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    पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर रविवार के दिन होने जा रहा बड़ा खेल, नीतीश कुमार से जुड़े हैं इसके तार!

    3 hours from now

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    2027 में यूपी में विधानसभा चुनाव है। लेकिन उससे पहले ही यूपी में सियासी समीकरण बिगड़ने और बनने की शुरुआत भी हो चुकी है। सियासी दल नए-नए समीकरण बनाने की शुरुआत भी कर चुके हैं। नए समीकरण बनाने की शुरुआत भी कर चुके हैं। और ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ा खेला होने जा रहा है और इसके तार जुड़े हैं बिहार से। दरअसल बिहार में जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला लिया और यह भी हुआ कि अब वह मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे। उसके बाद से पूर्व सांसद और नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे केसी त्यागी ने पार्टी छोड़ दी। जेडीयू छोड़ने के बाद अब यह कयास लगाए जा रहे थे कि वो 22 मार्च को आरएलडी का दामन थाम सकते हैं। अब इस अटकलों को बल केसी त्यागी की तरफ से जारी नए प्रेस रिलीज से मिला है। पूर्व राज्यसभा सांसद की तरफ से जारी प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि 22 मार्च को दिल्ली के मावलंकर हॉल में दोपहर 12:30 बजे एक राजनीतिक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में भारत के कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी चीफ गेस्ट होंगे। इसे भी पढ़ें: Bihar में BJP का CM, JDU के दो Deputy CM? सत्ता के नए Power Game की स्क्रिप्ट तैयारआपको बता दें कि केसी त्यागी पश्चिमी यूपी से आते हैं और अगर जयंत चौधरी की पार्टी में केसी त्यागी शामिल होते हैं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जो सियासी समीकरण है वह बदल जाएगा। ऐसी खबरें सामने आई हैं कि जयंत चौधरी और केसी त्यागी के बीच मुलाकात व बातचीत हुई है।  22 मार्च को संभावित तौर पर केसी त्यागी आरएलडी में शामिल हो सकते हैं।  जब उन्होंने जेडीयू छोड़ने का ऐलान किया था तभी कहा था कि 22 मार्च को वह नई दिल्ली से बड़ा ऐलान करेंगे। आपको बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में त्यागी वोटर्स का काफी प्रभाव माना जाता है। कई सीटों पर त्यागी वोटर निर्णायक भूमिका में रहता है। कई ऐसी सीटें हैं जहां पर त्यागी वोटरों की संख्या 10% के आसपास है। ऐसे में वह हार और जीत का जो अंतर है वह तय करते हैं। इसी वजह से क्या जयंत चौधरी केसी त्यागी को अपनी पार्टी में लाने पर सोच रहे हैं।केसी त्यागी को दोनों सदनों में कार्य करने का रहा है अनुभवकेसी त्यागी पश्चिमी यूपी से आते हैं। पूर्व में यही इस पश्चिमी यूपी से ही लोकसभा के सांसद भी रह चुके हैं और त्यागी मतदाताओं में प्रभाव माना जाता है। ऐसे में क्या जयंत चौधरी एक नए जातीय समीकरण को साधने की कोशिश करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा। केसी त्यागी पर जयंत चौधरी ने कहा कि आरएलडी में शामिल होने का निर्णय लेते हैं तो उनका स्वागत है। मतलब कि अगर केसी त्यागी शामिल होना चाहते हैं तो जयंत चौधरी खुले दिल से उनका स्वागत करना चाह रहे हैं। केसी त्यागी वैसे भी चौधरी चरण सिंह की जमकर तारीफ कर चुके हैं। तो इसके बाद से यह बिल्कुल कयास लगाए जा रहे हैं कि केसी त्यागी का नया ठिकाना आरएलडी होगा। साफ़ है कि जयंत चौधरी ने आरएलडी के लिए विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। जयंत चौधरी मौजूदा समय में अपनी पार्टी के साथ भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में हैं। केंद्र सरकार में वह मंत्री हैं। उनकी पार्टी से कुछ नेता यूपी की योगी सरकार में भी मंत्री हैं।इसे भी पढ़ें: Sanjay Raut की UN से अपील- भारत आकर देखें Election में धांधली, PM Modi के दावे झूठेयूपी के चुनाव में नए समीकरण बनाने में लगे जयंतदरअसल भाजपा से गठबंधन के बाद आरएलडी से छिड़के मुस्लिमों की भरपाई करने के लिए जयंत चौधरी अब गुर्जर त्यागी ब्राह्मण तथा पिछड़ा समाज के लोगों को साधकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पकड़ को मजबूत करना चाहते हैं। दरअसल इस पूरी कहानी की शुरुआत को आप ऐसे समझिए कि 2022 में जब यूपी में चुनाव हुआ था तो उस वक्त आरएलडी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी। उन चुनाव में जयंत चौधरी की पार्टी को मुस्लिमों का भरपूर साथ मिला। लेकिन जयंत चौधरी को डर है कि अब वो भाजपा के साथ गठबंधन में है तो जब 27 के चुनावी मैदान में वो जाएंगे तब क्या मुस्लिम मतदाता उनके साथ आएगा या नहीं। इसीलिए अब वो नए समीकरण की तैयारी में जुटे हुए हैं। नीतीश संग केसी त्यागी का 50 साल पुराना संबंधआपको बता दें कि केसी त्यागी का नीतीश कुमार से 50 सालों का पुराना संबंध रहा है और केसी त्यागी पश्चिमी यूपी में बड़े प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। अक्टूबर 2003 में केसी त्यागी ने जेडीयू के साथ अपनी पारी की शुरुआत की लेकिन उससे पहले नीतीश कुमार से उनका जुड़ाव था। समता पार्टी और जनता दल जब मिलकर जेडीयू बनती है उस सफर में भी केसी त्यागी साथ रहे। जेडीयू में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाए। पार्टी महासचिव से लेकर पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और यहां तक कि राज्यसभा में भी पार्टी का पक्ष रखते रहे। 1989 से लेकर 1991 के बीच वह पश्चिमी यूपी के हापुड़ सीट से लोकसभा के सांसद चुने गए थे। तो इसी वजह से यह साफ है कि पश्चिमी यूपी में उनका प्रभाव रहा है। गाजियाबाद में उनका जन्म हुआ था।  बाद में आपको बता दें कि केसी त्यागी को राज्यसभा भी भेजा गया था और राज्यसभा में सांसद रहते हुए उन्होंने जेडीयू का पक्ष मजबूती से रखा था। केसी त्यागी देश के पढ़े लिखे नेताओं में उनकी गिनती होती है।
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