी तरह जीतेंगे।’’ जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या वह मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार हैं, तो थरूर ने कहा, ‘‘नहीं, मैं नहीं हूं। इसके कई अच्छे कारण हैं, जिनमें यह बात भी शामिल है कि मैं खुद चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। मेरा मानना ​​है कि आदर्श रूप से मुख्यमंत्री का चुनाव निर्वाचित विधायकों में से ही किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने राज्य में मतदान कार्यक्रम के संदर्भ में कहा, ‘‘यह काफी चौंकाने वाली बात है कि मतदान 9 अप्रैल को हो रहा है, खासकर तब जब इसकी घोषणा खुद 15 मार्च को काफी देर से हुई थी। मूल रूप से, निर्वाचन आयोग ने हमें प्रचार के लिए लगभग तीन हफ्ते दिए हैं। ज़्यादातर पार्टियों ने तो अभी तक अपने सभी उम्मीदवारों के नाम भी घोषित नहीं किए हैं। नामांकन सोमवार तक जमा होने हैं और अचानक, ये उम्मीदवार 9 अप्रैल को मतदाताओं का सामना करने वाले हैं।’’इसे भी पढ़ें: Kerala Politics Explained: 'लाल किले' में BJP की बड़ी सेंध, जानें Vote Share से लेकर पहली जीत तक की पूरी कहानी थरूर ने आरोप लगाया कि देखने में ऐसा लगता है कि यह सब जान-बूझकर केरल में माकपा, असम में भाजपा और पुडुचेरी में स्थानीय पार्टी की मौजूदा सरकारों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है; ये ही वे तीन राज्य हैं जहां 9 अप्रैल को मतदान होना है। केरल विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की जीत का भरोसा जताते हुए थरूर ने कहा कि एलडीएफ सरकार के खिलाफ 10 साल की सत्ता-विरोधी लहर है। उन्होंने कहा, ‘‘उसकी ज़बरदस्त नाकामियां, आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार के घोटाले और हर तरह की समस्याएं हैं, जिनकी वजह से मतदाता मौजूदा सरकार से विमुख हो गए हैं।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या कुछ हफ्ते पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से हुई मुलाकात के बाद उनके सभी मसले सुलझ गए हैं, थरूर ने कहा, ‘‘मेरे मसले मूल रूप से राज्य के लिए कोई मायने नहीं रखते। मैं राज्य चुनाव में उम्मीदवार नहीं हूं। यह अधिकतर एक टीम के तौर पर मिलकर काम करने का सवाल था और मैं इस टीम का पूरी तरह से हिस्सा हूं।इसे भी पढ़ें: World Cup जीत के बाद Ajit Agarkar का पावर-प्ले, क्या BCCI मानेगा Chief Selector का एक्सटेंशन प्लान? असल में, मैं प्रचार समिति का सह-अध्यक्ष हूं।’’ इन चुनावों में अपनी भूमिका के बारे में थरूर ने कहा, ‘‘मैं संसद सत्र में हिस्सा लेते हुए भी प्रचार समिति में दूसरे सदस्यों के साथ नियमित ऑनलाइन बैठकों में शामिल हो रहा हूं। मैं संसद सत्र के आखिरी कुछ हफ्ते छोड़कर केरल जा रहा हूं।’’ उन्होंने कहा कि वह मतदान तक वहीं रहेंगे और राज्य के सभी 14 जिलों में उनके प्रवास की संभावना है। राहुल गांधी की हालिया केरल यात्रा को अच्छा बताते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने तिरुवनंतपुरम में यादगार भाषण दिया था।News Source- Press Trust OF India 
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