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    लखनऊ में ईद पर रातभर गुलजार रहे बाजार:लखनवी सेवई की दुबई समेत 20 राज्यों में सप्लाई, रोस्ट सेवई की सबसे ज्यादा डिमांड

    9 hours ago

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    लखनऊ में शनिवार को ईद धूमधाम से मनाई जा रही है। रमजान के 30 रोजे मुकम्मल होने के बाद लोग आज ईद मना रहे हैं। चांद दिखने के बाद शनिवार को रातभर बाजार गुलजार रहे। सेवई के बिना ईद पूरी नहीं होती। इस पर भी लखनऊ की सेवइयां हों तो फिर क्या ही कहने। लखनवी सेवइयां एक बार चखने वाले हर साल ईद का इंतजार करते हैं। लखनऊ में बनने वाली सेवई भारत के विभिन्न कोनों से होते हुए सऊदी अरब और दुबई तक में पहुंचती है। लखनऊ की सेवई की डिमांड उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों के साथ अलग-अलग राज्यों में है। सेवई बनाने वाली बताते हैं कि साउथ से होते हुए विदेश तक पहुंचती है। डिमांड को देखते हुए इसे खास तरीके और बड़ी मात्रा में तैयार किया जाता है। रमजान को अलविदा कहते हुए जब ईद ने दस्तक दी तो अपने साथ लेकर आई किमामी सेवई की भीनी-भीनी खुशबू और जुबान को हमेशा याद रहने वाला जायका। पढ़िए लखनवी सेवइयों पर क्या बोले दुकानदार- रमजान में काम 90 प्रतिशत बढ़ा लखनऊ के बालागंज इलाके में फैक्ट्री संचालित करने वाले मोहम्मद उनैस बताते हैं- 5 पीढ़ियों से सेवई का कारोबार कर रहे हैं। रमजान महीने में सेवई बनाने के काम में तेजी आ जाती है। 24 घंटे अलग-अलग शिफ्ट में काम होता है। दिन-रात काम चलता है। प्रतिदिन लगभग 2000 से 2500 किलो सेवई तैयार की जाती है। पूरे साल में 90 प्रतिशत सेवई ईद में बिकती है। इस साल कुछ महंगाई का भी असर है। मैदा लगभग 10 प्रति किलो महंगा हुआ है। ईद करीब आ जाती है तो काम बढ़ जाता है। विदेश तक जाती है सेवई उनैस बताते हैं कारीगर और लेबर दोगुना लगाना पड़ता है। लखनऊ में बनने वाली सेवई की डिमांड 20 से अधिक राज्यों में है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, हैदराबाद, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में इसकी डिमांड है। साउथ के जरिए ही सेवई सऊदी अरब और दुबई तक पहुंचती है। मोहम्मद उनैस ने बताया कि सेवइयां बनाने के लिए अब मशीनों का इस्तेमाल अधिक किया जाता है। सबसे पहले आटा मशीन में गूंथा जाता है। उसके बाद दूसरी मशीन के माध्यम से सेवई के महीन लरी निकाली जाती है , फिर उसे धूप में सुखाने के बाद आग की भट्ठी में पकाया जाता है। मार्केट में 4 तरह की सेवई अमीनाबाद में सेवई व्यापारी मोहम्मद इस्लाम बताते हैं कि ये उनका पुश्तैनी कारोबार है। ईद पर सबसे अधिक सेवई की ही डिमांड रहती है। मार्केट में कुल 4 तरह की सेवइयां हैं। मोटी-महीन सेवई किमामी सेवई, बनारसी सेवई और लच्छा सेवई। इन सेवइयों की शुरुआत 70 से लेकर 150 रुपए प्रति किलो तक है। हर साल महंगाई का कुछ असर जरूर रहता है। मां के हाथ की सेवई खास ग्राहक अली हुसैन ने बताया कि सेवई के बिना इस अधूरी है। अमीर-गरीब हर कोई सेवई जरूर खरीदता है। हम लोग ज्यादातर किमामी सेवई ही पसंद करते हैं। दूसरा बनारसी सेवई मगर इसे बनाना थोड़ा मुश्किल होता है हर कोई इसे परफेक्ट नहीं बना पाता है। घर के बुजुर्ग और पुराने लोग बनारसी सेवई ज्यादा अच्छा बनाते हैं। इसमें खोया, चाशनी, मेवा सबकी मात्रा बराबर होना जरूरी है। सबसे बड़ी चीज है इसे धीमी आंच पर पकाना। त्योहार मोहब्बत का रंग भरते हैं अली कहते ही सेवई हमारे समाज मिठास घोलने का काम करती है। हमारे हिंदू दोस्तों को इसका खास इंतजार रहता है। उन्हें हमारी मां की हाथ की सेवई बहुत पसंद है उनके लिए खास तौर पर बनवाते है। समाज में एक अच्छा मैसेज जाता है वर्षों से हमारी दोस्ती है हमने कभी नहीं सोचा कौन हिंदू कौन मुसलमान। होली पर इसी तरह जम लोग गुझियों की डिमांड करते है। तो त्योहार समाज में मोहब्बत का रंग भरते हैं।
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