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    लोकसभा में अफजाल अंसारी ने श्रम संहिता पर उठाए सवाल:कहा- मजदूर देश की नींव, सरकार की नीतियों पर किया हमला

    14 hours ago

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    गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी ने लोकसभा सत्र के दौरान देश और विदेश में कार्यरत मजदूरों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार द्वारा श्रम संहिता में किए गए 'ऐतिहासिक सुधारों' के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पांच साल के भीतर ही इसमें संशोधन और निरस्तीकरण की नौबत आ गई है। अंसारी ने आरोप लगाया कि जल्दबाजी में बनाए गए कानूनों की खामियां अब सामने आ रही हैं, जिससे मजदूरों का सरकार पर भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने बताया कि देश के लगभग 90 प्रतिशत मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जबकि संगठित क्षेत्र के श्रमिकों की स्थिति भी सुरक्षित नहीं है। सांसद के अनुसार, संशोधन विधेयक के जरिए उद्योगों को छूट दी जा रही है, जबकि मजदूरों की सुरक्षा और अधिकार सीमित किए जा रहे हैं। उन्होंने 300 तक कर्मचारियों वाली इकाइयों में बिना अनुमति छंटनी के प्रावधान और हड़ताल पर कड़े नियमों को मजदूरों की आवाज दबाने जैसा बताया। कोविड-19 महामारी के दौरान मजदूरों के पलायन का जिक्र करते हुए अफजाल अंसारी ने कहा कि जब उन्हें सबसे अधिक सहारे की जरूरत थी, तब वे पलायन को मजबूर हुए। उन्होंने श्रम नीति को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रश्न बताया। शायराना अंदाज में उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा, “यह संसद है, यहां वादों की खेती लहलहाती है, बजट में खूबसूरत शब्दों के मोती सजाती है। वहां फुटपाथ पर मजदूर की तकदीर सोती है, और यहां कागज में जन्नत रोज तामीर होती है।” अंसारी ने उत्तर प्रदेश और बिहार से बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में इजराइल, रूस और यूक्रेन जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों तक जाने को मजबूर हैं। अंत में उन्होंने सरकार से आग्रह करते हुए कहा, “ये हैं बुनियाद के पत्थर, इन्हें न छेड़ो तुम, ये हटेंगे तो इमारत की दरक जाएगी।” उन्होंने मांग की कि श्रम कानूनों में संशोधन करते समय मजदूरों के हित और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
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