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    लखनऊ में 'रीजनल लैंग्वेज प्रमोशन डे' पर व्याख्यान:इंजीनियर्स संस्थान ने उर्दू भाषा के महत्व पर चर्चा की

    5 hours ago

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    द इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियरिंग के उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र, लखनऊ की ओर से तकनीकी व्याख्यान आयोजित किया गया। यह आयोजन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स भवन, रिवर बैंक कॉलोनी में 'रीजनल लैंग्वेज प्रमोशन डे' के तहत उर्दू भाषा के तहत किया गया। इस कार्यक्रम में इंजीनियरों और बुद्धिजीवियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। मुख्य वक्ता प्रो. जमाल नुसरत (रिटायर प्रोफेसर, वाल्मी एवं अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, उ.प्र.) ने उर्दू भाषा के ऐतिहासिक महत्व, साहित्यिक समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उर्दू उत्तर प्रदेश की द्वितीय राजभाषा है और यह प्रदेश की गंगा-जमुनी तहज़ीब की मजबूत कड़ी है। समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा प्रो. नुसरत ने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय भाषाएँ हमारी पहचान और सांस्कृतिक धरोहर की आधारशिला हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। उन्होंने उर्दू को केवल एक भाषा नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता का माध्यम बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के चेयरमैन इं. वी. पी. सिंह ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि तकनीकी संस्थाएं सिर्फ इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व निभाना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था आगे भी ऐसे जनोपयोगी कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी। क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता कार्यक्रम के संयोजक इं. जे. एम.एल जायसवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं मानद सचिव इं. एन. के. निषाद ने सफल संचालन और समन्वय करते हुए सभी अभियंताओं एवं गणमान्य सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह रहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और राष्ट्रीय एकता की मजबूत डोर है।
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