Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    ‘लखनऊ का चाट और कबाब सबसे ज्यादा पसंद’:एक्ट्रेस आहाना कुमरा बोलीं- पवन सिंह के फैन्स से मिल रहा प्यार

    9 hours ago

    1

    0

    ‘मैं लखनऊ को बहुत ही नॉस्टैल्जिक नजरिये से देखती हूं, क्योंकि मेरा पूरा बचपन यहीं बीता है। मैंने इस शहर का पुराना दौर भी देखा है और नया भी। जब भी मैं यहां आती हूं, तो थोड़ा शॉक लगता है कि यह बदलाव कब आया। यह नई जगह कब खुल गई? लेकिन फिर यह भी महसूस होता है कि लखनऊ अब छोटा शहर नहीं रहा और न ही कभी रहेगा। ’ यह कहना है फिल्म लिपस्टिक अंडर माय बुर्का से फेम हासिल करने वाली आहाना कुमरा का। वे लखनऊ की रहने वाली हैं। हाल ही में आहाना लखनऊ में एक कार्यक्रम में शामिल होने आईं। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपनी जिंदगी, करियर के बारें में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में लगातार स्ट्रगल करते रहना पड़ता है। पवन सिंह के फैंस से खूब प्यार मिल रहा है। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: आप लखनऊ से हैं, तो खासकर लखनऊ को किस नजरिये से देखती हैं? जवाब: मैं अब यह बड़े महानगरों को टक्कर दे रहा है। यहां बड़ी-बड़ी फिल्मों की शूटिंग होती है, जिसे देखकर वाकई खुशी होती है। सवाल: खासकर लखनऊ में आपको क्या पसंद है? जवाब: यहां का खाना और शॉपिंग। सवाल: किस तरह का खाना आप ज्यादा पसंद करती हैं? जवाब: यहां का स्वाद मुझे बहुत पसंद है। असल में, मेरे कई दोस्तों ने तो एक लिस्ट बना रखी है। वे कहते हैं- 'अहाना, जब तुम लखनऊ जाओगी, तो हम भी तुम्हारे साथ चलेंगे क्योंकि हमें वहां की चाट, टुंडे कबाब, बिरयानी और यहां तक कि इंडियन-चाइनीज भी खाना है।' तो मैं उनसे कहती हूं-'तुम लोग साथ आओ तो सही, तुम्हें दिखाएंगे कि असली खातिरदारी और मेहमान-नवाजी क्या होती है।' सवाल: आजकल एक्टर्स के चेहरे और आवाज का AI के जरिए गलत इस्तेमाल हो रहा है। क्या एक्टर्स को अपनी 'डिजिटल प्राइवेसी' को लेकर जागरूक होने की जरूरत है? जवाब: बिल्कुल! डिजिटल प्राइवेसी की आज बहुत ज्यादा जरूरत है। जैसे-जैसे वक्त बदल रहा है, हमें तकनीक के साथ अपने नियमों और रेगुलेशंस को भी अपडेट करना होगा। अगर कोई हमारी तस्वीरों या वीडियो का गलत इस्तेमाल करता है, तो उसका सीधा प्रभाव हम पर पड़ता है। मुझे लगता है कि सरकार को इस दिशा में कड़े कानून और रेगुलेशंस बनाने चाहिए। सवाल: हाल ही में पवन सिंह के फैन्स द्वारा आपको धमकियाँ मिली थीं, इस पर आप क्या कहेंगी? जवाब: अब मुझे उनके प्रशंसकों से बहुत प्यार मिल रहा है। कल रात भी जब मैं एकाना गई थी, तो मुझे उनके कई फैन्स मिले। कल मैच देखते वक्त मैंने उनके गानों पर डांस भी किया। मुझे लगता है कि अब वे मुझे बहुत पसंद करते हैं। मैं उन सभी को इस प्यार के लिए धन्यवाद कहना चाहूंगी। सवाल: वरुण धवन और कई अन्य एक्टर्स पर 'फेक रिव्यू' और 'पेड पीआर' के जरिए फिल्म को हिट दिखाने के आरोप लगते रहे हैं। जवाब: मुझे नहीं लगता कि आप दर्शकों को धोखा दे सकते हैं। अगर दर्शकों को कोई चीज पसंद नहीं आएगी, तो वे उसे देखने नहीं जाएंगे। लोग अपने पैसे खर्च करने को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं, आप उन्हें 'उल्लू' नहीं बना सकते। यह फेक पीआर लंबे समय तक नहीं टिकता; एक-दो हफ्तों में ही इसकी असलियत सामने आ जाती है। सवाल: आजकल फिल्मों और स्टार्स को किसी न किसी राजनीतिक विचारधारा से जोड़ दिया जाता है। क्या एक कलाकार के लिए 'न्यूट्रल' रहना नामुमकिन हो गया है? जवाब: मुझे लगता है कि यह थोड़ा मुश्किल जरूर हो गया है, लेकिन आप इसे मुमकिन बना सकते हैं। अगर आप स्पष्ट रहें कि आपकी व्यक्तिगत राय कुछ भी हो, काम अलग है। हालांकि, मैंने देखा है कि बॉलीवुड में अब