Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    लखनऊ नेशनल पीजी कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का दूसरा दिन:भारतीय ज्ञान प्रणाली पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

    2 hours ago

    1

    0

    लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का दूसरा दिन बेहद खास रहा। ‘रीइमेजिनिंग सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड गवर्नमेंट थ्रू इंडियन नॉलेज सिस्टमः विजन भारत @2047’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में तकनीकी सत्र–3 का सफल आयोजन हुआ, जिसमें शिक्षा, शोध और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। सत्र में डॉ. प्रदीप राव और डॉ. अजीत कुमार पांडेय की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों वक्ताओं ने अपने अनुभवों से सत्र को उच्च शैक्षणिक स्तर प्रदान किया। डॉ. राव ने शिक्षा, जागरूकता और सतत अधिगम को विकास की आधारशिला बताया, जबकि डॉ. पांडेय ने समावेशी विकास, संसाधनों के समान वितरण और पर्यावरण संतुलन पर जोर दिया। वेदों और उपनिषदों का ज्ञान बच्चों तक पहुंचाना जरूरी डॉ. पांडेय ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की नीति-निर्माण में भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत वेदों और उपनिषदों का ज्ञान बच्चों तक पहुंचाना जरूरी है। इससे भारतीय परंपरा मजबूत होगी और विकसित भारत का सपना साकार करने में मदद मिलेगी।कॉलेज के प्राचार्य प्रो. देवेन्द्र कुमार सिंह ने युवाओं में मनोवैज्ञानिक पूंजी के विकास में प्रभावी संवाद की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों और नैतिकता को आधुनिक शिक्षा के लिए प्रासंगिक बताया। AYUSH उत्पादों की बढ़ती उपयोगिता पर चर्चा तकनीकी सत्र में 50 से अधिक शोधार्थियों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। सत्र की अध्यक्षता डॉ. विशाल सक्सेना ने की। उनके मार्गदर्शन में विभिन्न विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।शोधार्थी प्राची सिंह ने ग्रीन करियर में भारतीय पारंपरिक ज्ञान की भूमिका बताई। डॉ. पुष्पांजलि ने कोविड के बाद बदलते उपभोक्ता व्यवहार और AYUSH उत्पादों की बढ़ती उपयोगिता पर चर्चा की। डॉ. रतन लाल ने योग को सार्वजनिक स्वास्थ्य और सतत विकास लक्ष्य से जोड़ा। डिजिटल क्षेत्र में डॉ. विवेक गांगुली और नीरज कुमार आर्य ने वित्तीय समावेशन और UPI की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं डॉ. ऋषभ कुमार और डॉ. शबनम ने डेटा सुरक्षा, ग्रीन फाइनेंस और पारदर्शिता पर जोर दिया।अंत में सुधा मिश्रा ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसे भारतीय मूल्यों को वैश्विक नैतिकता से जोड़ा। सत्र के समापन पर विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
    Click here to Read more
    Prev Article
    गाजियाबाद में 16वीं मंजिल से कूदी लड़की, मौत:यूपी पुलिस की तैयारी कर रही थी, घरवाले बोले- बेटी को धक्का दिया गया
    Next Article
    सिकंदरा में कौन मजबूत, विधायक अजीत पाल या कोई और:सपा से प्रभाकर पांडेय या दिलीप यादव, कांग्रेस-बसपा से किसे दिग्गज मानते हैं

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment