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    लखनऊ से 6 राज्यों तक नकली दवाओं की सप्लाई:अहमदाबाद में 1200 स्ट्रिप बरामद, खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

    2 hours ago

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    लखनऊ में नकली दवाओं के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई में अब बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हो रहा है। जांच में पता चला है कि नकली दवाओं की सप्लाई उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक तक की जा रही थी। जांच के दौरान कहीं दवा बनाने की संदिग्ध यूनिट मिली तो कहीं नामी कंपनियों के नाम और बैच नंबर वाली नकली पैकिंग बरामद हुई। कुछ जगह फर्जी बिलों के जरिए दवाओं की खरीद-बिक्री भी दिखाई गई। अहमदाबाद में नकली ब्लड प्रेशर की दवा की 1200 स्ट्रिप बरामद होने और करीब 1500 स्ट्रिप बिकने के बाद जांच अब लखनऊ से बाहर फैली पूरी सप्लाई चेन पर केंद्रित है। लखनऊ का अमीनाबाद मेडिसिन मार्केट एशिया के बड़े दवा बाजारों में शामिल है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली दवाओं का नेटवर्क इस बाजार से किस तरह जुड़ा हुआ है और इसकी सप्लाई कहां-कहां तक फैली है। अहमदाबाद से खुली लखनऊ की एक और कड़ी गुजरात के अहमदाबाद में अपराध शाखा और खाद्य एवं औषधि विभाग की संयुक्त कार्रवाई में नकली निकार्डिया रिटार्ड 10 की 1200 स्ट्रिप बरामद हुईं। जांच में सामने आया कि इसी दवा की करीब 1500 स्ट्रिप पहले ही बाजार में बेची जा चुकी थीं। एक स्ट्रिप में 10 गोलियां होती हैं, यानी करीब 15 हजार नकली गोलियां मरीजों तक पहुंचने की आशंका है। सबसे अहम बात यह है कि जांच में इस खेप का कनेक्शन लखनऊ से मिला। पुलिस के मुताबिक नकली दवा पहले उत्तराखंड से लखनऊ पहुंची और इसके बाद गुजरात भेजी गई। करीब 3600 स्ट्रिप की एक खेप तैयार हुई थी। इसमें 2700 स्ट्रिप अहमदाबाद और 900 स्ट्रिप मैसूर भेजी गई थीं। यानी एक ही खेप का रास्ता उत्तर प्रदेश से गुजरात और कर्नाटक तक गया। तीन गिरफ्तारियां, लखनऊ के दो लोग अहम कड़ी अहमदाबाद मामले में दर्शिल सांघवी, देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी को गिरफ्तार किया गया है। दर्शिल सांघवी अहमदाबाद में मेडिकल कारोबार से जुड़े बताए गए हैं, जबकि देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी लखनऊ के रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक लखनऊ के दोनों आरोपी नकली दवा की गुजरात तक सप्लाई से जुड़े थे। वहीं दर्शिल पर अहमदाबाद में दवा को आगे मेडिकल स्टोर तक पहुंचाने की भूमिका का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया कि अहमदाबाद में नकली दवा करीब 11 मेडिकल स्टोर तक पहुंचाई गई। पुलिस के मुताबिक ज्यादा कमीशन के लालच में दवा खरीदने और आगे बेचने का खेल हुआ। करीब 18 प्रतिशत कमीशन की बात भी जांच में सामने आई है। लखनऊ में जुलाई से लगातार खुल रहा नकली दवाओं का खेल अहमदाबाद की कार्रवाई को लखनऊ में पिछले दो महीने से चल रही जांच से जोड़कर देखें तो तस्वीर और गंभीर हो जाती है। जुलाई में लखनऊ के अमीनाबाद समेत कई इलाकों में नकली और संदिग्ध दवाओं के खिलाफ कार्रवाई हुई। जांच में ब्लड प्रेशर, गैस, बुखार, दर्द, सूजन और संक्रमण की दवाओं समेत करीब 27 तरह की दवाएं संदिग्ध मिलीं। कई जगह दवाओं की वास्तविक सप्लाई और कागजों पर दर्ज खरीद-बिक्री में अंतर मिला। कुछ फर्मों पर बिना वास्तविक माल के बिल बनाने और दूसरी फर्मों के नाम पर दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाने के आरोप सामने आए। फर्जी बिलिंग से बाजार में खपाया जा रहा था माल कई मामलों में कागजों पर दवा की खरीद दिखाई गई, लेकिन मौके पर उतना स्टॉक नहीं मिला। कहीं बिल में माल दर्ज था, लेकिन भौतिक रूप से स्टॉक मौजूद नहीं था। ऐसे मामलों के बाद जांच एजेंसियों का फोकस मेडिकल स्टोर से आगे दवा एजेंसियों, सप्लायर और निर्माण-पैकिंग से जुड़े लोगों तक पहुंचा। 