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    लखनऊ विश्वविद्यालय में UGC के खिलाफ प्रदर्शन:छात्र संगठनों ने निकाला समता मार्च, बोले- UGC से विश्वविद्यालय में भेदभाव खत्म होगा

    3 hours ago

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    लखनऊ विश्वविद्यालय में UGC के समर्थन में बुधवार को विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने 'समता मार्च' निकाला। मार्च यूनिवर्सिटी गेट से बाहर निकलता कि इससे पहले ही विश्वविद्यालय के गेट पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। इस दौरान छात्रों ने नारा लगाया- ‘रोहित एक्ट लागू करो, लागू करो।’ प्रदर्शन में AISA , NSUI और समाजवादी छात्रसभा से जुड़े छात्र शामिल हुए। नोकझोंक भी हुई, जमीन पर बैठे छात्र लखनऊ विश्वविद्यालय से के अंदर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को रोकने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन आ गया। मुख्य गेट से जब छात्र डीएम आवास की तरफ बढ़ने लगे तो पुलिस ने घेराबंदी करके रोक लिया। आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे छात्र और पुलिसकर्मियों में लगातार नोकझोंक हुई। पुलिस ने छात्रों को मार्च निकालने से रोका। इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्र जमीन पर ही बैठ गए। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि जब तक UGC लागू नहीं करवा लेंगे, पीछे नहीं हटने वाले। ‘जब भेदभाव नहीं करते तो डरते क्यों हो’ छात्र संविधा ने कहा- हम लोगों का प्रदर्शन UGC के उन नए नियमों के समर्थन में है जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। मेरा कहना है कि नए नियमों से इतना डरना क्यों? जब आप एससी-एसटी और ओबीसी छात्रों से भेदभाव नहीं करते हो तो डरते क्यों हो? उनको अपने साथ बैठाते हो, किसी तरह से अपमानित नहीं करते तो फिर UGC के नए नियमों से डर क्यों रहे हो । यह नियम हमें समानता से रहने का मौका देगा। देश के बड़े शैक्षणिक संस्थानों में कमेटी बैठी जिससे यह बात स्पष्ट हो गई कि दलित और ओबीसी छात्रों के साथ भेदभाव होता है। ‘विश्वविद्यालयों में जाति के आधार पर नंबर कटते हैं’ प्रदर्शन में शामिल शुभम खर्कवर ने कहा कि UGC इसलिए जरूरी है क्योंकि 2018 से 21 तक में एससी-एसटी और ओबीसी के 98 छात्रों की मौत हुई। रोहित वेमुला जैसे छात्रों की मौत इस बात का उदाहरण है कि यूनिवर्सिटी में कितना भेदभाव है। एम्स के पड़ोस में एक मेडिकल कॉलेज है जहां पर जातिगत आधार पर 30 से अधिक छात्रों के नंबर काटकर फेल कर दिया गया। ‘जाति के आधार पर होता है भेदभाव’ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कमेटी बनी और आगे छात्रों के हित में फैसला हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 2013 के यूजीसी बिल से काम नहीं चल पा रहा है इसलिए नया कानून लाया जा रहा है। आज उसी सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्टे कर दिया। जो लोग जातिगत विरोध को विशेष अधिकार समझते हैं, वही इसका विरोध कर रहे हैं। आज भी विश्वविद्यालय में जाति के आधार पर भेदभाव होता है।
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