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    लखनऊ के KGMU पहुंचे देश-विदेश के डॉक्टर:कम पैसे में फेफड़ों के कैंसर का इलाज होगा, सुपर एडवांस तकनीकी बताई

    10 hours ago

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    फेफड़ों की बीमारी और कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं की सटीक जांच अब आसान होगी। लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एडवांस इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सम्मेलन में देश-विदेश के एक्सपर्ट डॉक्टर पहुंचे। उन्होंने ऐसी मशीनों और तरीकों की ट्रेनिंग दी, जिससे बिना किसी बड़े ऑपरेशन के फेफड़ों के अंदरूनी हिस्सों की जांच और इलाज किया जा सके। सम्मेलन में फेफड़ों के कैंसर में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की भूमिका पर चर्चा की गई। पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेशर वेद प्रकाश ने बताया- विभाग आधुनिक ब्रोंकोस्कोपी, EBUS से जांच, स्टेजिंग, इमेज-गाइडेड प्रोसेस के साथ में काम करता है। इससे समस्या खत्म हो जाती है। एक्सपर्टस ओपनियन के साथ में कौशल विकास पर कार्यशाला एआईपीकॉन 2026 में व्यावहारिक कौशल विकास कार्यशाला पर प्रजेंटेशन दिया गया। सम्मेलन इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, थोरेसिक ऑन्कोलॉजी और एडवांस्ड रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ भी एक साथ पहुंचे हैं। इससे केजीएमयू की स्थिति श्वसन चिकित्सा के क्षेत्र में मजबूत होगी। सम्मेलन में अमेरिका के डॉक्टर आशुतोष सचदेवा भी शामिल हुए। उन्होंने पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी को आगे बढ़ाने, फेफड़ों के कैंसर को खत्म करने और सहयोग को बढ़ावा देने के बारे में बताया। बिना चीरा लगाए उपचार के बारे में बताया हैदराबाद से आए डॉक्टर वी प्रतिभा ने फेफड़ों के कोनों (परिधीय फुफ्फुसीय घावों) में गहराई तक स्थित कैंसर या बीमारियों की सटीक जांच के लिए उन्नत उपकरणों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि नई तकनीकें जैसे ईबीयूएस (EBUS), नेविगेशनल ब्रोंकोस्कोपी, या रेडियल प्रोब का उपयोग करके, बिना चीरा लगाए फेफड़ों के छोटे से छोटे हिस्से से भी सटीक सैम्पल (बायोप्सी) लिया जा सकता है, जिससे जल्दी और सही इलाज में मदद मिलती है। RMLIMS, लखनऊ के डॉ हेमंत कुमार ने बताया कि तकनीक के जरिए शरीर के भीतर लिम्फ नोड की सही लोकेशन को कैसे पहचाना जाए। रोबोटिक नेविगेशन पर दिया प्रजेंटेशन रोबोटिक नेविगेशन और क्रायो (बर्फ वाली तकनीक) के जरिए बायोप्सी लेने के तरीके के बारे में बताया गया। मेरठ के डॉ. वीरौत्तम तोमर ने इस प्रक्रिया को करने का आसान और चरण-दर-चरण तरीका समझाया। AIIMS ऋषिकेश के डॉ गिरीश सिंधवानी ने इस बात पर जोर दिया कि जांच की रिपोर्ट को और अधिक भरोसेमंद और सटीक कैसे बनाया जा सकता है। SGPGI, लखनऊ के डॉ अजमल खान ने छाती के इलाज में कॉन्वेक्स प्रोब ईबीयूएस के बढ़ते इस्तेमाल और इसके फायदों के बारे में जानकारी दी। मरीजों के उपचार को लाइव दिखाया गया सम्मेलन में मरीजों के उपचार प्रक्रिया को लाइव दिखाया गया। इसके साथ ही नए डॉक्टर्स की शंकाओं को भी दूर किया गया। KGMU के डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि इमरजेंसी (ICU) में ब्रोंकोस्कोपी कैसे जान बचा सकती है। बेंगलुरु के डॉ बाशा जलाल खान ने फेफड़े के प्रत्यारोपण के बाद की सावधानियों पर जानकारी साझा की। जयपुर के डॉ राकेश गोदारा ने डॉक्टरों को सिखाया कि कैसे कम लागत में मरीजों को विश्व स्तरीय इलाज दिया जा सकता है। दिल्ली से आए डॉ अमित धामिजा, ऋषिकेश से डॉ गिरीश सिंधवानी, मेरठ से डॉ वीरौत्तम तोमर और लखनऊ से डॉ हेमंत कुमार व डॉ चंचल राणा ने अपनी देखरेख में डॉक्टरों को मशीनों पर अभ्यास कराया।
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