12 अगस्त को अमीनाबाद में हुई कार्रवाई में भी संदिग्ध बिलिंग सामने आई थी। इससे जांच की दिशा केवल दवा बेचने वालों तक सीमित नहीं रही। उज्जैन में आयुर्वेदिक लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवा लखनऊ से जुड़े मामले की जांच मध्य प्रदेश के उज्जैन तक पहुंची। यहां रुद्राया फार्मा में आयुर्वेदिक दवा बनाने के लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवा लिवेरा-500 तैयार किए जाने का आरोप सामने आया। इस दवा में लेवेटिरासेटम होता है, जिसका इस्तेमाल मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने में किया जाता है। जांच के मुताबिक उज्जैन में करीब 4.80 लाख गोलियां यानी लगभग 32 हजार स्ट्रिप तैयार की गईं। इन्हें हरिद्वार भेजा गया। सहारनपुर में पैकिंग की पूरी तैयारी मिली पूछताछ के बाद जांच सहारनपुर के नागल तक पहुंची। यहां एक बेसमेंट में दवाओं की पैकिंग से जुड़ा सामान मिला। दो बैच जांच में नकली निकले लखनऊ में पकड़ी गई लिवेरा-500 के दो बैच-एन2600803 और एन2601077 को सरकारी प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया था। जांच में दोनों को प्रकृति से असली नहीं पाया गया। इसके बाद जांचकर्ताओं का फोकस इस बात पर गया कि इन दवाओं का निर्माण कहां हुआ, कच्चा माल कहां से आया, पैकिंग किसने तैयार की और तैयार माल किस रास्ते से बाजार तक पहुंचाया गया। किन दवाओं की जांच हुई? अब तक सामने आए अलग-अलग मामलों में इन दवाओं की जांच हुई है— एक दवा, कई रास्ते और कई शहर जांच में सामने आए मामलों को जोड़ने पर नेटवर्क का तरीका कुछ इस तरह दिखाई देता है। पहले दवा या उसका कच्चा माल जुटाया जाता है। इसके बाद किसी जगह पर दवा तैयार या संदिग्ध दवा की पैकिंग की जाती है। फिर असली कंपनी के नाम, बैच नंबर और पैकिंग सामग्री का इस्तेमाल कर उसे बाजार में असली दवा जैसा दिखाने की कोशिश होती है। इसके बाद दवा एजेंसी या सप्लायर के जरिए माल दूसरे शहर या राज्य में भेजा जाता है। कागजों पर इसकी खरीद-बिक्री दिखाने के लिए बिलिंग का सहारा लिया जाता है। अंत में मेडिकल स्टोर तक पहुंची दवा सामान्य दवा की तरह मरीजों को बेची जाती है। अहमदाबाद की 3600 स्ट्रिप की खेप इस पूरी चैन का एक उदाहरण है। इसमें माल का एक हिस्सा गुजरात और दूसरा हिस्सा कर्नाटक भेजा गया। छह राज्यों तक पहुंची जांच की कड़ियां अभी तक सामने आई जांच और अलग-अलग मामलों के आधार पर इस नेटवर्क की कड़ियां उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक तक जाती दिखाई दे रही हैं। अलग-अलग मामलों में महाराष्ट्र का कनेक्शन भी सामने आया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अलग-अलग मामलों के बीच वास्तविक कारोबारी और आपराधिक कनेक्शन कितना है। सबसे बड़ा सवाल-लखनऊ ही क्यों? जांच में बार-बार लखनऊ का नाम सामने आने से यह सवाल अहम हो गया है। लखनऊ में बड़ा थोक दवा बाजार, दवा एजेंसियां, मेडिकल स्टोर और दूसरे राज्यों तक माल पहुंचाने का मजबूत परिवहन नेटवर्क है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसी कारोबारी ढांचे का इस्तेमाल नकली दवाओं की सप्लाई में किया गया। अमीनाबाद समेत शहर के बड़े दवा बाजारों से नेटवर्क की वास्तविक कड़ी कितनी गहरी है, इसकी जांच जारी है।
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