चलन बदल गया है। फिर भी कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं होता। बतौर एक्टर आपकी अपनी ओपिनियन (राय) होनी चाहिए, लेकिन काम के बीच उसे लाना जरूरी नहीं है। सवाल: 'कंटेंट इंडिया 2026' जैसे मंचों पर वेब स्टोरीटेलिंग की काफी चर्चा होती है। क्या OTT पर बढ़ती सेंसरशिप की मांग क्रिएटिव फ्रीडम का गला घोंट रही है? जवाब: मुझे नहीं लगता कि इससे बहुत ज्यादा फर्क पड़ रहा है। वॉयलेंस, आइटम सॉन्ग्स या गाली-गलौज अब भी कंटेंट का हिस्सा हैं। मैंने सेंसरशिप के आने के बाद भी कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा है। वैसे भी, अगर किसी को लगता है कि वे सेंसरशिप से क्रिएटिविटी को दबा देंगे, तो मेकर्स अपनी बात कहने का कोई न कोई नया तरीका ढूंढ ही लेंगे। सवाल: 'धुरंधर' जैसी फिल्मों की सफलता के बाद चर्चा है कि बॉलीवुड अपनी मौलिकता खो रहा है और रीमेक या साउथ के फॉर्मूले पर निर्भर है। इस पर आपकी क्या राय है? जवाब: पहली बात तो यह कि 'धुरंधर' कोई रीमेक नहीं है, यह एक ओरिजिनल कहानी है। जहां तक रीमेक की बात है, तो हमने देखा है कि बॉलीवुड में रीमेक अक्सर उतनी अच्छी तरह नहीं चलते। बहुत कम फिल्में ही कामयाब हो पाती हैं। असल में, कहानी जिस भाषा की मिट्टी से निकलती है, वह उसी में सबसे अच्छी लगती है। हमारी भाषा हिंदी है, तो हमें हिंदी की मौलिक कहानियां कहनी चाहिए। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अगर आप सेट पर अंग्रेजी में बात करेंगे, तो आप एक जुड़ाव वाली हिंदी फिल्म नहीं बना सकते। बांद्रा के कैफे में बैठकर जो फिल्में लिखी जाती हैं, वे देश के दूसरे कोनों तक नहीं पहुंच पातीं। आपको 'भारत' के बारे में सोचना होगा। क्या आपकी कहानी जमीन से जुड़ी है? क्या छोटे और बड़े शहर के लोग उससे 'आइडेंटिफाई' (जुड़ाव महसूस) कर पा रहे हैं? रीमेक का यह ट्रेंड जल्द ही खत्म होने वाला है, क्योंकि दर्शक अब दूसरी भाषाओं की घिसी-पिटी कहानियों को नकार रहे हैं। सवाल: आपने 'माय नेम इज खान' में क्रेडिट न मिलने का जिक्र किया था। इंडस्ट्री में छोटे कलाकारों के साथ यह भेदभाव क्यों नहीं बदल रहा? जवाब: मैं बस उम्मीद करती हूं कि यह बदल जाए। आप इसी उम्मीद के साथ इस इंडस्ट्री में काम करते हैं। जैसा कि मैंने कहा, कोई आपका क्रेडिट बहुत दिनों तक नहीं छुपा सकता। अगर आप अपने काम में माहिर हैं, तो देर-सवेर आपको आपकी मेहनत का श्रेय जरूर मिलता है। सवाल: सोशल मीडिया ट्रोल्स पर आपकी क्या प्रतिक्रिया रहती है? जवाब: सच कहूं तो, ट्रोल्स के बारे में मेरी कोई राय नहीं है। जैसे उनकी नजर में मेरी बातें मायने नहीं रखतीं, वैसे ही मेरे लिए उनकी ओपिनियन मैटर नहीं करती। सवाल: दर्शकों के लिए आपकी कोई आने वाली फिल्म या सीरीज? जवाब: मैं जल्द ही कुछ नया शुरू करने वाली हूँ, लेकिन उसकी आधिकारिक घोषणा होने तक आपको थोड़ा इंतजार करना होगा। सवाल: आपको किस तरह के कपड़े या साड़ियां पसंद हैं? जवाब: मुझे बनारसी और कांजीवरम साड़ियां बहुत पसंद हैं। अपने काम के सिलसिले में जब हम अलग-अलग प्रांतों में जाते हैं और वहां के बुनकरों की मेहनत देखते हैं, तब समझ आता है कि भारत में कितनी विविधता है। तनेरा के इस स्टोर में मुझे वे सभी पारंपरिक बुनकर और खूबसूरत रंग एक साथ देखने को मिले, जो बहुत अच्छा अनुभव रहा। जानिए आहाना कुमरा के बारें में…
    Click here to Read more
    Prev Article
    दो दर्जन से अधिक प्रधान कैबिनेट मंत्री से मिले:मैनपुरी में पंचायत चुनाव समय पर कराने या कार्यकाल विस्तार की मांग
    Next Article
    वाराणसी में खलासी की डंपर से कुचलकर मौत:नो-एंट्री में घुसे डंपर को बैक कराते समय चपेट में आया, ट्रैफिक पुलिस पर अवैध वसूली का आरोप

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment